सर्दी में किसानों के लिए आमदनी का स्रोत बनेगी गाजर की खेती
HR Breaking News (carrot cultivation) सर्दियों में गाजर की मांग बढ़ जाती हैं, जो किसानों के लिए आमदनी का एक बेहतर ऑप्शन बन जाती है। गाजर की खेती (gajar ki kheti) किसानों के लिए आमदनी का बेहतर सोर्स है, जिसके जरिए किसान कुछ ही महीनों में अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। अगर आप भी किसान है तो ये खबर आपके लिए फायदेमंद होने वाली है। खबर में जानिए किसानों के लिए गाजर की खेती कैसे लाभदायक है।
कैसे मिलेगा गाजर का बेहतर उत्पादन
गाजर के बेहतर उत्पादन (better production of carrots) के लिए बुवाई का सही समय, क्षेत्र के अनुरूप किस्म और खेत की तैयारी पर खास ध्यान देना बेहद जरूरी है। हरियाणा में साल 2025-26 में तकरीबन 3.11 लाख मीट्रिक टन गाजर का उत्पादन (carrot production) रिकॉर्ड हुआ, जिसके बाद रकबा बढ़ाने पर बागवानी विभाग की ओर से जोर दिया है।
गाजर की देसी किस्म की बुवाई
मैदानी इलाकों में गाजर की देसी किस्म (local variety of carrot) की बुवाई अगस्त से सितंबर महीने में होती है, लेकिन किसान यूरोपीय किस्मों पर अधिक फोकस कर रहे हैं, जिसकी बुवाई का सही समय अक्टूबर-नवंबर है। मौसम, तापमान और स्थानीय कृषि परिस्थितियों के मुताबिक बुवाई के समय में बदलाव हो सकता है। बता दें कि गाजर उचित तापमान मिलने पर ज्यादा विकसित होती है।
कैसे करें किसान किस्म का चुनाव
किसानों को किस्म का चुनाव करते समय बीज विक्रेता के दावे पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विशेषज्ञ की सिफारिश को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की किस्म में हिसार गेरिक गाजर की किस्म (kaise kre gajar ki kheti) प्रमुख किस्म है।
साथ ही पूसा केसर और पीसी 34 जैसी किस्मों के बारे में किसान सोच सकते हैं, लेकिन स्थानीय मौसम, बुवाई के समय और बाजार की मांग के अनुकूल उपयुक्त किस्म की पुष्टि कृषि जानकारी से करना बेहद सही रहेगा।
सड़ी गोबर खाद का करें यूज
गाजर की अच्छी पैदावार (Good yield of carrots) के लिए खेत की मिट्टी भुरभुरी, गहरी और ढेलों और पत्थरों से मुक्त होनी चाहिए। कच्ची गोबर खाद डालने से जड़ों का आकार बिगड़ सकता है। ऐसे में सड़ी गोबर खाद का ही यूज करना चाहिए। बीज की मात्रा और कतारों की दूरी विधि के मुताबिक तय करें।
मंडी में गाजर की आवक
बीजों के अंकुरण के लिए मिट्टी में नमी बनाए रखना भी बेहद अनिवार्य है। सिंचाई का अंतर मिट्टी, मौसम और फसल की अवस्था के अनुसार निर्धारित करें। खाद और उर्वरकों का यूज मिट्टी की जांच और कृषि जानकारों की सलाह के बेस पर करें। किसानों को बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी, तुड़ाई और ढुलाई की लागत के हिसाब से पहले तैयार करना चाहिए।
मंडी में गाजर की आवक (Arrival of carrots in market), बीते सीजन के भाव और खरीदारों की मांग की जानकारी जुटाना सही रहेगा। बढ़िया भाव की उम्मीद में बड़े इलाकों में बुवाई नहीं करनी चाहिए, बल्कि लागत, पानी और बिक्री व्यवस्था के हिसाब से रकबा तय करना सही रहेगा।