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IMD Winter alert 2026 : इस बार सर्दियों में ज्यादा नहीं गिरेगा तापमान, 2 डिग्री रह सकता है अधिक

IMD Winter alert 2026 : इस बार सर्दियों के मौसम में (IMD Winter alert) सर्दी कम पड़ेगी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सर्दियों के मौसम में तापमान में ज्यादा गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। वहीं आगे खबर में हम जानेंगे की 2015 से 2024 तक किस साल में सबसे कम सर्दी पड़ी। वहीं कम सर्दी का फसलों पर क्या असर पड़ेगा चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।   

 

HR Breaking News (IMD Winter alert 2026) : देश में मानसून के कमजार रहने के बाउ अब सर्दियों के मौसम को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है। प्रशांत महासागर में विकसित हो रहा अलनीनो इस बार सर्दी के मिजाज को प्रभावित कर सकता है। मौसम से जुड़े अनुमानों के मुताबिक दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के  बीच अलनीनो की स्थिती प्रबल बनने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तरप्रदेश के मैदानी क्षेत्रों में दिन और रात का तापमान सामान्य से 1 या 2 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इसका असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि गेहूं, चना, सरसों आदी रबी फसलों पर असर पड़ेगा।

 

मैदानी इलााकों में कम होगी ठंड

इस बार सर्दियों (winter 2026 ki suruat) की शुरुआत से ही तापमान में सामान्य से अधिक गर्माहट बने रहने की आशंका है। दिसंबर के मध्य तक कड़ाके की ठंड का इंतजार लंबा हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अलनीनो के प्रभाव से पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी कम होने और मैदानी इलाकों में सर्दियों की बारिश घटना की संभावना है। इससे शीतलहर की अवधि भी कम हो सकती है। हरियाणा समेत उत्तर पश्चिम भारत के कई हिस्सों में ठंड वाले दिनों की संख्या सामान्य के मुकाबले लगभग आधी रहने का अनुमान है। हालांकि इस दौरान कोई प्रभावित पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है तो कुछ दोनों के लिए तेज तापमान में तेजी से गिरावट आ सकती है।

गेहूं के उत्पादन पर पड़ेगा असर (2026 winter update)

सर्दियों में तापमान अधिक रहने का सबसे बड़ा असर गेहूं की फसल पर पड़ सकता है। सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ने पर फसल जल्दी पकने की ओर से बढ़ सकती है। इससे गेहूं का दाना भरने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा और दाने छोटे और हल्के रह सकते हैं। ऐसे में हालत में उत्पादन 10 से 15 प्रतिशत तक कम होने की आशंका जताई गई है।

इन फसलों पर भी पड़ेगा असर 

सरसों की फसल पर भी गर्म और शुष्क मौसम का असर पड़ सकता है। इससे चेप किट का प्रकोप बढ़ने और व्हाइट रस्ट यानी सफेद फंगल का खतरा बढ़ जाएगा। वहीं चना और मटर में अधिक तापमान के कारण फुल समय से पहले झड़ने की आशंका रहेगी। जिससे फलियां की संख्या उपज प्रभावित हो सकती है। 

पहले भी हो चुका ऐसा (2026 winter alert news)

पिछले वर्षों के आंकड़ों की बात करे तो साल 2015-16 में मजबूत अलनीनो के दौरान देश में सर्दियों की बारिश सामान्य से काफी कम रही थी और ठंड का असर सीमित रहा था। वहीं  साल 2023-24 का सर्दी का मौसम भी गर्म दर्ज किया गया था। इस दौरान औसत न्यूनतम तापमान करीब 13.5 डिग्री सेल्सियस था। जिसे 1901 के बाद सबसे गर्म शीतकालीन मौसम में शामिल किया गया है। उस समय सर्दियों की बारिश में बड़ी कमी दर्ज हुई थी।