हिसार एचएयू और टैफे कंपनी के बीच में एमओयू साइन, किसानों की समस्या पर होगा अध्ययन
HR Breaking News (HAU News) : खेती में आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ कृषि उपकरणों को किसानों की जरूरतों के मुताबिक विकसित करने की दिशा में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (Haryana Agricultural University) ने पहल की है। विश्वविद्यालय ने ट्रैक्टर एवं कृषि उपकरण निर्माता कंपनी ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड (Company Tractors & Farm Equipment Limited) के साथ समझौता किया है। इसके तहत खेतों में ट्रैक्टरों के प्रदर्शन का परीक्षण करने के साथ कृषि कार्यों के दौरान सामने आने वाली तकनीकी समस्याओं का अध्ययन किया जाएगा। इस प्रक्रिया से मिलने वाले निष्कर्ष कंपनी के साथ साझा किए जाएंगे, ताकि भविष्य में अधिक उपयोगी और बेहतर कृषि उपकरण तैयार किए जा सकें। कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने बताया कि टैफे के साथ यह साझेदारी की गई है।
खेतों में परीक्षण के बाद कंपनी को मिलेगा वैज्ञानिक फीडबैक
एचएयू फार्म के निदेशक-कम-नियंत्रण अधिकारी डॉ. संजय ठकराल (Dr. Sanjay Thakral, Director-cum-Controlling Officer, HAU Farm) ने बताया कि विश्वविद्यालय के अनुसंधान फार्मों में संयुक्त रूप से कृषि उपकरणों का उपयोग और मूल्यांकन किया जाएगा। इससे खेती के विभिन्न कार्यों में मशीनों की उपयोगिता और कार्यक्षमता का आकलन संभव होगा। कृषि यंत्रीकरण से किसानों का समय और श्रम बचाने के साथ उत्पादन संबंधी कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
एमओयू के तहत
टैफे कंपनी एचएयू (HAU latest news) के आरडीएस सीड्स फार्म को दो आधुनिक ट्रैक्टर उपलब्ध करवाएगी। इनका विभिन्न कृषि कार्यों में इस्तेमाल कर वैज्ञानिक तरीके से प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। इसके अलावा खेतों में ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों के उपयोग के दौरान आने वाली व्यावहारिक व तकनीकी दिक्कतों की पहचान की जाएगी। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक परीक्षणों से प्राप्त आंकड़ों और निष्कर्षों को टैफे के साथ साझा करेंगे। इससे उपकरणों की डिजाइन और कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकेगा। वहीं विश्वविद्यालय की कृषि विशेषज्ञता और कंपनी के तकनीकी अनुभव से आधुनिक कृषि उपकरणों व तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
किसानों की जरूरतों के अनुरूप विकसित होंगे उपकरण
एचएयू के विस्तार शिक्षा निदेशक एवं मानव संसाधन प्रबंधन निदेशक डॉ. नरेश कौशिक (Dr. Naresh Kaushik, Director, Human Resource Management) ने बताया कि यह समझौता विश्वविद्यालय, कृषि उद्योग और किसानों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा। इससे कृषि मशीनरी के परीक्षण और अनुसंधान के साथ उपकरणों में सुधार की संभावनाएं बढ़ेंगी। स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुरूप मशीनों के विकास में भी मदद मिलेगी। खेतों में जुताई, बुआई और कटाई के दौरान आने वाली समस्याओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कर अधिक सुविधाजनक उपकरण तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। बेहतर यंत्रीकरण से ईंधन की खपत और कृषि कार्यों में लगने वाले समय को कम करने में भी मदद मिल सकती है।