8th Pay Commission : राज्य के कर्मचारियों को बड़ी सौगात, नए वेतन आयोग का हुआ गठन

8th Pay Commission :राज्य सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत देते हुए नए वेतन आयोग के गठन का ऐलान किया है। लंबे समय से सैलरी (salary) और भत्तों में बदलाव की मांग की जा रही थी। अब इस फैसले से वेतन संरचना की समीक्षा होगी और आने वाले समय में आय बढ़ने की उम्मीद है...इस अपडेट से जुड़ी पूरी डिटेल जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-

 

HR Breaking News, Digital Desk- (8th Pay Commission News) असम सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार ने सैलरी और पेंशन में बढ़ोतरी की दिशा में अहम कदम उठाते हुए 8वें वेतन आयोग (8th Assam Pay Commission) के गठन का ऐलान कर दिया है। इससे आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय बढ़ने की उम्मीद है।

 

 

लंबे समय से सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी (allowances hike) की मांग की जा रही थी। ऐसे में इस फैसले के बाद लाखों कर्मचारियों की आय (employees salary hike) में बड़ा उछाल आने की उम्मीद जगी है, जिससे सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह फैसला लाखों परिवारों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और सरकारी कामकाज की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।

2016 के बाद पहली बार सैलरी में होने जा रहा है बड़ा बदलाव-


असम में आखिरी बार सैलरी में बदलाव (Last change in salary in Assam) 1 अप्रैल 2016 से लागू हुआ था, जो 7वें असम वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित था। इसके बाद से कर्मचारियों की सैलरी में कोई बड़ा रिवीजन नहीं हुआ। अब असम सरकार ने राज्य कर्मचारियों के सैलरी स्ट्रक्चर (employees salary strucuture) को बेहतर बनाने के लिए 8वें असम वेतन आयोग 2026 को मंजूरी दे दी है। करीब 10 साल बाद फिर से सैलरी स्ट्रक्चर की पूरी समीक्षा शुरू होने जा रही है, जिससे बढ़ती महंगाई और खर्चों के बीच कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

पूर्व IAS अधिकारी को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी-


सरकार ने इस वेतन आयोग की कमान रिटायर्ड आईएएस अधिकारी (Retired IAS officer) और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव सुभाष चंद्र दास को सौंपी है। आयोग में चेयरमैन के साथ सात अन्य सदस्य भी शामिल किए गए हैं, जो राज्य की आर्थिक स्थिति और कर्मचारियों की जरूरतों का गहन अध्ययन करेंगे। इसमें वित्त विभाग, कार्मिक विभाग समेत अन्य अहम विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।

इसके साथ ही गुवाहाटी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रतुल महंता को भी आयोग का सदस्य बनाया गया है। आयोग का मुख्यालय गुवाहाटी में रहेगा और वित्त विभाग के सचिव सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। सरकार का मानना है कि इस फैसले से कर्मचारियों को आर्थिक मजबूती मिलेगी और प्रशासन की कार्यक्षमता भी बेहतर होगी।

अगले 18 महीनों में आएगी आयोग की फाइनल रिपोर्ट-


आठवें असम वेतन आयोग (8th pay commission latest update) को अपनी पूरी रिपोर्ट और सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इसके बाद सैलरी और भत्तों में बदलाव लागू किए जा सकते हैं। आयोग इस अवधि में असम के पिछले सैलरी रिवीजन, देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति और 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की संभावित सिफारिशों का भी अध्ययन करेगा। जरूरत पड़ने पर रिपोर्ट सौंपने की समय-सीमा बढ़ाई जा सकती है। रिपोर्ट आने के बाद असम सरकार चरणबद्ध तरीके से सैलरी बढ़ाने का फैसला भी कर सकती है।

यह आयोग सिर्फ सैलरी ही नहीं बल्कि भत्ते, काम की शर्तें और अन्य सुविधाओं की भी समीक्षा करेगा। आयोग यह भी देखेगा कि समय के साथ सैलरी में क्या बदलाव हुए हैं (What are the changes in salary?) और वर्तमान आर्थिक हालात क्या हैं।

पेंशनर्स के लिए भी आई राहत की खबर-


सरकार ने इस बार सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि बुजुर्ग पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स का भी खास ध्यान रखा है। आयोग बढ़ती महंगाई और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को ध्यान में रखते हुए यह आकलन करेगा कि पेंशन की राशि में कितनी बढ़ोतरी जरूरी है। इसके साथ ही महंगाई राहत और पेंशन रिवीजन (pension revision) के लिए एक ऐसा स्थायी सिस्टम सुझाया जाएगा, जिससे भविष्य में भी पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा बनी रहे। इस कदम से असम सरकार का लक्ष्य पेंशनर्स को दीर्घकालिक राहत देना है।

डिजिटल सिस्टम और कामकाज में सुधार पर जोर-


सरकार का कहना है कि सैलरी बढ़ाने के साथ साथ सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। इसमें डिजिटल टेक्नोलॉजी (digital technology) का ज्यादा इस्तेमाल, कर्मचारियों की ट्रेनिंग, बेहतर प्रदर्शन और नई स्किल पर जोर दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि हर कर्मचारी का काम मापा जा सके और उसी के आधार पर प्रोत्साहन दिया जाए।

किन्हें मिलेगा इस बढ़ोतरी का लाभ-


यह नया वेतन आयोग (new pay commision) राज्य सरकार के उन लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए काम करेगा, जिनकी सैलरी लंबे समय से पुराने वेतन ढांचे पर आधारित रही है। आयोग का मुख्य उद्देश्य वेतन और भत्तों में ऐसी बढ़ोतरी की सिफारिश करना है, जो कर्मचारियों के लिए लाभकारी हो और साथ ही राज्य के वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ भी न डाले।

इन कर्मचारियों पर लागू नहीं होगा यह आयोग-


हालांकि, इस वेतन आयोग के दायरे में ऑल इंडिया सर्विस के अधिकारी शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा कॉलेज प्रोफेसर और मेडिकल व तकनीकी संस्थानों में कार्यरत वे कर्मचारी, जिनकी सैलरी UGC या AICTE के वेतनमान पर तय होती है, उन्हें भी इससे बाहर रखा गया है। वहीं न्यायिक सेवा के अधिकारी भी इस आयोग के दायरे में शामिल नहीं होंगे।

राज्य की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर लिया जाएगा फैसला-

रकार ने स्पष्ट किया है कि सैलरी बढ़ोतरी का फैसला राज्य की आय, खर्च और कर्ज की स्थिति को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। आयोग भविष्य में बजट पर पड़ने वाले असर और अतिरिक्त खर्च का भी आकलन करेगा। जरूरत पड़ने पर असम सरकार सैलरी बढ़ोतरी को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सिफारिश भी कर सकती है।

यह फैसला असम के लाखों सरकारी कर्मचारियों (government employees of Assam) और उनके परिवारों के लिए राहत और नई उम्मीद लेकर आया है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी रहेगी कि सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होती है और इसका असर राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ कर्मचारियों व पेंशनर्स की आय पर किस तरह पड़ता है।