DA Arrears : कर्मचारियों के लिए सरकार की बड़ी घोषणा, दिया जाएगा बकाया डीए एरियर

DA Arrears : राज्य सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (DA) एरियर को लेकर सरकार की ओर से अहम घोषणा की गई है। इससे लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा। चुनाव से पहले आई इस घोषणा को कर्मचारियों के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है-

 

HR Breaking News, Digital Desk- (DA Arrears Announcement) पश्चिम बंगाल सरकार के कर्मचारियों के लिए रविवार को बड़ी खुशखबरी सामने आई है। चुनाव की तारीखों के ऐलान से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Chief Minister Mamata Banerjee) ने अहम घोषणा की है। उन्होंने कहा कि राज्य कर्मचारियों को वर्ष 2009 से लंबित महंगाई भत्ता (DA) एरियर दिया जाएगा, जिससे लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा।

चुनाव आयोग (election Commission) रविवार शाम चार बजे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु समेत पांच राज्यों की विधानसभा चुनाव तारीखों का ऐलान करने जा रहा है। इसके बाद जिन राज्यों में चुनाव होंगे, वहां मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) लागू हो जाएगा और नई घोषणाएं नहीं की जा सकेंगी। एमसीसी लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महंगाई भत्ता एरियर (dearness allowance arrears) देने सहित कई बड़े ऐलान किए।

ममता बनर्जी ने रविवार को घोषणा की कि उनकी सरकार इस साल मार्च से राज्य कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ता (DA) का बकाया भुगतान करेगी। इसमें शिक्षक, गैर-शिक्षक कर्मचारी (non-teaching staff) और अनुदान-प्राप्त संस्थानों के कर्मचारी शामिल हैं। ममता बनर्जी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, कर्मचारियों को मार्च 2026 से ROPA 2009 के तहत डीए एरियर मिलना शुरू हो जाएगा।

यह बकाया ‘वेतन और भत्ते का संशोधन’ (ROPA) 2009 से जुड़ा हुआ है। यह मुद्दा लंबे समय से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की प्रमुख मांग (Major demands of pensioners) रहा है, जिसमें शिक्षक, नगर निगम, पंचायत कर्मचारी और अन्य अनुदान-प्राप्त संस्थानों के कर्मचारी शामिल हैं। डीए बकाया को लेकर राज्य कर्मचारियों के एक वर्ग ने सुप्रीम कोर्ट (supreme court) का रुख किया था। शीर्ष अदालत ने 31 मार्च 2026 तक कर्मचारियों को डीए बकाया का 25 प्रतिशत भुगतान करने का आदेश दिया था।

राज्य को एक आदर्श नियोक्ता के रूप में कार्य करने की जरूरत पर जोर देते हुए, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कर्मचारियों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए शीर्ष अदालत ने एक समिति का गठन भी किया, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज इंदु मल्होत्रा कर रही हैं। समिति में तिलक सिंह चौहान और गौतम माघुरिया भी सदस्य हैं।

इस समिति को 6 मार्च तक डीए बकाया की कुल राशि और उसके भुगतान का स्पष्ट कार्यक्रम तय करने के साथ-साथ पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अदालत की तय समय-सीमा के अनुसार, शेष 75 प्रतिशत बकाया की पहली किस्त का भुगतान 31 मार्च तक किया जाना चाहिए। वहीं, अगली सुनवाई यानी 15 अप्रैल तक इस संबंध में एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट भी पेश करनी होगी।