DA Hike Update : कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते पर बड़ा अपडेट, जानें कितनी होगी बढ़ोतरी
DA Hike Update : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ते (DA) को लेकर बड़ी अपडेट सामने आई है। जनवरी 2026 में होने वाले अगले DA रिवीजन से पहले नए आंकड़े आ चुके हैं, जिसके आधार पर बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक इस बार महंगाई भत्ते में इतने प्रतिशत तक इजाफा हो सकता है-
HR Breaking News, Digital Desk- (DA Hike) श्रम और रोजगार मंत्रालय ने नवंबर 2025 के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स (AICPI-IW) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। यह इंडेक्स 148.2 पर दर्ज किया गया है। इसी के आधार पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स (pensioners) का महंगाई भत्ता (DA) तय किया जाता है, ताकि बढ़ती महंगाई का असर उनकी आय पर न पड़े।
DA रिवीजन जनवरी 2026 में क्यों खास-
महंगाई भत्ते (DA) का अगला रिवीजन जनवरी 2026 में होना है, जो कि हर छह महीने में होने वाली नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। इससे पहले जुलाई 2025 में DA को 54% से बढ़ाकर 58% किया गया था। कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, अगर दिसंबर 2025 का AICPI-IW इंडेक्स 147-148 के आसपास रहता है, तो अगली बार DA में 3% से 5% तक बढ़ोतरी संभव है।
कर्मचारी संगठनों का क्या है अनुमान-
ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (All India NPS Employees Federation) के अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल के मुताबिक, अगर दिसंबर 2025 में AICPI-IW करीब 147 रहता है, तो केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में लगभग 3 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।
उनके मुताबिक, अगर दिसंबर का AICPI-IW नवंबर 2025 के स्तर यानी 148.2 के आसपास रहता है, तो DA में 5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव है।
DA निकालने का क्या है फॉर्मूला-
पटेल ने महंगाई भत्ता निकालने का आधिकारिक फॉर्मूला उदाहरण के साथ समझाया है-
DA (%) = [{(पिछले 12 महीनों का औसत AICPI-IW × 2.88) − 261.41} / 261.41] × 100 − मौजूदा DA (%)
पहला उदाहरण: अगर AICPI-IW 148.2 रहता है, तो महंगाई भत्ता निकालने का हिसाब इस तरह बनता है। 148.2 को 2.88 से गुणा करने पर आंकड़ा 426.81 आता है। इसमें से 261.41 घटाने के बाद वैल्यू 165.4 रह जाती है।
इसे 261.41 से भाग देने पर परिणाम 0.63 आता है, जिसे 100 से गुणा करने पर कुल DA 63 प्रतिशत निकलता है। मौजूदा 58 प्रतिशत DA घटाने के बाद इसमें करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी बनती है।
दूसरा उदाहरण: अगर AICPI-IW 147 रहता है, तो 147 को 2.88 से गुणा करने पर आंकड़ा 423.36 आता है। इसमें से 261.41 घटाने के बाद वैल्यू 161.95 रह जाती है।
इसे 261.41 से भाग देने पर नतीजा 0.61 निकलता है, जिसे 100 से गुणा करने पर कुल DA करीब 61 प्रतिशत बनता है। मौजूदा 58 प्रतिशत DA घटाने के बाद इस स्थिति में महंगाई भत्ते में लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
DA कितना बढ़ेगा और सैलरी पर कितना पड़ेगा असर-
अगर DA में 3 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है, तो कर्मचारियों की सैलरी में सीधा इजाफा होगा। मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो मौजूदा 58% DA करीब 29,000 रुपये बनता है। अगर DA बढ़कर 61% हो जाता है, तो यह करीब 30,500 रुपये हो जाएगा। यानी हर महीने लगभग 1,500 रुपये ज्यादा मिलेंगे।
अगर DA 63 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, तो 50,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) करीब 31,500 रुपये हो जाएगा। यानी मौजूदा DA के मुकाबले हर महीने लगभग 2,500 रुपये ज्यादा मिलेंगे। कुल मिलाकर, DA में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की महीने की कमाई में साफ तौर पर अच्छा इजाफा देखने को मिलेगा।
DA बढ़ने का ऐलान कब करेगी सरकार-
ये सभी कैलकुलेशन अनुमान पर आधारित हैं और सिर्फ समझाने के लिए दिए गए हैं। जनवरी 2026 के लिए असली DA कितना बढ़ेगा, यह तभी साफ होगा जब श्रम मंत्रालय (Ministry of Labor) दिसंबर 2025 का AICPI-IW डेटा जारी करेगा। आमतौर पर केंद्र सरकार जनवरी से लागू होने वाले DA का ऐलान मार्च या अप्रैल में करती है।
आठवें वेतन आयोग से क्या-क्या उम्मीद-
- फिलहाल केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी (employees salary) में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि 7th Central Pay Commission का कार्यकाल 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो चुका है।
- आठवें वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के गठन के बाद, नवंबर 2025 से करीब 18 महीने में यह आयोग फिटमेंट फैक्टर पर अपनी सिफारिश देगा। यही फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों की अगली बेसिक सैलरी (employees basic salary) बढ़ोतरी तय करेगा।
- फिटमेंट फैक्टर लागू होते ही महंगाई भत्ता (DA) शून्य हो जाएगा और उसे नई बेसिक सैलरी में जोड़ दिया जाएगा। हालांकि, मंजीत सिंह पटेल पहले यह सुझाव दे चुके हैं कि DA को पूरी तरह खत्म करने के बजाय ऐसा सिस्टम होना चाहिए, जिससे ज्यादा महंगाई के समय कर्मचारियों की खरीदने की क्षमता पर असर न पड़े।