Employees News : सैलरी को लेकर बदलेगा 60 साल पुराना नियम, इतनी बेसिक सैलरी होगी जरूरी
Employees News :सैलरी को लेकर बड़ा बदलाव आने वाला है। वेतन संहिता के नए नियमों के तहत अब किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी कुल सीटीसी का कम से कम इतने प्रतिशत होना अनिवार्य होगा। यह छह दशक पुराने नियम को बदल रहा है और पीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी (gratuity) और ओवरटाइम जैसी सभी सुविधाओं पर असर डालेगा... आइए नीचे खबर में जान लेते है इससे जुड़ी पूरी डिटेल-
HR Breaking News, Digital Desk- (Employees Update)। नवंबर 2025 से लागू हुई चार राष्ट्रीय श्रम संहिताएं (लेबर कोड) और 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला आयकर अधिनियम 2025 हर बिजनेस के लिए सतर्क रहने का संकेत हैं। न्यूज एजेंसी एएनआई ने पेस्क्वेयर कंसल्टेंसी लिमिटेड के हवाले से बताया है कि यदि समय पर इन नियमों को अपनाया नहीं गया, तो कंपनियों को भारी जुर्माना (Heavy fines to companies) और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सभी चार राष्ट्रीय श्रम संहिताएं - वेतन संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य व कार्य परिस्थितियों की संहिता - नवंबर 2025 से लागू हो चुकी हैं। वहीं, आयकर अधिनियम 2025 (Income Tax Act 2025) 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा, जिससे यह दशकों का सबसे बड़ा पेरोल रिफॉर्म बन जाएगा। एचआर लीडर्स, सीएफओ और पेरोल प्रोफेशनल्स (Payroll Professionals) के लिए तैयारी का अब समय है।
2026 में पेरोल और अनुपालन के पांच प्रमुख बदलाव-
वेतन संहिता के अनुसार, अब किसी कर्मचारी के कुल सीटीसी में मूल वेतन (महंगाई भत्ते सहित) कम से कम 50% होना अनिवार्य है। इसका असर दूरगामी होगा: पीएफ (PF) योगदान बढ़ जाएगा क्योंकि ईपीएफ अब इसी संशोधित मूल वेतन पर आधारित होगा। ईएसआई की पात्रता सीमा में बदलाव (Change in ESI eligibility limit) से अधिक कर्मचारी इसका लाभ उठाएंगे। साथ ही, ग्रेच्युटी और ओवरटाइम का खर्च भी इस उच्च मूल वेतन से बढ़ जाएगा।
साथ ही, लीव एनकैशमेंट (leave encashment) की राशि भी अधिक होगी, जिससे कर्मचारियों पर कुल खर्च बढ़ना तय है। जो कंपनियां अभी भी अधिक भत्ते और कम मूल वेतन वाली संरचना पर निर्भर हैं, उन्हें तुरंत अपने वेतन ढांचे की समीक्षा और पुनर्गठन करना होगा।
दूसरा बदलाव: 2025 का नया आयकर अधिनियम लागू-
1 अप्रैल 2026 से भारत में लगभग छह दशक पुराना आयकर अधिनियम 1961 पूरी तरह से बदलकर नया आयकर अधिनियम 2025 लागू होगा। इसका असर पेरोल सिस्टम पर सीधे पड़ेगा। अब सभी सिस्टम को नए आयकर नियमों और फॉर्म्स के अनुरूप अपडेट करना जरूरी है। टीडीएस की गणना (TDS calculation) और रिपोर्टिंग फॉर्मेट में बदलाव आएंगे, और फॉर्म 24क्यू व फॉर्म 16 केवल नए प्रारूप में ही तैयार होंगे। ऑडिट प्रक्रिया में सख्ती बढ़ने के कारण पेरोल डेटा का ट्रेस रखना अब अनिवार्य हो गया है।
तीसरा बदलाव: पूर्ण और अंतिम निपटान अब सिर्फ 2 दिनों में-
नए वेतन संहिता (new wage code) के तहत, किसी कर्मचारी के इस्तीफे या सेवा समाप्ति पर बकाया वेतन का भुगतान अब केवल दो वर्किंग डेज में करना अनिवार्य है। यह नियम खासकर अंतिम वेतन पर लागू होता है, जबकि ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और रीइंबर्समेंट (Reimbursement) जैसी अन्य राशि भी जल्द से जल्द भुगतान करनी होगी। इससे पेरोल रिकंसिलिएशन को रियल टाइम में करना और एफएंडएफ प्रक्रियाओं को एचआरएमएस सिस्टम से पूरी तरह इंटीग्रेट करना जरूरी हो गया है।
चौथा बदलाव: डिजिटल रिकॉर्डिंग अब अनिवार्य-
अब नियोक्ताओं के लिए कर्मचारियों से जुड़े सभी रिकॉर्ड - जैसे वेतन, उपस्थिति, पीएफ/ईएसआई/एलडब्ल्यूएफ योगदान, पेस्लिप और स्टेट्यूटरी रजिस्टर - पूरी तरह डिजिटल रूप में रखना अनिवार्य हो गया है। नियामक अधिकारी इन रिकॉर्ड्स का रियल टाइम में निरीक्षण कर सकेंगे। नियमों का पालन न करने पर 3 लाख रुपये तक का जुर्माना और बार-बार उल्लंघन होने पर जेल की सजा का प्रावधान है।
पांचवां बदलाव: निश्चित अवधि के रोजगार में सामाजिक सुरक्षा अनिवार्य-
नए नियमों के अनुसार, अब निश्चित अवधि (फिक्स्ड टर्म) के कर्मचारी भी अपने कार्यकाल के अनुरूप सभी वैधानिक लाभों के हकदार होंगे। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ग्रेच्युटी के लिए अब केवल एक साल की सेवा पर्याप्त होगी, जबकि पहले इसके लिए पांच साल जरूरी था। प्रोजेक्ट-आधारित या सीजनल वर्कफोर्स (seasonal workforce) रखने वाली कंपनियों को अपनी देनदारियों का पुनर्मूल्यांकन करना होगा।
पेस्क्वेयर की टीम के मुताबिक, "अधिकतर नेता केवल सेवा की लागत पर ध्यान केंद्रित करते हैं, लेकिन असली दूरदर्शी वे होते हैं जो गलती की लागत को समझते हैं। 2026 में यह परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। अनुपालन में चूक का वित्तीय और प्रतिष्ठात्मक भार (Financial and reputational burden) इतना बड़ा हो गया है कि 'खुद से करना' अब सबसे महंगा विकल्प बन चुका है।"