Govt New Projects : सरकार की लोगों को सौगात, 54926 करोड़ की परियोजनाओं को मिली मंजूरी, MSP को लेकर भी फैसला
Govt New Projects : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को देश की आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचा मजबूती के लिए 54,926 करोड़ रुपये की चार प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी। बैठक में किसानों के लिए कपास सीजन 2023-24 के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर हुए खर्च की प्रतिपूर्ति पर भी फैसला लिया गया.... आइए नीचे खबर में जान लेते है पूरी डिटेल-
HR Breaking News, Digital Desk- (Govt New Projects) नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की अहम बैठक में देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बड़े फैसले लिए गए। सरकार ने उद्योग, कृषि, सड़क निर्माण और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों (renewable energy sectors) को लक्षित करते हुए कुल 54,926 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली चार प्रमुख योजनाओं को मंजूरी दी है।
यह कदम भारत के समग्र आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक के बाद अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों की विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ साझा की।
कैबिनेट के अहम फैसले ये रहे?
भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA)-
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में औद्योगिक विकास को बढ़ावा (promote industrial development) देने के लिए 'भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य)' को मंजूरी दे दी है। इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना के लिए 33,660 करोड़ रुपये का परिव्यय निर्धारित किया गया है। इसके तहत देशभर में 100 निवेश-तैयार प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क (Plug-and-Play Industrial Park) विकसित किए जाएंगे, ताकि उद्योगों के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सके।
केंद्र सरकार इस योजना के तहत प्रति एकड़ एक करोड़ रुपये तक का वित्तीय सहयोग प्रदान करेगी। योजना छह साल की अवधि के लिए लागू होगी, वित्त वर्ष 2026-27 से 2031-32 तक। औद्योगिक पार्क के लिए न्यूनतम 100 एकड़ क्षेत्र आवश्यक होगा, जबकि पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में यह सीमा 25 एकड़ रखी गई है। इस पहल से देश में विनिर्माण (manufacturing) और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।
कपास एमएसपी (2023-24)-
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कपास सीजन 2023-24 (Cotton Season 2023-24) के दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) संचालन पर हुए 1,718 करोड़ रुपये के खर्च की प्रतिपूर्ति को मंजूरी दे दी है। यह कदम किसानों को आर्थिक समर्थन देने के लिए उठाया गया, क्योंकि अक्टूबर 2023 से सितंबर 2024 तक कपास की कीमतें एमएसपी (cotton prices msp) से नीचे गिर गई थीं। सरकार ने इस दौरान भारतीय कपास निगम के माध्यम से किसानों से एमएसपी पर कपास की खरीद की।
इस एमएसपी के तहत खरीद से 7.25 लाख किसानों को सीधा लाभ मिला। कुल 33 लाख गांठें कपास खरीदी गईं, जिससे किसानों को कुल 11,712 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई। कपास सीजन 2023-24 में भारत के किसानों ने कुल 325 लाख गांठें कपास का उत्पादन किया था।
राजमार्ग और इंफ्रास्ट्रक्चर (NH-927)-
राष्ट्रीय सड़क नेटवर्क (national road network) को और सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के बाराबंकी से बहराइच खंड को 4-लेन बनाने के लिए 6,969 करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजना को मंजूरी दे दी है।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 101.515 किलोमीटर की इस परियोजना का उद्देश्य उत्तर प्रदेश भर के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निर्बाध (Seamless logistics centers) कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति ने 6,969.04 करोड़ रुपये की लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड (HM) के तहत बाराबंकी से बहराइच तक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्ग-927 के निर्माण को मंजूरी दे दी है।
इस परियोजना में सिविल कार्य की लागत लगभग 3,485.49 करोड़ रुपये होगी, जबकि भूमि अधिग्रहण (Land acquisition) के लिए अतिरिक्त 1,574.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना से प्रत्यक्ष रूप से 36.54 लाख और अप्रत्यक्ष रूप से 43.04 लाख व्यक्ति-दिवस के रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
लघु पनबिजली विकास योजना-
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को 2,585 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली लघु जलविद्युत विकास योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य 1,500 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विकास को बढ़ावा देना है। बैठक के बाद अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों को इसकी जानकारी दी।
मंत्री ने कहा कि पर्यावरण की दृष्टि से यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय है। इन परियोजनाओं को बिना बांध बनाए और लोगों को विस्थापित किए बिना, नदी के प्रवाह पर आधारित परियोजनाओं के रूप में विकसित किया जाएगा।
वैष्णव ने कहा कि देश में 7,133 स्थलों पर कुल 21,000 मेगावाट क्षमता वाली लघु जलविद्युत परियोजनाओं की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में, देश में 1,196 स्थलों पर 5,100 मेगावाट की लघु जलविद्युत परियोजनाएं कार्यरत हैं।
इन परियोजनाओं की क्षमता 1 मेगावाट से 25 मेगावाट तक होगी और ये 2030-31 तक पांच वर्षों में पूरी तरह लागू की जाएंगी। इस योजना से लघु जलविद्युत परियोजनाओं में लगभग 15,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है।