Health Insurance : देशवासियों के लिए बड़ी खुशखबरी, इस साल तक सभी लोगों का होगा स्वास्थ्य बीमा
HR Breaking News (Health Insurance) केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से लगातार जनकल्याण के लिए काम किए जा रहे हैं। किसानों के लिए प्रधानमंत्री सम्मान निधि की बात हो या फिर गरीबों के लिए राशन या फिर आयुष्मान भारत की बात हो। सरकार की प्राथमिकता में लोगों का स्वास्थ्य भी है। इसी को देखते हुए सरकार अगले सालों में बड़ा कदम उठाएगी-
वित्त मंत्री ने दी जानकारी
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से राज्यसभा में जानकारी दी गई है कि स्वास्थ्य बीमा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि उनको उम्मीद है कि 2033 तक भारत में सभी लोगों स्वास्थ्य बीमा के दायरे में आएंगे। वित्त मंत्री ने उच्च सदन में सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि 2024-25 के दौरान भी बीमा क्षेत्र का विस्तार किया गया है। देश के 58 करोड़ लोगों को बीमा में कवर किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य बीमा सरकार की प्राथमिकता है और उम्मीद है कि 2023 तक सभी बीमा कवर का लाभ उठाएंगे।
क्या है पूरी डिटेल्स
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि दिसंबर 2025 में सरकार की ओर से बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए एक विधेयक पेश किया गया। इसका उद्देश्य बाजार को मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि बीमा नियामक आईआरडीएआई ने ग्रामीण क्षेत्रों में पैठ बढ़ाने के लिए 2024 में नियम अधिसूचित किए हैं। वित्त मंत्री की तरफ से कहा गया कि सामान्य तौर पर बीमा की बात करें तो एक चुनौती है। उन्होंने कहा कि बीमा कवरेज अब भी कम है लेकिन सरकार का लक्ष्य सुधारों की ओर है। इसके फायदे उपाय के माध्यम से इस अंतर को कम करने का प्रयास कर रही है।
स्वास्थ्य बीमा बाजार का किया जिक्र
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से स्वास्थ्य बीमा बाजार का जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि आज इस क्षेत्र में काफी विकास हुआ है। 2024-25 में एक करोड़ 17 लाख 505 करोड़ रुपए तक यह पहुंच गया है। इससे 58 करोड़ लोगों को बीमा कवरेज प्राप्त है। इसमें सार्वजनिक नीति और स्वतंत्र बीमा कंपनियों का योगदान है।
बीमा कंपनियों पर नकेल कसने की कही बात
मंत्री की तरफ से कहा गया कि बीमा कंपनियों की ओर से किसी प्रकार का दुर्व्यवहार किया जाता है तो नियम अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि पिछले 3 साल में कई मामले आए हैं, जहां कानून का उल्लंघन करने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की गई है। कई निजी बीमा कंपनी 1 से 2 करोड़ रुपए का जुर्माना झेल चुकी हैं।