Income tax rules 2026 : आयकर 2026 के नियमों ने बदली करदाताओं की लाइफ, जानें क्या-क्या हुआ बदलाव

Income tax rules 2026 : आयकर विभाग और सरकार की ओर से करदाताओं के लिए टैक्स भरने की जटिल प्रोसेस को खत्म करने और इसे पूरी तरह डिजिटल और सहज बनाने के लिए बड़े बदलाव किए गए हैं। अब करदाताओं की लाइम आयकर 2026 के नियमों  (Income Tax Rules 2026) ने बदल डाली है। खबर में जानिए कि नियमों के बदलाव से टैक्सपेयर्स की लाइफ कैसे बदली है।
 

HR Breaking News (Income tax rules) जहां एक ओर आयकर रिटर्न (income tax return) को फाइल करने का प्रोसेस काफी लंबा और उलझा हुआ था। वहीं, बीते वर्षो में सरकार ने डिजिटल सुधारों को लाकर आयकर रिटर्न फाइल करने के प्रोसेस को पारदर्शी बना दिया है। अब रिटर्न फाइल करना लंबा नहीं, बल्कि रिटर्न फाइल करना कुछ ही घंटो  का प्रोसेस रह गया है। खबर में जानिए कि टैक्सपेयर्स के लिए क्या-क्या बदलाव किए गए हैं। 

 

ITR फॉर्म में पहले ही मिल जाती है फिल्ड डिटेल्स


सबसे पहले तो आप यह जान लें कि इनकम टैक्स  रूल्स (Income Tax Rules 2026 ) के तहत ई-फाइलिंग सिस्टम को मजबूत बना दिया है। वैसे तो अब अधिकतर टैक्सपेयर्स के लिए ITR फॉर्म में पहले से फिल हुई डिटेल्स (Pre-filled Data) मिलती है।
सैलरी की जानकारी को साझा करें तो Form 16 के बेस पर बैंक ब्याज, TDS और TCS डिटेल, म्यूचुअल फंड/शेयर ट्रांजैक्शन आदि यह सभी डेटा AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS से ऑटो-इंटीग्रेट होता है। बता दें कि इससे मैन्युअल एंट्री तो कम होती है और गलतियों के चांस कम होते हैं।

 

टैक्स सिस्टम के जरूरी हिस्से है AIS व TIS


सबसे पहले तो आपको यह पता होना बेहद जरूरी है कि AIS (Annual Information Statement) और TIS (Taxpayer Information Summary) अब टैक्स सिस्टम के महत्तवपूर्ण हिस्से हैं। इनकम टैक्स रूल्स (Income Tax Rules 2026 ) के तहत रिपोर्टिंग संस्थानों को अधिक सटीक और टाइम पर डेटा रिपोर्ट करना जरूरी किया है।

AIS में दिखती है कौन सी जानकारी 


बता दें कि AIS में आपको बैंक जमा, ब्याज आय, हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन, शेयर/म्यूचुअल फंड बिक्री सब पहले ही फिल मिलती है, जिससे रिटर्न फाइल (ITR file) करते समय इनकम छूटने या गलत रिपोर्टिंग के कम चांस हो जाते हैं।


फेसलेस असेसमेंट सिस्टम के फायदे


इनकम टैक्स रूल्स 2026 के तहत फेसलेस असेसमेंट सिस्टम (Faceless Assessment System) को पहले से अधिक संस्थागत रूप दे दिया है। अब इसके तहत जांच ऑनलाइन होती है और केस रैंडम तरीके से अलॉट होते किए जाते हैं। अब फिजिकल इंटरैक्शन लगभग खत्म ही हो गया है। इस प्रक्रिया से ज्यादा निष्पक्षता और पारदर्शीता आई है। इसके चलते टैक्सपेयर्स को स्थानीय स्तर पर अधिकारियों से मिलने की आवश्यकता नहीं होती है।


रिफंड प्रोसेसिंग में आई तेजी


CBDT के अनुसार डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन के चलते रिफंड प्रोसेसिंग में तेजी (Speed ​​up refund processing)  आई है। जब-ITR सही भरा हो और ई-वेरिफिकेशन पूरा हो गया हो। इसके साथ ही AIS डेटा से मैच हो तो ऐसे में कई मामलों में रिफंड  की 24–48 घंटे में प्रोसेसिंग हो जाती है। वैसे तो सभी मामलों में 24 घंटे की गारंटी नहीं होती है और जांच या मिसमैच की कंडिशन में वक्त लग सकता है। 

फॉर्म पोस्ट से भेजने की नहीं है जरूरत


अब टैक्सपेयर्स को  ITR फाइल (Taxpayers have to file ITR) करने के बाद फॉर्म पोस्ट से भेजने की आवश्यकता नहीं है। अब आप आसानी से सिर्फ आधार OTP और नेट बैंकिंग, डिजिटल सिग्नेचर व EVC माध्यम  से घर बैठे ई-वेरिफिकेशन कर सकते हैं। ऐसे में इनकम टैक्स रूल्स में डिजिटल वेरिफिकेशन को जरिया बनाया गया है।

TDS से जुड़े नियमों को क्लियर 


नए रुल्स के तहत अब Form 16 को और डिटेल्ड रूप से बनाया गया है, जिसमे सैलरी ब्रेकअप,अलाउंस,परक्विजिट्स,ESOP,टैक्सेबल बेनिफिट शामिल है। ये सब साफ तरीके से दिखते हैं, जिससे रिटर्न भरना ईजी हो जाता है। इसके साथ ही, LTC, एसेट वैल्यूएशन, एडवांस टैक्स और TDS से जुड़े नियमों (TDS rules) को क्लियर किया गया है, ताकि विवाद और नोटिस की परेशानी न हो।
अगर आपका डेटा सही है और AIS मैच कर रहा है। इसके साथ ही KYC और बैंक डिटेल अपडेट हैं तो ऐसे में ITR भरना पहले से ज्यादा सरल (ITR Filling Rules) हो गया है, लेकिन गलत जानकारी,आय छिपाना,AIS मिसमैच करता है तो डिजिटल सिस्टम में तुरंत पकड़े जा सकते हैं।