हरियाणा के दो जिलों में प्राइवेट कंपनी भी करेगी बिजली सप्लाई, लाइसेंस को मंजूरी
HR Breaking News (Haryana News) हरियाणा प्रदेश की बिजली व्यवस्था में अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है और बिजली व्यवस्था में होने वाले इस बदलाव का असर प्रदेश के दो जिलों के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ने संभावना है। जानकारी सामने आई है कि अब हरियाणा के गुरुग्राम और नूंह जिले में बिजली सप्लाई की जिम्मेदारी सरकारी कंपनियों की जगह प्राइवेट कंपनियां लेने वाली है। अब प्राइवेट कंपनी इलेवन पावर (Private company Eleven Power) दोबारा इन दो जिलों में बिजली की आपूर्ति की जाएगी बिजली मंत्री अनिल विज (Electricity Minister Anil Vij) और कर्मचारी यूनियनो के विरोध (Protests by employee unions) को देखते हुए हरियाणा राज्य विद्युत विनियामक आयोग द्वारा प्राइवेट कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए बिजली वितरण के लाइसेंस को भी मंजूरी प्रदान की गई है। आइए जान लेते है हरियाणा में बिजली सप्लाई (Electricity supply in Haryana) को लेकर जारी हुए इस नए अपडेट के बारे में विस्तार से।
बिजली वितरण कंपनी चुनने का मिलेगा ऑप्शन
हरियाणा के दक्षिणी हिस्से में बिजली वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विद्युत अधिनियम 2003 के तहत जारी इस फैसले के बाद गुरुग्राम और नूंह के उपभोक्ताओं के लिए बिजली वितरण के इलाके में नई संभावनाएं खुलेंगी। अब उपभोक्ताओ को मोबाइल नेटवर्क की तर्ज पर अपनी पसंद की बिजली वितरण कपनी चुनने का ऑप्शन मिल सकेगा, जिससे सरकारी बिजली निगम (Government Electricity Corporation) के एकाधिकार को चुनौती मिलेगी। इस परियोजना के तहत प्राइवेट कंपनी इलेवन पावर (Private company Eleven Power) की तरफसे गुरुग्राम और नूंह में करीब 4,717 करोड़ रुपये का निवेश कर आधुनिक बिजली वितरण नेटवर्क विकसित करने की योजना है। कंपनी इस नेटवर्क को अत्याधुनिक तकनीक से लैस करेगी, जिसमे स्मार्ट मीटरिग सौर ऊर्जा पवन ऊर्जा और एडवांस्ड ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर जेसी सुविधाएं शामिल होगी।
इस नई व्यवस्था से औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं (Industrial and commercial consumers) को अधिक भरोसेमंद बिजली आपूर्ति (Power supply) मिलने की संभावना है। सही नेटवर्क और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बिजली कटौती और ट्रिपिग की समस्या कम हो सकती है। साथ ही डीजल जनरेटर पर डिपेंडेंसी घटने से प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिल सकती है। अगर यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो दक्षिण हरियाणा में बिजली वितरण (Electricity distribution in South Haryana) के क्षेत्र में मुकाबला बढ़ेगा। इससे उपभोक्ताओं को सही सेवाए, अधिक ऑप्शन और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता मेंसुधर मिलने की उम्मीद है।
किसी भी उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन देने से मना नहीं कर सकती कंपनी
बिजली नियामक आयोग (Electricity Regulatory Commission) द्वारा स्पष्ट कर दिया गया किया है कि लाइसेंस प्राप्त प्राइवेट बिजली कंपनियों (private power companies) को यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन के नियमों (Universal Service Obligation rules) का पालन करना होगा। इसके तहत कंपनी किसी भी उपभोक्ता को बिजली कनेक्शन देने से मना नहीं कर सकती कंपनी अगले पांच सालों में गुरुग्राम तथानूंह जिले के शहरी ग्रामीण और कृषि क्षेत्रो मे अपना बिजली नेटवर्क बढ़एगी।
संयुक्त मोर्चा ने बुलाई बैठक
हरियाणा पावर इंजीनियर्स (Haryana Power Engineers) और पावर कर्मचारियों क संयुक्त मोर्चे ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए करनाल में आपात बैठक बुलाई। मोर्चे के नेताओं न आरोप लगाया कि राज्य सरकार (haryana government) और बिजली नियमक आयोग (Electricity Regulatory Commission) मिलकर बिजली निगमो को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। नेताओं का कहना है कि औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को प्रइवेट कंपनियों के हवाले करना सरकारी बिजली निगमो को कमजोर करन जैसा है। बिजली वितरण का काम 25 सालों के लिए निजी कंपनियों को सौंपने का आदेश फिलहाल नहीं दिया गया है।
प्राइवेट बिजली कंपनी को लाइसेंस देने का विरोध (License to private power company)
बिजली मंत्री अनिल विज (Electricity Minister Anil Vij) ने प्राइवेट बिजली कपनियों को लाइसेंस देने के फैसले का विरोध किया है। उनका कहन है कि सरकार प्राइवेट कंपनियों को समानतर बिजली वितरण लाइसेंस (Electricity Distribution License) देने के पक्ष में नहीं है। मंत्री अनिल विज ने इस फैसले को APTEAL में चुनौती देने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर Supreme Court में भी मामला उठाया जा सकता है। आयोग के आदेश के अनुसार इलेक्ट्रिक पावर गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का नेटवर्क बनाएगी। कंपनी ने 2026-27 से 2030-31 तक 5साल में 4716.73 करोड रुपये निवेश करने की योजना बनाई है।
पिछले दरवाजे से बिजली का प्राइवेटाइजेशन
प्रो. संपत सिंह न बिजली वितरण के निजीकरण का विरोध (Opposition to the privatization of electricity distribution) किया है। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम और नूंह में इलेक्ट्रॉन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस (Electricity distribution license) देना कोई सामान्य फैसला नहीं है बल्कि यह निजीकरण की एक सोची-समझी योजना है।
उनके अनुसार, इस फैसले से निजी कंपनियों को फायदा होगा जबकि सरकारी बिजली कंपनी पर बोझ (Burden on state-owned power company) बढ़ेगा। ग्रामीण इलाकों, किसानों, गरीब परिवरो और रियायती दरों पर बिजली लेने वाले उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है। इससे कमजोर वर्गों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी प्रभावित हो सकती है।