Rules Change : 1 अप्रैल से होंगे 7 बड़े बदलाव, PF से लेकर Loan तक पर होगा असर
HR Breaking News (Rules Change) देश भर में अब नए फाइनेंशियल ईयर से कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं, जिसका असर PF से लेकर Loan तक सब पर देखने को मिलने वाला है। सरकार का इन बदलावों (Rules Change) के पीछे का मकसद टैक्स सिस्टम को व्यवस्थित बना है। ये भी बदलाव 1 अप्रैल से लागू हो जाएंगे। ऐसे में आइए खबर में जानते हैं कि 1 अप्रैल से किन नियमों में बदलाव होने वाला है।
कब लागू होंगे नए इनकम-टैक्स नियम
दरअसल, आपको बता दें कि नए इनकम-टैक्स नियम (new income-tax rules) 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले हैं। ड्राफ्ट इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 का मकसद टैक्स सिस्टम को सरल बनाना है। बता दें कि इसमें टैक्सेबल सैलरी, पर्क्स और एम्प्लॉयर बेनिफिट्स को कैलकुलेट करने के नियम क्लियर किए गए हैं, जिससे टैक्सपेयर्स और अधिकारियों दोनों को सुविधा मिल सकेगी।
इन नए नियमों (income-tax New rules ) में कंपनी की ओर से दिए गए घर, गिफ्ट, लोन और रिटायरमेंट कंट्रीब्यूशन पर टैक्स के नए प्रोविजन शामिल किए गए हैं। हालांकि कई रूल्स पुराने सिस्टम को सुव्यव्स्थित करते हैं, लेकिन कुछ संशोधन का असर मिडिल क्लास और सैलरीड कर्मचारियों की टैक्स प्लानिंग पर पड़ता हैं।
असेसमेंट ईयर के लिए लागू होंगे नए नियम
बता दें कि ये नए आयकर नियम (new income tax rules) 1 अप्रैल, 2026 से लागू होंगे यानी फाइनेंशियल ईयर 2026-27 और असेसमेंट ईयर 2027-28 के लिए भी नए आयकर नियम लागू होंगे। बता दें कि ये नियम इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 को सपोर्ट करते हैं और टैक्सेशन के लिए यूज होने वाले प्रोसेस, वैल्यूएशन के तरीकों और गणना को समझाते हैं।
एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन से जुड़ा नियम
इन नियमों में एक जरूरी नियम एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन से जुड़ा हुआ है। ये नियम 1 वर्ष में 7.5 लाख रुपये से अधिक के एम्प्लॉयर कंट्रीब्यूशन पर टैक्सेबल परक्विजिट की गणना करने का फॉर्मूला देते हैं। वैसे तो इन कंट्रीब्यूशन में प्रोविडेंट फंड (provident fund), नेशनल पेंशन सिस्टम (National Pension System), सुपरएनुएशन फंड आदि शामि होते हैं और टैक्सेबल अमाउंट में 7.5 लाख रुपये से अधिक के कंट्रीब्यूशन से आय आती है, वो शामिल होगी।
कैसे होगी घरों की फिक्स्ड टैक्सेबल वैल्यूएशन
ड्राफ्ट रूल्स से क्लियर होता है कि एम्प्लॉयर ने जो रहने की जगह दी है, उस पर परक्विजिट के तौर पर कैसे टैक्स लगेगा। बता दें कि प्राइवेट सेक्टर के कर्मियों के लिए और टैक्सेबल वैल्यू (taxable value) शहर की आबादी पर डिपेंड करेगी। जैसे की जिनकी सैलरी 40 लाख से अधिक है, उन आबादी वाले शहरों में वेतन का 10 प्रतिशत और 15 लाख से 40 लाख के बीच आबादी वाले शहरों में वेतन का 7.5 प्रतिशत और अन्य स्थानों पर सैलरी का 5 प्रतिशत। बता दें कि इस वैल्यू में से कर्मचारी द्वारा जो किराया दिया गया है, वो कम हो जाएगा। ड्राफ्ट शहर की आबादी के बेस पर अलग-अलग सैलरी परसेंटेज को दर्शाता है।
तय लिमिट के अंदर टैक्स-फ्री रहेगा खाना
नौकरी के दौरान एम्प्लॉयर ने जो खाना दिया है, उस दौरान ये खना तय लिमिट के अंदर टैक्स-फ्री रहेगा। ड्राफ्ट नियमों के अनुसार अगर हर मील पर 200 रुपये से अधिक की कीमत नहीं है तो फ्री खाने या ड्रिंक्स पर किसी टैक्स का भुगतान (payment of tax) नहीं करना होगा। इसमें ऑफिस कैंटीन का खाना, मील वाउचर, कॉर्पोरेट मील प्रोग्राम आदि चीजें शामिल हैं। बता दें कि जब काम के घंटों के दौरान खाना देते हैं और कीमत लिमिट के अंदर रहती है, तब यह छूट दी जाती है।
कैसे होगी टैक्सेबल वैल्यू की कैलकुलेशन
बता दें कि अगर एम्प्लॉयर इंटरेस्ट-फ्री लोन (Interest-free loan) देते हैं, तो बेनिफिट पर टैक्स लगाया जा सकता है। नियमो के अनुसार टैक्सेबल वैल्यू की कैलकुलेशन एसबीआई द्वारा ऐसे ही लोन के लिए लिए जाने वाले इंटरेस्ट रेट के बेस पर होगी। हालांकि, इसमे कुछ एक्सेप्शन भी हैं। जैसे कि अगर कुल लोन अमाउंट 2 लाख रुपये तक है तो उस पर किसी टैक्स का भुगतान नहीं करना होगा और खास मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए लोन परछूट का फायदा मिल सकता है। टैक्सेबल वैल्यू की गणना (Calculation of taxable value) SBI द्वारा ऐसे लोन के लिए लिए जाने वाले इंटरेस्ट रेट का यूज करके की जाएगी।
नियम टैक्सेबल बेनिफिट की गणना
बताते चलें कि ड्राफ्ट नियम टैक्सेबल बेनिफिट (Draft Rules Taxable Benefit) की गणना के लिए स्टैंडर्ड वैल्यू बताते हैं, जब कर्मचारी कंपनी की कारों का कुछ पार्टन पर्सनल कामों के लिए यूज करते हैं।
जैसे कि ऑफिशियल और पर्सनल कामों के लिए यूज होने वाली कारों के लिए केलकुलेशन इस प्रकार होगा।
जैसे कि 1.6 लीटर इंजन कैपेसिटी की कारों (Engine capacity cars) के लिए 5000 रुपये प्रति महीना औश्र1.6 लीटर इंजन कैपेसिटी से अधिक की कारों के लिए 7000 रुपये प्रति महीना और अगर साथ में ड्राइवर दिया जाता है तो 3000 रुपये प्रति महीना एक्स्ट्रा। इन फिक्स्ड वैल्यू का यूज सैलरी इनकम के अंतर्गत परक्विजिट की गणना के लिए होगा।
जानिए क्या है ड्राफ्ट नियम
नियमो के अनुसार, एम्प्लॉयर द्वारा जो गिफ्ट, वाउचर या टोकन दिए गए हैं, वो पूरी तरह से टैक्स-फ्री (tax-free) होंगे। अगर उनकी कीमत फाइनेंशियल ईयर में 15000 रुपये से कम रहती है और अगर कीमत 15000 रुपये से अधिक है तो ये पूरी तरह टैक्सेबल होंगे। ड्राफ्ट नियमों (draft rules) के अनुसार ऐसे गिफ्ट की कीमत जीरो रहेगी और टैक्स ईयर के दौरान 15000 रुपये से कम है। बता दें कि यह नियम त्योहारों के मौसम में लागू किया जाता है, जब कंपनियां गिफ्ट या वाउचर बांटती हैं।