Supreme Court : यह बात नहीं मानी तो फेसबुक, इंस्टा, वाट्सएप भारत में हो जाएंगे बंद

Supreme Court News : सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक सख्त कदम उठाया गया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह स्टेटमेंट फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम व मेटा के अन्य प्लेटफॉर्म यूजर्स के लिए जरूरी हो सकती है। हालांकि मेटा के लिए यह स्टेटमेंट बेहद निराशाजनक है। ऐसे में मेटा के प्लेटफॉर्म यूजर्स को इसके बारे में जरूर जानना चाहिए।
 

HR Breaking News (Supreme court on Meta) देश की प्राइवेसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से सख्त कदम उठाया गया है। प्राइवेसी से संबंधित मामले में मेटा को सुप्रीम कोर्ट की ओर से सख्त हिदायत दी गई है। प्राइवेसी मामले में मेटा को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि देश की प्राइवेसी के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बिल्कुल भी मंजूर नहीं होगा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने मेटा को स्पष्ट कहा है कि या तो नियमों का पालन करो या फिर भारत देश छोड़ दो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम डाटा का एक भी हिस्सा शेयर नहीं होने देंगे। वहीं, इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने यह भी कहा है कि वह किसी अंतरराष्ट्रीय कंपनी के लिए नहीं है, बल्कि वह आम लोगों के लिए है। 

 

सुप्रीम कोर्ट की ओर से व्हाट्सएप व मेटा की डाटा शेयर करने की नितियों पर बेहद चिंता व्यक्त की गई है। सुप्रीम कोर्ट भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के आदेश के खिलाफ दायर अपीलों के खिलाफ सुनवाई कर रहा था। यह अपील उस आदेश के खिलाफ थी, जिसमें व्हाट्सएप की 2021 की “या तो स्वीकार करो या छोड़ दो” गोपनीयता नीति के लिए मेटा पर जुर्माना लगाया गया था। इस मामले में मेटा पर सीसीआई की ओर से 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।


भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने आज इस मामले में सुनवाई की है। पीठ ने व्हाट्सएप व मेटा की ओर से दायर अपीलों के अलावा एनसीएलएटी के एक निष्कर्ष को चुनौती देने वाली सीसीआई की एक अलग अपील की सुनवाई की है।  इस सुनवाई  के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हम किसी भी तरह की जानकारी शेयर करने की परमिशन नहीं देंगे।

देश में राइट टू प्राइवेसी के साथ किसी भी तरह से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे संवैधानिकता का मजाक भी बताया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है जब यूजर्स को “मानो या न मानो” के आधार पर पॉलीसी को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, तो  ऐसे में उनकी सहमति को वैध कैसे माना जा सकता है।


मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान राइट टू प्राइवेसी को लेकर भी काफी जोर दिया है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि राइट टू प्राइवेसी के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता है। सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सख्ती से स्पष्ट किया है कि वह देश के किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होने देगी।

साथ ही यह भी कहा है कि यह देश की निजता पर हमला करने का एक घटिया तरीका है। यहां राइट टू प्राइवेसी की बेहद रक्षा की जाती है। ऐसे में पीठ ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि हम आपको इसका उल्लंघन करने की इजाजत नहीं देंगे।