UP News : 15 जिलों की किस्मत बदलेगा यूपी का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे, यह होगा पूरा रूट

UP News : उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे 15 जिलों की किस्मत बदलने जा रहा है। बता दें कि यह मेगा प्रोजेक्ट राज्य में परिवहन व्यवस्था को मजबूत करेगा और यात्रा के समय को कम करेगा। निर्माण शुरू होने के बाद व्यापार, रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी बड़ा फायदा मिलेगा... इससे जुड़ी पूरी डिटेल जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-

 

HR Breaking News, Digital Desk- (Shamli Gorakhpur Expressway) उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित शामली-गोरखपुर ग्रीनफील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। करीब 750 किलोमीटर लंबे इस मेगा प्रोजेक्ट की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है। इसके साथ ही प्रशासन ने शामली जिले में प्रस्तावित रूट पर जमीन की खरीद-फरोख्त पर अस्थायी रोक लगा दी है।

भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के लिए विशेष अधिकारी तैनात-

शामली के जिलाधिकारी अरविंद कुमार चौहान ने जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एडीएम (वित्त एवं राजस्व) सत्येंद्र कुमार सिंह को स्पेशल लैंड एक्विजिशन (Special Land Acquisition) ऑफिसर नियुक्त किया है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे अधिग्रहण से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी और प्रक्रिया समय पर पूरी हो सकेगी।

राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत नोटिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू-

प्रशासन जल्द ही राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम (National Highway Act) की धारा 3-A के तहत अधिसूचना जारी करेगा। इसके बाद प्रभावित गांवों की गाटा-खसरा सूची (Gata-Khasra List) सार्वजनिक की जाएगी, ताकि जमीन मालिक अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकें। तय प्रक्रिया के तहत आपत्तियों की सुनवाई कर उनका निपटारा किया जाएगा।

इन गांवों से होकर गुजरेगा 6 लेन एक्सप्रेसवे-

यह छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (greenfiled expressway) शामली जिले के थानाभवन ब्लॉक से होकर गुजरेगा। इसके दायरे में खास तौर पर गोगवान जलालपुर और भैंसानी इस्लामपुर गांव शामिल हैं, जहां फिलहाल जमीन के लेन-देन पर रोक लगा दी गई है। इसके अलावा इस प्रोजेक्ट का असर मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जिलों (Muzaffarnagar and Saharanpur districts) के कुछ अन्य गांवों पर भी पड़ने की संभावना है।

धारा 3-D लागू होते ही जमीन केंद्र सरकार के नाम होगी-

धारा 3-D लागू होते ही अधिग्रहित भूमि केंद्र सरकार के स्वामित्व में निहित हो जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

मुआवजा प्रक्रिया में लग सकते हैं 8-10 महीने-

प्रशासन के मुताबिक मुआवजा प्रक्रिया (compensation process) के तहत पहले ड्रोन सर्वे कराया जाएगा, इसके बाद अंतिम DPR तैयार होगी और आपत्तियों की सुनवाई की जाएगी। धारा 3-G के तहत निपटान के बाद किसानों और जमीन मालिकों को मुआवजा दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया में करीब 8 से 10 महीने का समय लग सकता है।

पश्चिम से पूर्व तक यूपी को जोड़ेगा यह एक्सप्रेसवे-

यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी यूपी के शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और अमरोहा को मध्य यूपी के बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर और लखनऊ (lucknow) से जोड़ेगा, जबकि पूर्वी यूपी में यह बहराइच, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर और गोरखपुर तक कनेक्टिविटी देगा। इसके अलावा यह गंगा एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, लखनऊ-गोरखपुर एक्सप्रेसवे (Lucknow-Gorakhpur Expressway) और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा, जिससे राज्यभर में यात्रा और परिवहन और आसान हो जाएगा।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया बूस्ट-

करीब 35,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट ग्रामीण क्षेत्रों, औद्योगिक इलाकों (industrial areas) और गंगा पट्टी के शहरों के विकास को नई रफ्तार देगा। इसके निर्माण और निगरानी की जिम्मेदारी NHAI की रुड़की यूनिट को सौंपी गई है।