ये कर्मचारी अपनी संतान को सौंप सकते है अपनी नौकरी, जानिए पूरी खबर
 

job-for-job-scheme हर इंसान की एक इच्छा होती है कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे सरकारी या कोई प्राइवेट जॉब मिले। वहीं नौकरी पाने के बाद इंसान अपनी संतान को लेकर परेशान रहने लगता है ऐसे में अब कर्मचारियों की समस्या कम हो गई है अब कर्मचारी अपनी  नौकरी अपनी संतान को बिना किसी से पूछे सौंप सकते है। जी हां आपने ठीक सुना ऐसा ही काम एक कंपनी द्वारा किया गया है। आइए नीचे खबर में जानते है पूरा मामला
 
 

HR Breaking News, नई दिल्ली, Tata Steel introduced Early Separation Scheme​: टाटा स्टील ने एक निश्चित अवधि तक कंपनी में सेवा दे चुके कर्मियों के लिए अर्ली सेपरेशन और जॉब फॉर जॉब स्कीम की घोषणा की है. इन दोनों स्कीम के लिए कंपनी के कर्मचारी आगामी 1 जून से 30 जून तक आवेदन कर सकते हैं. जॉब फॉर जॉब स्कीम (Job for Job Scheme) के तहत कर्मचारी अपने पुत्र, पुत्री, दामाद या किसी अन्य को आश्रित नामित कर अपनी नौकरी हस्तांतरित कर सकेंगे. 

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'सुनहरे भविष्य की योजना': टाटा
टाटा स्टील ने अपनी इन दोनों स्कीम को मिलाकर कंपनी ने इसका नाम, 'सुनहरे भविष्य की योजना' दिया है. इसके लिए टाटा स्टील की वाइस प्रेसिडेंट (HRM) अत्रैयी सान्याल के आदेश से सर्कुलर जारी कर दिया गया है. जॉब फॉर जॉब स्कीम के तहत कर्मचारी अपने पुत्र, पुत्री, दामाद या किसी अन्य को आश्रित नामित कर अपनी नौकरी हस्तांतरित कर सकेंगे.

 

इस स्कीम में वैसे कर्मचारी आयेंगे, जिनकी सेवानिवृत्ति की उम्र कम से कम साढ़े पांच साल बाकी है.आश्रितों को इसके लिए एक परीक्षा पास करनी होगी. परीक्षा में तीन बार शामिल होने का मौका दिया जायेगा. इसके बाद प्रशिक्षु के तौर पर उनकी सेवा शुरू होगी. इस दौरान उन्हें स्पाइडेंड दिया जायेगा. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उनकी सेवा स्थायी की जायेगी. परीक्षा में असफल आश्रित को नौकरी से वंचित होना पड़ सकता है. नौकरी ट्रांसफर करने वाले कर्मचारी को प्रतिमाह 13 हजार रुपये दिये जायेंगे.

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कौन होगा पात्र?
ईएसएस यानी (Early Separation Scheme) के लिए वैसे कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं, जिनकी आयु या तो 40 साल से ज्यादा है या जो कंपनी में दस साल काम कर चुके हैं. इस योजना के तहत कर्मचारी को रिटायरमेंट तक मौजूदा बेसिक सैलरी और डीए का लाभ मिलेगा.

बेसिक और डीए में रिटायरमेंट तक हर साल एक हजार रूपए की बढ़ोतरी होती जाएगी. स्कीम लेने वाले कर्मचारी को आवास की सुविधा नहीं मिलेगी. अगर कर्मचारी कंपनी के आवास में रहना चाहते हैं तो उन्हें रेंट देना होगा और वे 58 उम्र तक रह सकते हैं. इन स्कीमों के लिए कर्मियों के चयन का अधिकार प्रबंधन के पास होगा.