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सीमेंट सरिया के दामों में ऐतिहासिक गिरावट, ईंटें हुई मंहगी
 

Historical fall in the prices of cement sariya, bricks become expensive सीमेंट सरियों के दामों में हुई ऐतिहासिक गिरावट के बाद जहां मकान बनाने में जुटे लोगों ने राहत की सांस ली वहीं दूसरी ओर बारिश (barish) की वजह से ईट भट्‌ठों (briquette kilns) पर पथाई के बाइ रखी कच्ची ईंटे (raw bricks) खराब होने की वजह से दाम आसमान छूने लगे है। आइए नीचे खबर में जानते है लेटेस्ट अपडेट
 
 

HR Breaking News, नई दिल्ली,  सीमेंट (cement) और सरिया (sariya) के दाम गिर गए हैं। इससे भवन निर्माण करवाने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है। मगर अब ईंटों के रेट ने सिरदर्दी बढ़ा दी है। जयेष्‍ठ का महीना तो भीषण गर्मी के नाम होता है, मगर इस बार जेठ में अच्छी खासी बारिश (rain) हो गई।

 

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यह एक तरह से बेमौसम की बारिश (unseasonal rain) रही। इससे कई जगह नुकसान पहुंचा है। खासकर निर्माण कार्याें पर असर पड़ा है। बारिश की वजह से ईंट भट्ठों पर पथाई के बाद रखी गई कच्ची ईंटें खराब हो गई तो भट्ठा मालिकों ने तैयार ईंटों के ही दाम बढ़ा दिए हैं। इससे घर और दूसरे भवनों का निर्माण कर रहे लोगों का बजट बढ़ गया है। प्रति एक हजार ईंटाें पर 500 रुपये बढ़ गए हैं।


दरअसल, पुराने समय से ही एक धारणा है कि जेठ के महीने में जब बरसात होती है तो उसका फायदा कम नुकसान ज्यादा होता है। इससे मानसून का आगमन प्रभावित होता है। ऐसे में बारिश में देरी का विपरीत असर पड़ता है। दूसरा, जब जेठ के महीने में खेतों की जमीन तपती है तो उसका भी फायदा मिलता है। गेहूं-सरसों और रबी सीजन की दूसरी फसलों की कटाई के बाद किसानों द्वारा खेतों की अच्छी तरह जुताई कर दी जाती है।

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उसके बाद ज्यों-ज्यों तेज धूप की तपिश धरती काे छूती है ताे जमीन के अंदर उत्पादक क्षमता बढ़ती है। भूमि के छिद्र खुलते है और इसके बाद जब बारिश आती है तो उन्हीं छिद्रों के जरिये पानी जमीन मेें गहराई तक चला जाता है। यानी जमीन में पानी को सोखने की क्षमता बढ़ती है, लेकिन ठीक इसके विपरीत जब जेठ में बारिश हो जाती है

 

तो फिर जमीन को यह फायदा नहीं मिल पाता। इस बार ऐसा ही हुआ है। अकेले बहादुरगढ़ में ही 32 एमएम बारिश हुई है। इससे अब भले ही खाली रकबे में चारे वाली और दूसरी फसलों की बिजाई हो जाए, लेकिन इस बारिश से खरबूजा, तरबूज और दूसरी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।