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हरियाणा के निर्यातकों का 480 करोड़ का बासमती चावल बंदरगाहों पर अटका 

Haryana News :चावल का निर्यात करने वाले कारोबारियों के लिए इस बार कइ्र समस्याएं बनी हुई हे। मध्य-पूर्व में युद्ध और समुद्री मार्गों में आ रहे संकट से भारत का चावल कारोबार प्रभावित हुआ है। इसमें हरियाणा का बंदरगाहों पर 60 हजार मीट्रिक टन बासमती चावल अटका है। चलिए जानते हैं इसके पिछे क्या कारण है आदि पूरी जानकारी विस्तार से।
 

HR Breaking News (Haryana News) : मध्य-पूर्व में जारी युद्ध का असर अब भारत के चावल उद्योग कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। समुद्री रास्तों में पैदा हुई दिक्कत और माल  ढुलाई खर्च कई गुना बढ़ने से कांडला (Kandla bandargah) और मुंद्रा बंदरगाहों (Mundra bandargah) पर करीब 2 लाख मैट्रिक टन बासमती चावल अटक गया है। इसमें करीब 60,000 मीट्रिक चावल हरियाणा के निर्यातकों का बताया गया है। हरियाणा के (latest news haryana) निर्यातकों का कहना है कि इसकी अनुमानित कीमत करीब 480 करोड रुपए की है। बड़ी रकम का माल बंदरगाहों पर फंसने से राइस मिलर्स, आढ़तियों और निर्यातकों की पूंजी पर गहरा असर पड़ा है।

 

हरियाणा में ये चावल के मुख्य उत्पादक जिले

 

हरियाणा (haryana rice milers news) में बासमती कारोबार का बड़ा हिस्सा करनाल (karnal news), कैथल, कुरुक्षेत्र और पानीपत (panipat news) से जुड़ा है। इन जिलों से बड़ी मात्रा में बासमती की खरीद, मिलिंग और निर्यात होता है। ऐसे में समुद्री व्यापार में आई रुकावट का सीधा असर यहां के कारोबार पर देखने को मिल रहा है।

 

चार माह में 9 प्रतिशत घटा निर्यात

ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (haryana latest news) के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल से जुलाई की अवधि में इस साल देश के से 20.35 लाख में ट्रैक्टर चावल का निर्यात हुआ है। वहीं पिछले साल इसी अवधि के दौरान 22.47 लाख मैट्रिक टन चावल विदेश में भेजा गया था। यानी इस बार 2.12 लाख में मीट्रिक टन कम निर्यात हुआ है। यानी 9 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। संगठन का कहना है कि निर्यात में कमी से करीब 1700 करोड़ रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है।

समुद्री परिवहन हुआ महंगा

समुद्री परिवहन (basmati chawal bandargahon par atka) महंगा होने से निर्यातकों की लागत तेजी से बड़ी है। कैथल के राइस निर्यातक सुमित गर्ग का कहना है कि इराक भेजे जाने वाले कंटेनर का समुद्री भाड़ा 6200 डॉलर से अधिक हो गया है। युद्ध से पहले यही खर्च करीब 600 डॉलर था। उन्होंने बताया कि दुबई के लिए भी कंटेनर का भाड़ा करीब 6000 डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि पहले लगभग 500 डॉलर था। इतनी बड़ी बढ़ोतरी से भारतीय चावल की कुल लागत बढ़ रही है और विदेशी खरीदारों पर भी अतिरिक्त भोज पड़ रहा है।

स्थिति सामान्य होने पर भेजा जाएगा चावल

बंदरगाहों पर फंसे माल को लेकर ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (All India Rice Exporters Association news) के अध्यक्ष सतीश गोयल का कहना है कि फिलहाल हालात से चावल का अंतरराष्ट्रीय कारोबार प्रभावित हो रहा है। इसके बावजूद अप्रैल से जुलाई के बीच 20.35 लाख मैट्रिक टन चावल का निर्यात हुआ है। बंदरगाहों पर रूका करीब दो लाख मीट्रिक टन चावल भी स्थिति सामान्य होने पर भेजा जाएगा। फिलहाल बढ़ा हुआ समुद्री किराया और समुद्री  निर्यातकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।