FD की ब्याज दरें हो सकती हैं कम, RBI की बैठक में होगा अंतिम फैसला
FD - एफडी में निवेश करने वालों के लिए आने वाला महीना अहम हो सकता है। दरअसल आपको बता दें कि आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 4 से 6 फरवरी के बीच होने जा रही है, जिसमें नीतिगत ब्याज दरों पर फैसला लिया जाएगा। इस फैसले के बाद बैंकों की FD ब्याज दरों में बदलाव संभव है... पूरी डिटेल जानने के लिए खबर को पूरा पढ़ लें-
HR Breaking News, Digital Desk- (RBI MPC meeting February) अगले महीने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज़ में कमी होने की संभावना पर सवाल उठ रहा है। इसका कारण यह है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक फरवरी में होने वाली है। अगर MPC रेपो रेट में कटौती करने का फैसला करती है, तो बैंक फिर से FD पर मिलने वाले ब्याज़ दरों को घटा सकते हैं।
पिछली बार जब रेपो रेट में कटौती की गई थी, तब बैंकों ने जल्द ही फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) पर मिलने वाली ब्याज दरों में कमी करना शुरू कर दिया था। आमतौर पर रेपो रेट घटने से जहां लोन सस्ते हो जाते हैं, वहीं दूसरी ओर FD पर मिलने वाला रिटर्न भी कम हो जाता है।
4 से 6 फरवरी के बीच होगी MPC की अहम बैठक-
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 4 से 6 फरवरी तक चलेगी। इस तीन दिवसीय बैठक में नीतिगत ब्याज दरों को लेकर अहम फैसला लिया जाएगा। इससे पहले दिसंबर की बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत कर दिया था।
रेपो रेट घटने से जहां लोन सस्ते हुए और लोगों की EMI का बोझ कुछ कम हुआ, वहीं बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिलने वाले ब्याज में भी कटौती कर दी थी। दरअसल, रेपो रेट कम होने पर बैंकों को आरबीआई (Reserve Bank Of India) से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है, ऐसे में वे लोन की दरें घटाते हैं और उसकी भरपाई के लिए FD पर ब्याज दरें कम कर देते हैं। दिसंबर की बैठक के बाद ज्यादातर बैंकों ने अपने FD रेट्स में बदलाव किए थे।
जानें क्या है क्रिसिल का अनुमान?
इस बीच, क्रेडिट रेटिंग (credit rating) और रिसर्च कंपनी क्रिसिल (Crisil) का अनुमान है कि आरबीआई फरवरी में होने वाली बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और नीतिगत ब्याज दरों को यथावत रखा जा सकता है। क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महंगाई में हालिया बढ़ोतरी को देखते हुए RBI फिलहाल पॉलिसी रेट्स (policy rates) में कटौती से बच सकता है।
रिटेल महंगाई (retail inflation) नवंबर में 0.71 प्रतिशत से बढ़कर दिसंबर में 1.33 प्रतिशत हो गई थी। हालांकि यह अभी भी RBI के 2 से 4 प्रतिशत के टारगेट रेंज से नीचे है, इसके बावजूद क्रिसिल का मानना है कि रिजर्व बैंक (Reserve bank) इस बार नीतिगत ब्याज दरों में कोई छेड़छाड़ नहीं करेगा।
GDP ग्रोथ धीमी रहने की आशंका-
क्रिसिल का यह भी अनुमान है कि अगले वित्त वर्ष में भारत की GDP ग्रोथ घटकर 6.7 प्रतिशत रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड (global trade) में बनी चुनौतियों के चलते देश की आर्थिक रफ्तार पर कुछ असर पड़ सकता है।
रेटिंग एजेंसी (Rating Agency) के मुताबिक, रिटेल महंगाई मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 में अनुमानित 2.5 प्रतिशत से बढ़कर अगले वित्त वर्ष 2026-27 में 5.0 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। गौरतलब है कि महंगाई को काबू में रखना आरबीआई की प्रमुख जिम्मेदारी है और इसके लिए रिजर्व बैंक का सबसे प्रभावी हथियार रेपो रेट में बढ़ोतरी (repo rate hike) माना जाता है। पहले भी इसी जरिए RBI ने लोन को महंगा कर महंगाई पर काबू पाने की कोशिश की है।