Gold Silver Price : सोने-चांदी की कीमतों के पीछे क्या है कारण, जानें 2026 में क्या रहेगा हाल

Gold Silver Price : सोना और चांदी लगातार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, जिससे निवेशकों और आम लोगों के मन में सवाल है कि आखिर कीमतों में इतनी तेजी क्यों है। वैश्विक हालात, ब्याज दरों की उम्मीदें और बढ़ती औद्योगिक मांग (increasing industrial demand) इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं। ऐसे में 2026 में इन कीमती धातुओं के रुख को लेकर क्या अनुमान हैं, आइए ये जान लेते हैं नीचे इस खबर में-

 

HR Breaking News, Digital Desk- (Gold Silver Price) सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है। इस हफ्ते के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय सर्राफा बाजार (Indian bullion market) में वैश्विक अनिश्चितताओं और राजनीतिक तनावों (political tensions) के बीच दोनों की कीमतों ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। सोमवार को ही चांदी के दाम में 15,000 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

 

 

इस तेजी का असर यह हुआ कि चांदी एक दिन में लगभग 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 2,65,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। वहीं, सोने की चमक भी तेज हुई है। 99.9 प्रतिशत शुद्ध सोना 2,900 रुपये (2.05%) की बढ़त के साथ 1,44,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

ऐसे में यह जानना महत्वपूर्ण है कि बीते 12 महीनों में सोना और चांदी की कीमतें कैसे बढ़ी (How gold and silver prices increase) हैं। हालिया तेजी के पीछे क्या कारण हैं? दुनिया के किस देश के पास कितनी सोने की भंडार है? और आने वाले दिनों में सोना-चांदी की कीमतों का क्या अनुमान लगाया जा रहा है? आइए जानते हैं।

2025 में क्यों बढ़े थे सोना-चांदी के दाम?

चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ी, अब क्रिटिकल मिनरल की सूची में शामिल-
2025 में चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी (silver price hike) सिर्फ निवेश की मांग के कारण नहीं हुई। इस साल इसे 'ग्रीन मेटल' के रूप में नई पहचान मिली। अमेरिका द्वारा चांदी को 'क्रिटिकल मिनरल' की सूची में शामिल करने और सोलर पैनल व ईवी बैटरी सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण लंदन (london) और न्यूयॉर्क (newyork) के बाजारों में चांदी की भारी कमी देखी गई।



केंद्रीय बैंकों ने चांदी की आक्रामक खरीदारी की-
चीन, रूस और ब्रिक्स देशों के केंद्रीय बैंकों ने 2025 में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने के भंडार में रिकॉर्ड वृद्धि (Record increase in gold reserves) की। 'वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल' के अनुसार, यह खरीदारी पिछले 50 वर्षों में अब तक की सबसे बड़ी रही।

ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव-
साल भर अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण निवेशक शेयर बाजार (share market) के जोखिम से बचकर सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में चुनने लगे।

अब 2026 में क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम?  

अमेरिकी फेडरल रिजर्व में ऊहापोह की स्थिति-

बाजार में यह संभावना बढ़ रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) 2026 में ब्याज दरों में कटौती करेगा। ब्याज दरों में गिरावट से बॉन्ड जैसे निवेशों पर रिटर्न कम हो जाता है, जिससे निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे सोना और चांदी की ओर आकर्षित होते हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग ने अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US central bank) के प्रमुख जेरोम पॉवेल के खिलाफ संभावित आपराधिक जांच शुरू की है, जिससे फेड की स्वतंत्रता पर सवाल उठे हैं। इस राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण डॉलर कमजोर हुआ और निवेशकों का भरोसा डगमगा गया, जिससे कीमती धातुओं की मांग बढ़ गई है।

सुरक्षित निवेश के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प-

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, व्यापार युद्ध और उच्च मुद्रास्फीति (high inflation) के जोखिम के चलते निवेशक सोना और चांदी को सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं और इसमें निवेश बढ़ा रहे हैं। यह संपत्ति उनके पोर्टफोलियो (portfolio) को आर्थिक उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रखने में मदद करती है।

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता (Central bank dependence on the dollar) कम करने और अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने के लिए बड़े पैमाने पर सोना खरीद रहे हैं। डॉलर और अन्य मुद्राओं में गिरावट के समय सोना और चांदी अधिक स्थिर निवेश के रूप में बने रहते हैं।

खासतौर पर चांदी की बात करें तो इसकी औद्योगिक मांग (industrial demand) बहुत अधिक है, जबकि उत्पादन और आपूर्ति सीमित है। यही कारण है कि चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में और भी अधिक तेजी देखी जा रही है।