Income Tax Act : आयकर के नियमों में हुए हैं बड़े बदलाव, ITR भरने में न हो कोई दिक्कत, इस लिए जान लें सारे नियम

Income Tax Act : आयकर के नियमों में इस बार बड़े बदलाव किए गए हैं, जो टैक्सपेयर्स के लिए नए चैलेंज ला सकते हैं। ITR भरते समय कोई गलती न हो, इसके लिए जरूरी है कि आप नए नियमों और शब्दावली को अच्छे से समझ लें... इस खबर में आज हम आसान भाषा में सभी जरूरी बदलावों का पूरा विवरण देंगे-

 

HR Breaking News, Digital Desk- (Tax Terminology) पिछले करीब 65 वर्षों से लागू इनकम टैक्स एक्ट 1961 अब जल्द ही इतिहास बनने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू किया जाएगा। यह नया कानून सिर्फ टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया ही नहीं बदलेगा, बल्कि टैक्स से जुड़ी पूरी शब्दावली (Terminology) भी बदल देगा। ऐसे में पुरानी टैक्स भाषा के भरोसे रहने से छोटी गलती भी महंगी पड़ सकती है।

ब क्या बदलेगा-

अब तक व्यवस्था यह थी कि जिस साल आपकी कमाई होती थी, उसे ‘प्रीवियस ईयर’ कहा जाता था और जिस साल उस कमाई पर इनकम टैक्स रिटर्न भरा जाता था, उसे ‘असेसमेंट ईयर’ माना जाता था। नए कानून ने इस भ्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब 1 अप्रैल से 31 मार्च तक की अवधि को सीधे Tax Year कहा जाएगा। यानी टैक्स की भाषा को ज्यादा सरल और स्पष्ट बनाने की कोशिश की गई है।

फॉर्म 16 में भी होगा बदलाव, नए नियमों के अनुसार बदलेगा तरीका-

इस बदलाव का असर सबसे पहले फॉर्म 16 जैसे दस्तावेजों में नजर आएगा। अब पुरानी शैली के “AY 2027-28” की जगह सीधे “Tax Year: 2026-27” लिखा होगा। यानी जिस टैक्स अवधि की बात हो रही है, उसे साफ और स्पष्ट तरीके से दर्शाया जाएगा। यह बदलाव खासकर नौकरीपेशा टैक्सपेयर्स के लिए अहम है, क्योंकि फॉर्म 16 समझते समय होने वाला भ्रम इससे काफी हद तक खत्म हो जाएगा। नई नियमावली 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी, इसलिए फॉर्म और प्रक्रियाएं भी उसी अनुसार बदलेंगी।

सभी सेक्शंस के नंबर बदल दिए गए हैं-

अगर आप अब भी सेक्शन 80C के नाम पर टैक्स छूट याद किए बैठे हैं, तो सतर्क हो जाइए। नए एक्ट में न सिर्फ भाषा को सरल बनाया गया है, बल्कि सभी धाराओं (Sections) के नंबर भी बदल दिए गए हैं। यानी पुरानी सेक्शन 80C अब एक नए नंबर से जानी जाएगी। अब टैक्स फाइलिंग के दौरान पुराने सेक्शन नंबर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। ऐसा करने पर पोर्टल (portal) उसे स्वीकार नहीं करेगा या आपकी फाइलिंग गलत मानी जा सकती है।

आपको अभी क्या करना चाहिए?

अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से कहें कि वे अप्रैल से पहले अपने सिस्टम और नॉलेज को नए टैक्स ईयर सिस्टम के अनुसार अपडेट कर लें। अगर आप खुद टैक्स फाइलिंग सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं, तो यह जरूर जांच लें कि वह इनकम टैक्स एक्ट 2025 को सपोर्ट करता हो। इसके अलावा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा जारी की गई ट्रांजिशनल गाइडेंस को एक बार जरूर पढ़ें। विभाग के मुताबिक, यह गाइडेंस टैक्सपेयर्स को नए फॉर्म्स (New forms for taxpayers) और नए फ्रेमवर्क समझने में मदद करने के लिए जारी की गई है।

सबसे बड़ी बात क्या है इसमें-

इस बदलाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सरकार टैक्स की भाषा को सरल और स्पष्ट बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन यह सरलता तभी काम आएगी, जब टैक्सपेयर्स (taxpayers) खुद पुरानी आदतें छोड़कर नई शब्दावली को समझने और अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाएं।

अभी से इतना समझ लें कि अप्रैल 2026 से टैक्स फाइलिंग (tax filing) की भाषा पूरी तरह बदलने जा रही है। इसलिए नई टैक्स भाषा को हल्के में लेना सही नहीं होगा। क्योंकि छोटी सी लापरवाही भी ITR भरते समय बड़ी गड़बड़ी पैदा कर सकती है।