Income Tax Rules : अब टैक्सपेयर्स को नहीं भरना होगा फॉर्म 16, 1 अप्रैल से बदलेगा ये नियम
HR Breaking News (Income Tax Rules) अगर आप टैक्सपेयर है तो ये खबर आपके लिए बेहद अहम होने वाली है। अब हाल ही में आईटीआर भरने के नियमों को लेकर बड़ा अपडेट आया है। जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने का तरीका में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। सरकार टैक्स फाइलिंग को पारदर्शी बनाने के लिए इनकम टैक्स रूल 2026 लागू कर रही है। ऐसे में आइए खबर में जानते हैं कि नए ITR नियम क्या होने वाले हैं।
अब कैसे तय होंगे सभी टैक्स फॉर्म
बता दें कि नए नियम 2026 (Income Tax New Rules 2026) के तहत, सभी टैक्स फॉर्म अब 'आयकर अधिनियम 2025' (Income Tax Act 2025) के प्रोविजन के अनुसार तय किए हैं। यानी अब आपको अपनी कमाई और कटौती (Deductions) की बारीकी से जानकारी देनी होगी। अगर आप शेयर या प्रॉपर्टी की बिक्री करते हैं तो शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म मुनाफे को बिल्कुल साफ मेंशन करना होगा और अगर आपके पास विदेश में कोई प्रोपर्टी है, तो उसके खुलासे के नियम पहले से अधिक सख्त और डेटा-भारी होने वाले हैं।
फॉर्म 16 की जगह लेगा ये फॉर्म
बता दें कि नौकरी पेशा लोगों के लिए बड़ा बदलाव दशकों से चला आ रहा 'फॉर्म 16' (Form 16 kya hai) नहीं रहने पर होगा, अब इस फॉर्म की जगह 'फॉर्म 130' लेगा। यह नया फॉर्म कहीं अधिक बड़ा होने के साथ ही इसके तीन मुख्य हिस्से होंगे। इस फॉर्म में तीन हिस्से ऐसे होंगे-
पार्ट A में कंपनी और कर्मचारी की जानकारी होगी।
पार्ट B में टैक्सपेयर्स की सैलरी और काटे गए टैक्स (Tax Deduction At Source) का सारांश होगा।
पार्ट C में टैक्स योग्य आय का पूरा केलकुलेशन होगा।
यह नियम सैलरी वालों के साथ ही पेंशनभोगियों और उन सीनियर सिटीजन्स पर भी लागू की जाएगी, जिनकी इनकम ब्याज से होती है। बड़ी बात यह है कि अब इसे हाथ से नहीं बनाया जाएग और सिर्फ पोर्टल से ही डाउनलोड किया जाएगा।
बेहद ऑटोमैटिक होगा ITR भरना
नियमों में बदलाव (ITR Filling New Rules) से अब ITR फिल करना बेहद ऑटोमैटिक हो जाएगा, क्योंकि अब आपका ज्यादातर डेटा पहले से ही फॉर्म में मिलेग, जिससे गलतियों की गुंजाइश बेहद कम हो जाएगी, लेकिन अगर आपकी जानकारी और विभाग के डेटा में फर्क पाया गया तो सिस्टम तुरंत ही उस गलती को पकड़ लेगा।
रिफंड पर पड़ेगा सिस्टम-आधारित रिपोर्टिंग का प्रभाव
इसके साथ ही रिफंड की समय सीमा में सीधा बदलाव (Change in refund deadline) नहीं किया गया है, लेकिन सिस्टम-आधारित रिपोर्टिंग (System-Based Reporting) का प्रभाव रिफंड पर देखने को मिलेगा। अगर आपका डेटा पूरी तरह सही है, तो रिफंड पहले से अधिक तेजी से आएगी। वहीं, अगर जानकारी में गड़बड़ी मिलती है तो सिस्टम उसे फ्लैग कर देगा और रिफंट अटक सकता है।