इस बैंक को फिर से बेचने की सरकार ने तैयारी की शुरू, पिछली बार मिल रही थी कम कीमत

Bank News - सरकार ने  बैंक इस को फिर से बेचने की तैयारी शुरू कर दी है। पिछली बार निवेशकों ने सरकार द्वारा तय की गई कीमत से कम बोली लगाई थी, इसलिए डील रोक दी गई थी। इस बार सरकार अधिक सावधानी के साथ कदम उठाना चाहती है और पूरी प्रक्रिया की विस्तार से समीक्षा कर रही है-

 

HR Breaking News, Digital Desk- (Bank) IDBI बैंक के निजीकरण को लेकर सरकार फिर से नई पहल करने की तैयारी में है। पिछली बार यह प्रक्रिया इसलिए रुकी थी क्योंकि इच्छुक निवेशकों ने सरकार द्वारा तय की गई कीमत से कम बोली लगाई थी। सरकार ने माना कि इस कीमत पर डील करना सही नहीं होगा, इसलिए उस समय पूरी प्रक्रिया को बंद कर दिया गया था।

अब सरकार इस प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की योजना बना रही है, लेकिन इस बार अधिक सावधानी के साथ कदम उठाए जाएंगे। पहले यह जांच की जाएगी कि पिछली बार कहां गलती हुई और निवेशकों ने कम कीमत क्यों लगाई। इसके लिए पूरे प्रोसेस की विस्तार से समीक्षा की जाएगी, विशेषकर बैंक की कीमत यानी रिजर्व प्राइस तय करने के तरीके पर।

जानकारी के अनुसार, इस मामले पर जल्द ही मंत्रियों के एक बड़े समूह को पूरी जानकारी दी जाएगी। यही समूह तय करेगा कि आगे की रणनीति क्या हो और इस बार प्रक्रिया को कैसे सफल बनाया जा सके। कुल मिलाकर, सरकार का उद्देश्य यह है कि इस बार बैंक की बेहतर कीमत मिले और निजीकरण (Privatization) सही तरीके से पूरा हो।

पिछले पांच साल से IDBI बैंक में हिस्सेदारी बेचने की कोशिश-

सरकार पिछले लगभग पांच साल से IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। अब सरकार इस डील में अधिक सावधानी बरतना चाहती है, ताकि इस बार सही मूल्य हासिल किया जा सके। सूत्रों के अनुसार, सरकार इस मामले की पूरी बारीकी से समीक्षा करेगी।

खास तौर पर यह जांच की जाएगी कि रिजर्व प्राइस (reserve price) तय करने का तरीका सही था या नहीं और इसमें किस तरह के सुधार किए जा सकते हैं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ाने के लिए किन बदलावों की आवश्यकता है।

रिजर्व प्राइस तय करने के तरीके पर उठे सवाल-

IDBI बैंक के निजीकरण में सबसे बड़ी चिंता यह है कि बैंक की कीमत तय करते समय शेयर प्राइस पर अधिक भरोसा किया गया। आसान शब्दों में कहें तो, सरकार ने बैंक की वैल्यू निर्धारित (value of bank determined) करते समय बाजार में चल रहे शेयर की कीमत को ज्यादा अहमियत दी।


 

बैंक में हिस्सेदारी का बंटवारा-

IDBI बैंक में सबसे बड़ी हिस्सेदारी सरकार और LIC के पास है। सरकार के पास लगभग 45.48% और LIC के पास 49.24% शेयर हैं, यानी बैंक का अधिकांश हिस्सा सरकारी संस्थाओं के पास है। वहीं, आम निवेशकों के पास केवल करीब 5% हिस्सेदारी है। यही कारण है कि बाजार में इस शेयर का फ्री फ्लोट कम (Lower free float of shares) है और कीमत में उतार-चढ़ाव अधिक हो सकता है।

जब से इस डील की फाइनेंशियल बिड्स रद्द (Financial bids canceled) की गई हैं, तब से IDBI बैंक के शेयर पर दबाव देखा गया है। इस दौरान शेयर में लगभग 19% की गिरावट आई है। हाल ही में यह शेयर NSE पर 74.28 रुपए पर बंद हुआ, जो इसके 52-सप्ताह के निचले स्तर 72 रुपए के काफी करीब है। इससे पता चलता है कि बाजार में निवेशकों (investors in the market) का भरोसा थोड़ा कमजोर हुआ है। खबर लिखे जाने तक आज (18 मार्च दोपहर 2 बजे) यह स्टॉक 1.93% की तेजी के साथ 75.53 रुपए पर कारोबार कर रहा था।



डिस्क्लेमर -

यह खबर केवल सूचना के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है और इसे किसी भी स्टॉक को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। शेयर मार्केट (share market) में निवेश जोखिमों से जुड़ा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी योग्य वित्तीय विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।