देश में फिर बढ़ा महंगाई का ग्राफ, 5 से 7% का इजाफा
Inflation Rate High : देश में महंगाई के ग्राफ में एक बार फिर बढ़ोतरी देखने को मिली है। हाल ही में रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली खाद्य वस्तुओं में लगातार हो रही बढ़ोतरी आम आदमी की कमर तोड़ रही है। एनएसओ के हालियां आंकड़ों के अनुसार महंगाई में 5 से 7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। चलिए जानते हैं आंकडों के हिसाब से विस्तार से।
HR Breaking News (Inflation Rate High) : देश में महंगाई का दबाव एक बार फिर बढ़ने लगा है। सितंबर में प्याज, अदरक, लहसुन और नींबू जैसी रोजमर्रा की खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई। अगस्त में यह 4.83 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की महंगाई में भी तेजी आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य महंगाई दर अगस्त के 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई। महंगाई बढ़ने का असर ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा दिखाई दिया है।
प्याज की कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी दर्ज (Inflation Rate india)
सितंबर में कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में सालाना आधार पर बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्याज के दाम 108 .9 प्रतिशत बढ़ गए। अदरक 62.85 प्रतिशत, लहसुन 54.62 प्रतिशत और नींबू 36.41 प्रतिशत महंगा हुआ। इसके अलावा चांदी के आभूषणों की कीमतों में भी 87.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि आलू, टमाटर, भिंडी, नारियल और मोटर, कार व जीप की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
गांवों में महंगाई की मार ज्यादा (India Inflation Rate High)
एनएसओ के आंकाड़ो के अनुसार नवंबर में ग्रामीण क्षेत्रों की खुदरा महंगाई की दर 6.08 प्रतिशत रही। जबकि शहरी क्षेत्र में यह 4.88 प्रतिशत रही। खाद्य महंगाई के मामले में भी ग्रामीण इलाकों की स्थिति ज्यादा प्रभावित देखने को मिली है। गांवों में खाद्य महंगाई की दर 8.06 प्रतिशत रही और शहरों में 7.18 प्रतिशत रही।
आरबीआई ने बढ़ाया महंगाई का अनुमान (RBI update)
आरबीआई नाम महंगाई में तेजी को देखते हुए वित्त वर्ष 2026 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान 5 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत कर दिया है। बैंक ने दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 5.7 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
खाद्य महंगाई 21 महीने में उच्च स्तर पर
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्यालय अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत (Devendra Pant, headquarter economist at India Ratings and Research) के अनुसार सितंबर में खाद्य महंगाई 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई जो 21 महीने का उत्तम सरकार है जुलाई में यह 5.52 प्रतिशत और अगस्त में 5.97 प्रतिशत थी। उनके मुताबिक मौसम में परिस्थितिया, पिछले साल के कम मूल्य स्तर के आधार प्रभाव और अलनीनो की आशंका से खाद्य वस्तुओं के दम पर दबाव बढ़ा है।
ग्राहकों पर महंगाई की मार
क्रिसिल की वरिष्ठ निदेशक एवं प्रमुख शास्त्री दीप्ति देशपांडे (Deepti Deshpande, Senior Director and Chief Engineer, CRISIL) ने भी आने वाले महीना में खाद्य महंगाई ऊंची बनी रहने की आशंका जताई है। उनके अनुसार कम बारिश से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इंधन परिवर्तन की लागत भी बढ़ सकती है उन्होंने कहा कि कंपनी बड़ी इलाका का बोझ ग्राहकों पर डालती है तो दूसरी वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। इसके अलावा एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा के अनुसार चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में महंगाई औसतन करीब 6.1 प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों फसल उत्पादन में उतार-चढ़ाव, जैव ईंधन के लिए फसलों के इस्तेमाल को खाद्य पूर्ति के सामने संभावित चुनौती बताया है।
देशभर के बाजारों से जुटाएं जाते हैं आंकड़े
एसएनओ उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को तैयार करने के लिए देश के ग्रामीण और शहरी बाजारों से वस्तुओं की कीमतों की जानकारी जुटाता है। सितंबर में 1,407 शहरी बाजार और एक 1,465 गांवों से आंकड़े इकट्ठे किए गए थे। ऑनलाइन बाजार को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। मंत्रालय के अनुसार सितंबर में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में कीमतों के आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया 100 प्रतिशत पूरी रही।