कृषि भूमि के इंतकाल, कब्जे और बंटवारे को लेकर अब नहीं होगा विवाद, सरकार द्वारा लिया गया अहम फैसला
चंडीगढ़ । हरियाणा में कृषि भूमि के इंतकाल, कब्जे और बंटवारे को लेकर होने वाले विवाद व झगड़े बंद होंगे। किसानों को अब खेती के लिए खरीदी गई भूमि या उसके हिस्से का इंतकाल कराने और कब्जा लेने के लिए वर्षों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही हिस्सेदारों की सहमति के बगैर ही खानाकाश्त से अनुचित रूप से गिरदावरी किसी के भी नाम कराने पर रोक लगेगी। इससे जमीन से जुड़े झगड़े खत्म होंगे। विधानसभा ने शुक्रवार को पंजाब भू-राजस्व (हरियाणा संशोधन) विधेयक पर मुहर लगा दी है।
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खून के रिश्ते व पति–पत्नी को छोड़कर सभी हिस्सेदारों को छह महीने में जमीन का बंटवारा करना होगा
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव व वित्तायुक्त संजीव कौशल ने बताया कि खून के रिश्ते व पति-पत्नी को छोड़कर जमाबंदी और इंतकाल में शामिल सभी हिस्सेदारों के लिए अनिवार्य रहेगा कि वह कानून लागू होने के छह महीने के भीतर आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा कर लें। राजस्व अधिकारी से अनुरोध करने पर यह समय छह महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है। एक साल में भी अगर आपसी बंटवारा नहीं किया जाता है तो राजस्व अधिकारी अपने स्तर पर तकसीम की कार्यवाही छह महीने में पूरी करेंगे।
प्रदेश में 17.82 लाख सामूहिक खेवट, राजस्व अदालतों में चल रहे जमीन से जुड़े साढ़े 39 हजार केस
वित्तायुक्त राजस्व संजीव कौशल ने बताया कि प्रदेश में 17.82 लाख सामूहिक खेवट हैं। राजस्व अदालतों में जमीन से जुड़े 39 हजार 500 विवादों के केस लंबित हैं। चूंकि फैसले से लाखों परिवार प्रभावित होने वाले हैं, इसलिए राजस्व विभाग के अफसरों और कर्मचारियों के साथ ही रिटायर्ड अफसरों और कर्मचारियों की भी इस काम में मदद ली जाएगी।
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मेयर के साथ ही पालिका और परिषद के प्रधानों के खिलाफ आ सकेंगे अविश्वास प्रस्ताव
हरियाणा में नगर निगमों के मेयर और नगर पालिकाओं व परिषद के प्रधानों के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए विधानसभा में नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक और हरियाणा नगर निगम (द्वितीय संशोधन) विधेयक पारित किए गए हैं। इसके अलावा नगर परिषद और नगर पालिका में प्रधान के पद का चुनाव सीधे तौर पर मतदाताओं से कराने के लिए हरियाणा नगर पालिका निर्वाचन नियमावली 1978 भी संशोधन की प्रक्रिया में हैं।