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प्रदेश में एशिया की सबसे बड़ी शुगर मिल बनकर तैयार, बिजली का भी होगा उत्पादन

आज हरियाणा के मुख्यमंत्री ने सबसे बड़ी मिल का उद्घाटन किया है। अब हरियाणा के लोगों को अपना गन्ना कहीं ओर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

 

HR BREAKING NEWS (पानीपत)। हरियाणा सीएम मनोहर लाल ने रविवार को पानीपत में प्रदेश की सबसे बड़ी शुगर मिल का उद्घाटन किया। पानीपत के गांव डाहर में आधुनिक शुगर मिल बनकर तैयार हो गई है। 356 करोड़ की लागत से मिल का निर्माण किया गया है।

 

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शुगर मिल की खास्यित


बता दें कि नई शुगर मिल में रोज 50 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई होगी. यह शुगर मिल 356 करोड़ की लागत से बनकर तैयार हुई है. हरियाणा का सबसे बड़ी अत्याधुनिक शुगर मिल बनकर तैयार हो गई है. 
नई शुगर मिल डाहर गांव में 73 एकड़ भूमि पर स्थापित की गई है. इसमें प्रतिदिन 28 मेगावाट बिजली उत्पादन करने की क्षमता का संयंत्र भी स्थापित किया गया है. इसमें से 7 मेगावाट बिजली शुगर मिल को चलाने में इस्तेमाल होगी, जबकि 21 मेगावाट बिजली बेची जाएगी.

 


कोआपरेटिव मिलों में सबसे आधुनिक है नई शुगर मिल


शुगर मिल के एमडी नवदीप सिंह ने बताया कि पानीपत की नई शुगर मिल प्रदेश के कोआपरेटिव मिलों में सबसे आधुनिक है। जो पुरी तरह से कम्प्यूटर संचालित है। एक सिस्टम से पूरा प्लांट आपरेट होता है।

आटोमेटिक तरीके से उस पार्ट को अलग कर ठीक करने के बाद चालू किया जा सकता है। इसमें करीब 150 करोड़ की लागत से डिस्टलरी प्लांट भी लगना है, जो 90 केएलपीडी का होगा। इसकी बिजली टरबाइन व बायलर सबसे बड़ा है। खोई हैंडलिंग व एस हैंडलिंग सिस्टम सबसे बेहतर है। मिक्स कूलिंग सिस्टम करनाल के बाद इसी में लगा है।

 


किसानों को सिंचाई के लिए पानी भी देंगे


नए शुगर मिल में ईटीपी प्लांट भी लगाया जा रहा है। जहां से आसपास के किसानों को खेत में सिंचाई करने को लेकर पानी दिया जा सकेगा। एमडी ने बताया कि पेराई के दौरान एक टन गन्ने से करीब 100 लीटर पानी निकलता है। उक्त पानी को इधर उधर बहाकर वेस्ट करने की बजाय ईटीपी प्लांट में ट्रीट कर इच्छुक आस-पास के किसानों को खेत में फसलों की सिंचाई को लेकर दिया जाएगा।

 

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हादसे का शिकार होने से बचेंगे


किसान संजय ने बताया कि वो करीब 30 एकड़ गन्ने की खेती करता है। पानीपत मिल की क्षमता कम होने पर उन्हें हर साल पंजाब या उत्तराखंड के मिल में गन्ना लेकर जाना पड़ता था। नईमिल के चालू होने से दूसरे प्रदेशों में गन्ना लेकर जाने से छुटकारा ही नहीं मिलेगा, बल्कि हादसों का शिकार होने से भी बचेंगे। ट्रांसपोर्ट का खर्च भी बहुत कम होगा।