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अब जमीन बेचने के बाद भी मालिक बने रहेंगे किसान , हर साल मिलेगा मुनाफा

Haryana government new decision regarding land purchase हरियाणा सरकार ने  विकास परियोजनाओं के लिए आड़े आ रही जमीनों की कमी को दूर करने के लिए बेहतरीन रास्ता निकालते हुए बड़ा फैसला ( new decision by haryana government) लिया है। जिसके तहत अब जमीन बेचने के बाद भी किसान ही मालिक रहेंगे। आइए नीचे खबर में जानते है खबर से जुड़ी पूरी जानकारी
 

HR Breaking News, डिजिटल डेस्क, हरियाणा सरकार ने विकास परियोजनाओं (development projects) के लिए आड़े आ रही जमीन की कमी को दूर करने का बेहतरीन रास्ता निकाला है। प्रदेश सरकार किसी भी परियोजना के लिए किसानों की मर्जी के बिना जमीन अधिगृहित नहीं करने के अपने फैसले पर कायम है, लेकिन अब जो भी  जमीन खरीदी जाएगी, उसका मालिक सरकार और किसान (kisan) दोनों होंगे।

ऐसी जमीन का एक निर्धारित मूल्य (a fixed value of land) तय कर किसान को दे दिया जाएगा। फिर उस जमीन पर बनने वाले किसी भी प्रोजेक्ट (project) का समस्त खर्चा हरियाणा व सरकार उठाएगी और साथ ही उस प्रोजेक्ट से होने वाले लाभ में किसान को भी हिस्सेदारी प्रदान की जाएगी।

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मुख्यमंत्री मनोहर लाल (haryana cm manohar lal) ने शुक्रवार को किसानों के लिए इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की। इसे सरकार ने ज्वाइंट वेंचर (संयुक्त उद्यम) का नाम दिया है। हुड्डा सरकार में जमीनों का खूब अधिग्रहण हुआ। भाजपा सरकार ने सत्ता में आने से पहले इसे मुद्दा बनाते हुए सरकार आने के बाद किसानों की मर्जी के बिना जमीन अधिगृहित नहीं करने का फैसला किया।

 

इससे विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की कमी आने लगी। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने ई-भूमि पोर्टल (e-Bhoomi Portal) की शुरुआत की, जिसमें व्यवस्था की गई कि यदि कोई किसान अपनी जमीन बेचना चाहता है तो वह पोर्टल पर डिटेल अपलोड करेगा और साथ ही यह भी बताएगा कि जमीन की संभावित कीमत कितनी है। सरकार को यदि जमीन उपयोगी और कीमत सही लगी तो वह उसे खरीद लेगी।

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अब तक करीब एक हजार एकड़ जमीन ई-पोर्टल के माध्यम से खरीदी जा चुकी है। यह योजना काफी कारगर रही, लेकिन इससे जमीन की जरूरत पूरी नहीं हो पाई। फिर सरकार ने लैंड पूलिंग स्कीम लांच की। इसके तहत जमीन के बह-मालिकों के समूह से जमीन जाती है और प्रोजेक्ट सिरे चढ़ने बाद बाकी बची जमीन को इन भू-मालिकों को ही सौंप दिया जाता है।इसके तहत किसानों को दो तरह के विकल्प दिए जाते हैं। पहला तो उनकी जमीन का मुआवजा तय किया जाता है। दूसरा विकल्प रहता है कि किसान विकसित प्लाट लें। मुआवजा लेने के बाद प्लाट नहीं मिलेंगे।