हिसार में पराली जलाने के मामलों पर लगेगा अंकुश, 9 गांवों की विशेष ड्रोन से होगी निगरानी
HR Breaking News (Hisar Agriculture news) हरियाणा के हिसार जिले में धान कटाई के सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन सख्त है। प्रशासन की तरफ से पर्यावरण प्रदूषण रोकने के लिए विशेष हाईटेक तरीका अपनाया जा रहा है। हरसैक की सेटेलाइट मैपिंग (Hisar Agriculture) के साथ-साथ अब कृषि विभाग ड्रोन से भी निगरानी रखेगा। कृषि विभाग को 2 आधुनिक ड्रोन मिले हैं। इन ड्रोन के माध्यम से जिले के येलो जोन में आने वाले संवेदनशील गांवों व आसपास के इलाकों की कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
इस साल जिले में अब तक पराली जलाने के कोई मामले सामने नहीं आए हैं। हिसार में अच्छी बात यह है कि एक भी गांव पराली जलाने के मामले में रेड जोन में नहीं है।
9 गांवों को रखा गया येलो जोन में (Hisar News Update Today)
हिसार में पराली जलाने के मामलों में कमी लाने के लिए एहतियातन तौर पर 9 गांवों को संवेदनशील यानी कि येलो जोन में रखा गया है। यह संवेदनशील एरिया हरसेके से मिलने वाली फीडबैक के आधार पर चूज किया गया है। यहां अगर पराली जलाने का मामला आता है तो ड्रोन के माध्यम से बर्निंग एरिया की फोटो व मैपिंग की जाएगी। जिस किसान के खेत में पराली जलेगी उस पर सख्ती की जाएगी।
रेड एंट्री होगी दर्ज (harsac map)
अगर किसी किसान के द्वारा पराली जलाई जाती है तो उसको मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री हो जाएगी। इसके बाद में सरकारी एजेंसी पर अपनी फसल नहीं बेच सकेगा। इसके साथ ही जुर्माना किया जाएगा व FIR भी दर्ज कराई जाएगी।
197 टीम भी की गई गठित (harsac hisar)
हिसार में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए 197 टीमों का भी गठन किया गया है। ड्रोन से भी यह टीम निगरानी रखेंगे। हरसैक से प्राप्त लोकेशन के आधार पर ड्रोन के माध्यम से मैचिंग भी की जाएगी। पिछले 2 साल से हिसार में कोई भी गांव रेड जोन में नहीं है, हालांकि यलो जोन में 9 गांव को रखा गया है।
धुएं से पता लगेगी लोकेशन (Location Update)
कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब भी कहीं पराली जलेगी तो धुआं उठने से लोकेशन मिल जाएगी। पराली प्रबंधन और इस पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा चक्कर को मजबूत किया गया है। अभी तक जहां सेटेलाइट के जरिए खेतों में लोकेशन ट्रैक की जाती थी, वहीं दौड़ ड्रोन भी जमीनी स्तर पर लाइव मॉनिटरिंग करेंगे। ड्रोन कैमरा की यह तकनीक उन इलाकों में विशेष रूप से अपनाई जाएगी, जहां पर आग जलाने की आशंका ज्यादा रहेगी। धुएं की जहां भी सुगबुगाहट मिलेगी, कैमरा उसकी सही लोकेशन और तस्वीरें तुरंत अधिकारियों तक पहुंचा देगा।