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Gold Silver Price : सोने-चांदी की भविष्य में क्या रहेगी रफ्तार, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Gold Silver Price - सोना और चांदी लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं, जिससे निवेशकों के मन में आगे की रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जानना जरूरी है कि आने वाले समय में सोने-चांदी (today silver price) को लेकर विशेषज्ञ क्या अनुमान लगा रहे हैं... तो चलिए आइए नीचे खबर में जान लेते है एक्सपर्ट की राय-

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Gold Silver Price : सोने-चांदी की भविष्य में क्या रहेगी रफ्तार, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट

HR Breaking News, Digital Desk- (Gold Silver Price) सोना और चांदी के दाम लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं। दिल्ली में 24 कैरट सोने की कीमत 20 जनवरी 2026 को 14,991 रुपये प्रति ग्राम थी, जो महज 9 दिन में बढ़कर रिकॉर्ड 17,900 रुपये प्रति ग्राम हो गई। वहीं चांदी की कीमत 20 जनवरी को 3.20 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो 29 जनवरी को 4.10 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। अब सवाल यह उठता है कि सोना-चांदी के दाम इस तरह कब तक बढ़ते रहेंगे और इसकी वजहें क्या हैं।

ट्रंप के फैसलों से सोना-चांदी के दाम बढ़े-
राष्ट्रपति ट्रंप के सत्ता में आने के बाद उनके टैक्स वॉर और वैश्विक जियोपॉलिटिकल तनावों (global geopolitical tensions) ने सोना-चांदी की कीमतें बढ़ा दी हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष, इस्राइल-फिलिस्तीन, लेबनान-हिजबुल्ला, यमन-हूती और ईरान के टकराव के साथ मध्य एशिया में लाल सागर का ब्लॉक और ट्रंप के अनिश्चित फैसले सोने-चांदी को महंगा बना रहे हैं।


सारथी आचार्य के अनुसार, चांदी की कीमत बढ़ने का एक बड़ा कारण इलेक्ट्रिक वाहन और सौर ऊर्जा जैसे उद्योगों में इसका बढ़ता इस्तेमाल है। इसके अलावा सोना और चांदी दशकों से सुरक्षित निवेश माने जाते हैं, इसलिए डॉलर की अनिश्चितता के बीच कई देशों ने भी इन धातुओं का भंडारण शुरू कर दिया है।

रूस और यूक्रेन के टकराव (conflict between Russia and Ukraine) के बाद रूस का सोना जब्त कर लिया गया था। इसके बाद लंदन समेत कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपना सोना वहां से निकालकर खुद भंडारण शुरू कर दिया, जिससे सोने की कीमतों में लगातार तेजी आई।
सारथी आचार्य के अनुसार, अभी भी यह तय नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप अगले कदम में क्या करेंगे। वे किस पर कितना टैक्स (tax) लगाएंगे, संयुक्त राष्ट्र को खत्म कर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कैसे बनाएंगे और अपने देश में बढ़ते तनाव और दबाव को संभालने के लिए दुनिया के साथ किस तरह व्यवहार करेंगे-ये सभी अनिश्चितताएं सोना-चांदी की कीमतों पर असर डाल रही हैं।

प्रो. एस.के. सिंह का कहना है कि अनिश्चितता बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर रुख करते हैं। फिलहाल करेंसी (currency) को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और भू-राजनीतिक स्थिति भी अस्पष्ट है। ऐसे में सोना और चांदी दोनों ही सुरक्षित निवेश के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिसमें अमेरिका (america) की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सबसे बड़ा सवाल: दुनिया अमेरिका को 37 ट्रिलियन डॉलर कैसे लौटाएगी?

अर्थशास्त्री सारथी आचार्य के अनुसार, इस समय दुनिया में बस एक ही बड़ा सवाल है और उसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। अमेरिका के पास भी यह स्पष्ट नहीं है कि दुनिया जब उससे 37 ट्रिलियन डॉलर का हिसाब मांगेगी, तो वह इसे कैसे चुकाएगा। उसके पास 37 ट्रिलियन डॉलर का डेफिसिट है, जो दुनिया के देशों के पास है।

कारोबारी डॉलर को लेकर सतर्क हैं और दुनिया में डॉलर की मांग घट रही है। डॉलर कमजोर हो रहा है, जबकि जापान का येन मजबूत (Japan's yen strengthens) हो रहा है और चीन अपनी मुद्रा को आगे बढ़ा रहा है। रूस चाहता है कि BRICS देशों के बीच लेनदेन स्थानीय मुद्राओं में हो। ऐसी परिस्थितियों के चलते अमेरिका से उसकी मुद्रा के बदले हिसाब मांगने का दबाव बढ़ रहा है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़े भू-चाल की स्थिति पैदा कर दी है।

डॉलर में कारोबार घटकर 50% पर आया-

दुनिया के कारोबार में लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर का दबदबा रहा, लेकिन अब इसका हिस्सा 70% से घटकर 50% रह गया है। यह अमेरिकी प्रशासन के लिए चिंता की बात है। वैश्विक अर्थव्यवस्था (global economy) गहरी दरारों से गुजर रही है, बॉन्ड्स की स्थिति कमजोर है और भरोसा टूट रहा है। वहीं, जापान का येन मजबूत हो रहा है और चीन की युआन मुद्रा (china yuan currency) भी ताकत दिखा रही है। अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच अस्थिर तालमेल ने स्थिति और जटिल बना दी है। इन सभी परिस्थितियों के चलते कई देश अपने सोने के भंडारण को मजबूत कर रहे हैं।

सोना-चांदी अभी इसी रफ्तार से बढ़ने की संभावना-

सोना और चांदी के दाम अभी इसी रफ्तार से बढ़ सकते हैं, और अगले साल तक यह तेजी बनी रहने की संभावना है। इसका मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान पर अमेरिका के हमले के बाद सोने-चांदी में बड़ी तेजी (Big rise in gold and silver) आ सकती है। इसके अलावा, ईरान के रास्ते मिलने वाले रूसी तेल (Russian Oil) पर असर पड़ने से क्रूड ऑयल के दाम भी बढ़ सकते हैं, जो सोना-चांदी की कीमतों को और ऊपर ले जा सकता है।

वैश्विक अनिश्चितता को देखकर कई देशों ने सोना और चांदी को संकट के समय सुरक्षित निवेश मानते हुए इसका भंडारण शुरू कर दिया है। वहीं, रूस अपना सोना बेच रहा है। नेशनल वेल्थ फंड (NWF) ने पिछले तीन वर्षों में अपने 71% सोने को बेच दिया है। ऐसा तेल और गैस से कमाई में गिरावट (Decline in oil and gas earnings) और यूक्रेन युद्ध के खर्च को पूरा करने के कारण किया गया। अब रूस के पास करीब 160 टन सोना बचा है, जो पहले 555 टन था।