Agricultre News : एक एकड़ में 550-700 क्विंटल गन्ने का होगा उत्पादन, 3 नई किस्में होगी तैयार
HR Breaking News (Agricultre News) : चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गन्ना किसानों के लिए तीन नई किस्में (ganne ki 3 nai kismen) विकसित की है। इनमें सीओएच-195 (COH-195), सीओएच-204 (COH-204) और सीओएच-205 (COH-205) शामिल है। इन किस्मों को हरियाणा की कृषि परिस्थितियों और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। फिलहाल तीनों किस्म का अंतिम चरण का परीक्षण चल रहा है। ट्रायल के नतीजे अनुकूल रहे तो अगले साल इन्हें किसानों के लिए जारी किया जा सकता है।
700 क्विंटल तक पहुंच सकती है प्रति एकड़ पैदावार
वैज्ञानिकों (Chaudhary Charan Singh Haryana Agricultural University news) ने बताया कि तीनों किस्मों में उत्पादन की क्षमता अलग-अलग है। सीओएच-195 से करीब 600 से 650 क्विंटल, सीओएच-204 से 650 से 700 क्विंटल और सीओएच-205 से 550 से 600 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों को मौजूदा किस्म के साथ अधिक उत्पादन क्षमता वाले नए विकल्प मिल सकेंगे।
अलग समय पर बिजाई की सुविधा
किसानों को (Agricultre latest News) बिजाई के समय के अनुसार विकल्प देने के लिए तीनों किस्मों की अवधि अलग रखी गई है। गन्ने की बिजाई 15 सितंबर से 15 अक्टूबर, 15 फरवरी से 15 मार्च और 15 अप्रैल से 15 मई के बीच की जा सकेगी। सीओएच-195 और सीओएच 204 मध्य पछेती श्रेणी की किस्म है, जबकि सीओएच-205 अगेती किस्म है। इससे किसान अपने क्षेत्र और फसल चक्र के अनुसार किस्म का चयन कर सकेंगे।
बेहतर चीनी रिकवरी के साथ इन बातों पर भी दिया गया ध्यान
वैज्ञानिकों ने नई किस्म (kheti badi ki khabre) को विकसित करते समय केवल पैदावार बढ़ाने पर ही ध्यान नहीं दिया। इसमें मजबूत जड़तंत्र विकसित करने के साथ रोगों के प्रति सहनशीलता और बेहतर चीनी रिकवरी को भी प्राथमिकता दी गई है। मजबूत जड़ों से पौधों के गिरने की संभावना कम होने की उम्मीद है। इससे फसल की मजबूती और खेत में उसके प्रदर्शन में बेहतर सुधार हो सकता है।
फाइनल ट्रायल किया जा रहा
एचएयू के वैज्ञानिक डॉ.सुधीर शर्मा ने बताया कि वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी नई किस्म को किसानों के लिए जारी करने से पहले अलग-अलग कृषि परिस्थितियों में उसका परीक्षण किया जाता है। तीनों किस्म का भी इसी प्रक्रिया के तहत फाइनल ट्रायल चल रहा है। प्रशिक्षण में उत्पादन चीनी रिकवरी रोग प्रतिरोधक क्षमता और पौधों की मजबूती जैसे पहलुओं का आकलन किया जा रहा है।