hrbreakingnews.com

Haryana में बढ़ी पराली की मांग, 400 तक पहुंचा रेट 

Haryana News : हरियाणा में पराली के अवशेषों के प्रबंधन के लिए अनेकों विकल्प आने के बाद किसानों की आय बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं। पराली की अब लगातार मांग बढ़ रही है मांग बढ़ने से एग्रीगेटर्स किसानों से शुल्क भी नही ले रहे। चलिए जानते हैं किन क्षेत्रों में बढ़ी है पराली की मांग। 
 
Haryana में बढ़ी पराली की मांग, 400 तक पहुंचा रेट 

HR Breaking News (Haryana News) : हरियाणा में पराली (prali ki khabr) अब किसानों के लिए खेत खाली (prali ke rate) करने की समस्या भर नहीं रह गई है। प्रबंधन के बढ़ते विकल्पों और  पराली की मांग ने कमाई के नए साधन में बदल दिया । खेत से निकलने वाली पराली बिजली उत्पादन, बायो फ्यूल गैस (bio fuel gas) और पशुचारे के काम आ रही है। इससे प्रदेश में करीब 200 करोड रुपए का कारोबार खड़ा हो चुका है। पराली को खेतों से उठाने, गांठ बनाने और प्लांट या दूसरे राज्यों तक पहुंचाने में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं।

200 एग्रीगेटर पराली सप्लाई के काम से जुड़े

प्रदेश में करीब 200 एग्रीगेटर पराली (parali ke kya rate h) को इकट्‌ठा करने और उसकी सप्लाई के काम से जुड़े हैं। इसके साथ ट्रैक्टर, ट्राली, बेलर और अन्य कृषि मशीनरी चलाने वाले करीब 1 हजार लोग सीधे इस काम में लगे हैं। परली की कटाई, गांठ बनने लोडिंग और परिवहन से बड़ी संख्या में मजदूरों व  ट्रांसपोर्टों को भी काम मिल रहा है। 

बायोफ्यूल प्लांट और बिजली तक पहुंच रही पराली

सिरसा में (sirsa news) पराली इकट्‌ठे करने वाले कृष्णा बताते हैं कि खेतों से पराली उठाकर करीब 25 किलो की गांठे तैयार हो जाती है। इसके बाद इन्हें गैस, बिजली और बायो फूल बनाने वाली इकाइयों तक भेजा जाता है। इससे इन प्लांट में पराली करीब 180 रुपये प्रती क्विंटल तक बिक रही है। इससे किसानों को आर्थिक फायदा मिल रहा है।

पशुचारे में काम आ रही पराली 

सर्दियों में पशुचारे के लिए पराली की मांग बढ़ जाती है। रोहतक के संदीप के अनुसार हरियाणा (haryana latest news) के अलावा मेवात, गुरुग्राम (gurugram news), दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बिजनौर सहित कई क्षेत्रों में पराली का चारा भेजा जा रहा है। इसकी कीमत करीब 350 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रही है। 

पराली की गांठ बनाने का नहीं लिया जाता शुल्क 

कुरुक्षेत्र (Kurukshetra news) के बजेगामा गांव के किसानों में अमीर सिंह बताते हैं कि पहले प्रलय खेत से हटवाना किसानों के लिए काफी खर्चीला काम था। फसल की अगली  बुवाई के लिए खेत को जल्दी खाली कराना पड़ता था। इसलिए पराली की गांठ बनने वाले प्रति एकड़ के हिसाब से करीब 500 रुपये तक लेते थे। मगर, अब यह स्थिति बदल गई है। पराली की मांग बढ़ने से इस सीजन में पराली की गांठ बनाने का कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा । 

बायोमास का लगातार बढता इस्तेमाल

इसके अलावा परली की बढ़ती मांग का एक कारण बिजली उत्पादन में बायोमास का बढ़ता इस्तेमाल भी है।  इस साल अगस्त तक ताप विद्युत संयंत्रों में पराली मिश्रित बायोमास की हिस्सेदारी 5.89 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह तय 5 प्रतिशत मानक से अधिक है। एनसीआर (NCR news) से बाहर हरियाणा में ईंट-भट़ठों में भी बायोमास का इस्तेमाल बढ़कर 21.9 प्रतशित तक पहुंच गया है। वहीं नवंबर से इसे 30 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा है। 

आने वाले में पराली का बड़ा बाजार खड़े होने की संभावना 

कृषि विभाग के सेवानिवृत अभियंता महेंद्र शर्मा (Mahendra Sharma, retired engineer of Agriculture Department) के अनुसार पहले प्रणाली का निस्तारण किसानों के लिए अतिरिक्त मेहनत और खर्चे वाला काम था। अब बायोफ्यूल गैस और बिजली संयंत्रों के साथ पशुचारे ने इसके उपयोग के रास्ते खोल दिए हैं। पिछले कुछ सालों में मांग बढ़ने के साथ पराली का कारोबार करीब 200 करोड रुपए तक पहुंचा है। आने वाले समय में इसको और बड़े बाजार के रूप में विकसित होने की संभावना है ।

एक्स सीटू प्रबंधन जैसे विकल्पों से बदली सोच

वहीं हरियाणा कृषि एंव किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार (Haryana Agriculture and Farmers Welfare Department Additional Chief Secretary Vijayendra Kumar) के अनुसार प्रणाली प्रबंधन को लेकर किसानों की सोच में बदलाव आया है। इसी वजह से खेतों में जलाने की बजाए पराली को खेत से बाहर उपयोग करने वाले एक्स सीटू (ex situ) विकल्पों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। 

पराली जलाने का पहला मामला आया सामने

यमुनानगर में सीजन (Yamunanagar news) में प्रराली जलाने का पहला मामला सामने आया है। थाना छप्पर क्षेत्र के मंधार गांव में खेत में पराली जलाने के आरोप में तीन सगे भाइयों हरजीत सिंह, ओंकार सिंह और अवतार सिंह के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। कृषि विभाग के निरीक्षक देवेंद्र चौधरी की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई है। 

दिल्ली के प्रदुषण के लिए पराली जलाना जिम्मेदार नहीं 

वहीं हरियाणा (latest news haryana) राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेवानिवृत वरिष्ठ वैज्ञानिक रणवीर राठी के अनुसार दिल्ली के प्रदूषण के पीछे कई कारण हो सकते हैं। उनके मुताबिक हरियाणा में पिछले साल पराली जलाने की घटनाएं काफी कम रही थी। उनका कहना है कि किसी स्थान पर पराली जलने से निकलने वाला धुआं सामान्य तौर पर सीमित क्षेत्र को प्रभावित करता है। इसमें प्रदूषण को केवल पराली से जोड़ने की बजाय अन्य स्रोतों को भी देखना जरूरी है। 

हर साल घट रहे पराली जलाने के मामले

विभाग के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार साल 2020 में पराली जलाने के 4202 मामले सामने आए थे। जिनपर विभाग की और से एफआईआर करवाई गई थी वहीं 2021 में 6987, 2022 में 3661, 2023 में 2303, 2024 में 1403, 2025 में 662 मामले पराली जलाने के सामने आए थे। जिनपर एफआईआर दर्ज की गई थी। आंकड़ों के हिसाब से हर साल पराली जलाने के मामले लगातार घट रहे हैं।