चावल, चीनी और कपास की कीमतों में बंपर तेजी
HR Breaking News (Rise In Food Products) दुनियाभर में खाद्य व कृषि उत्पादों की कीमतों (prices of food and agricultural products) में बढ़ौतरी देखने को मिल रही है। चीनी समेत कई चीजों के दामों में बंपर तेजी देखने को मिल रही है। इन दिनों चावल, चीनी और कपास के दाम उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे लोगों की जेब पर भार पड़ रहा है। खबर में जानिए चावल, चीनी और कपास की कीमतें क्या चल रही है।
कितनी बढ़ी कंटेनर की ढुलाई लागत
होर्मूज जलडमरूमध्य और लाल सागर में जारी गतिरोड की वजह से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है, जिससे जहाजरानी और माल ढुलाई की लागत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है, जिसकी वजह से कंटेनर की ढुलाई लागत (container shipping cost) $5000 से 55000$ तक बढ़ गई है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चावल, चीनी, कपास और खाद्य तेलों के दामों में इजाफा हुआ है, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ गया है।
कच्ची चीनी के वायदा भाव
कच्ची चीनी के वायदा भाव (raw sugar futures prices) अक्टूबर में तकरीबन 8 प्रतिशत बढ़े हैं और यह जुलाई में अपने नेचुरल स्तरों से लगभग 40 प्रतिशत ऊपर चल रहे हैं। प्रतिकूल मौसम की वजह से ब्राजील, भारत, थाईलैंड और यूरोपीय संघ जैसे चीनी उत्पादक इलाकों में उत्पादन 10 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक घट सकता है।
यूरोपीय संघ में 19 प्रतिशत और थाईलैंड में 17 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। अमेरिकी कृषि विभाग (US Department of Agriculture) के अनुसार भारत का चीनी उत्पादन 14 प्रतिशत से कम होकर 2.95 करोड़ टन रहने की संभावना है।
इंडस्ट्रियल एग्री कमोडिटीज में तेजी
इंडस्ट्रियल एग्री कमोडिटीज में भी तेजी देखी जा रही है। विश्व कृषि आपूर्ति और मांग अनुमान रिपोर्ट के मुताबिक इस वर्ष वैश्विक कपास उत्पादन कम होकर लगभग 2.58 करोड़ टन रह सकता है, जिससे कपास के भाव 2 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचे हैं, जिससे 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सख्त आपूर्ति और ढुलाई लागत भी बढ़ाने की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के दाम 2 साल के शीर्ष स्तर पर पहुंचे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के वायदा भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के वायदा भाव (International rice futures price) में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक का भारी इजाफा देखा गया है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक चावल उत्पादन में सालाना बेस पर 2.4 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक भारत में इस वर्ष चावल उत्पादन बीते वर्ष के 15.4 करोड़ टन की तुलना में लगभग 6.5 प्रतिशत कम होकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है।