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हरियाणा में तेजी से बढ़ रहा प्रदूषण, 269 पार पहुंचा एक्यूआई, 211 संस्थान बंद करने  के दिए निर्देश

Haryana AQI :  हरियाणा में प्रदूषण का स्तर अब बढ़ने लगा है। कई स्थानों पर एक्यूआई 269 पार कर चुका है। वहीं अब त्योहारी सीजन में ये और अधिक बढेगा। बढ़ते प्रदुषण को देखते हुए। प्रदे में 211 संस्थान बंद करने के निर्देश जारी हो चुके हैं। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।  
 
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HR Breaking News (Haryana AQI ) : हरियाणा में सर्दियों की आहट के साथ ही वायु प्रदूषण का असर बढ़ने लगा है। शनिवार को सोनीपत प्रदेश का सबसे प्रदूषित शहर रहा, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 269 दर्ज किया गया। बल्लभगढ़ में यह 232 और कुरुक्षेत्र में 230 तक पहुंच गया। इन तीनों शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब स्थिति में पहुंच गई है। वहीं, प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (Central Commission for Air Quality Management) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में नियमों का पालन नहीं करने वाली 211 औद्योगिक इकाइयों, निर्माण स्थलों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को बंद करने के निर्देश दिए हैं।

इन संस्थानों को बंद करने के निर्देश

आयोग की 23 अक्टूबर को जारी सूची में उद्योगों के साथ रियल एस्टेट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। पानीपत की वेंकी इंडिया लिमिटेड (Venky India Limited, Panipat) और सुपर वूलेन एंड टेक्सटाइल (Super Woollen And Textile), बागपत के रामा अस्पताल सहित नोएडा और गुरुग्राम (gurugram news) के कई निर्माण व शैक्षणिक प्रोजेक्ट कार्रवाई के दायरे में आए हैं। सोनीपत में भी कुछ औद्योगिक इकाइयों और नेशनल हाईवे स्थित गुलशन ढाबे को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और समितियों ने इन संस्थानों से अलग-अलग समय पर जरूरी दस्तावेज मांगे थे, लेकिन निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर क्लोजर डायरेक्शन जारी किए गए।

12 शहरों में एक्यूआई (AQI) 200 से नीचे

प्रदेश (haryana AQI) के 12 शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 200 से कम दर्ज किया गया। करनाल में  एक्यूआई 185, बहादुरगढ़ में 177, मानेसर में 172, अंबाला में 158, सिरसा में 153, यमुनानगर में 151 और जींद में 148 रहा। धारूहेड़ा में 144, फरीदाबाद में 126, नारनौल में 123, रोहतक में 122 और भिवानी में 101 एक्यूआई दर्ज किया गया।

पराली जलाने से रोकने के लिए बढ़ाई निगरानी

विभाग के आंकड़ों के अनुसार (haryana AQI NDEX) धान की 60 प्रतिशत से अधिक कटाई पूरी हो चुकी है। अब किसान गेहूं की बिजाई की तैयारी में जुटेंगे। ऐसे में खेतों में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकना प्रशासन के लिए अहम चुनौती है। कृषि विभाग ने नोडल अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। निगरानी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

अभी तक पराली जलाने के 12 मामले आए सामने 

प्रदेश में अब तक पराली जलाने के 12 मामले सामने आए हैं। इनमें दो किसानों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। विभाग के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस बार फसल अवशेष जलाने की घटनाएं काफी कम हैं।

12 जिलों में लगाए जाएंगे पीएम 2.5 सेंसर

हवा में मौजूद बारीक प्रदूषित कणों पर नजर रखने के लिए प्रदेश के 12 जिलों में पीएम 2.5 सेंसर (PM 2.5 sensor) लगाए जाएंगे। फतेहाबाद (Fatehabad AQI) में सबसे ज्यादा 33 सेंसर लगाने की योजना है। जींद में 15, सिरसा में 7, कैथल में 6, हिसार और कुरुक्षेत्र में 4-4 तथा करनाल में 3 सेंसर लगाए जाएंगे। इसके अलावा फरीदाबाद और रोहतक में 2-2, जबकि अंबाला, झज्जर और पलवल में एक-एक सेंसर स्थापित किया जाएगा।

उद्योगों से लेकर बिजली उत्पादन तक हो रहा फसल अवशेष का इस्तेमाल

फसल अवशेषों को जलाने के बजाय दूसरे कामों में खपाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उद्योगों के बॉयलर में 7.35 लाख मीट्रिक टन और बायोमास से बिजली उत्पादन में 6.68 लाख मीट्रिक टन फसल अवशेष का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट में 2.94 लाख मीट्रिक टन, ईंट भट्ठों में 2.75 लाख मीट्रिक टन और अन्य बायोमास को-जेनरेशन बिजली संयंत्रों में 0.97 लाख मीट्रिक टन अवशेष की खपत दर्ज की गई है। 2जी बायो-एथेनॉल (2G Bio-Ethanol) प्लांट में भी 0.21 लाख मीट्रिक टन फसल अवशेष का इस्तेमाल किया जा