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Haryana इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 की 18 योजनाएं मंजूर, 5,305.89  करोड़ रुपये होंगे खर्च

Haryana News : हरियाणा में निवेश व उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मेक इन Haryana इंडिस्ट्रियल पॉलिसी 2026 की 18 पॉलिसी को मंजूरी मिली है। इनके लिए 5,305.89 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से-

 

HR Breaking News (Haryana News) : हरियाणा सरकार ने प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने एमएसएमई (MSME) को मजबूत करने और कृषि आधारित उद्योगों को विस्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सीएम नायब सिंह सैनी (CM Nayab Singh Saini) की अध्यक्षता में बुधवार को हुई स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी की बैठक में तीन नई औद्योगिक नीतियों से जुड़ी योजना को मंजूरी दी गई। इनमें मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 (Make in Haryana Industrial Policy 2026) की 18 योजनाएं शामिल है। उनके लिए शुरुआती 5 वर्षों में करीब 5305.89 करोड रुपए खर्च होने का अनुमान है।

 

अगले 5 सालों में इतना निवेश करने का लक्ष्य

 

सरकार (haryana latest news) ने इस नीति के माध्यम से अगले 5 सालों में प्रदेश में 5 लाख करोड रुपए से अधिक का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही करीब 10 लाख नए रोजगार पैदा करने और राज्य से होने वाले वार्षिक माल निर्यात को बढ़ाकर 3. 24 लाख करोड़ रुपए तक ले जाने की योजना है। 

उद्योगों को प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने में नहीं होगी देरी

 

नई व्यवस्था (latest news haryana) के तहत कंपनियों को सरकारी प्रोत्साहन राशि प्राप्त के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। वैधानिक ऑडिटर और स्वतंत्र चार्टर्ड इंजीनियरिंग (Independent Chartered Engineering) की रिपोर्ट के आधार पर स्वीकृत प्रोत्साहन राशि का 50 प्रतिशत भुगतान 7 कार्य दिवस में किया जाएगा। इसके बाद विभागीय जांच और मौके के निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने पर शेष 50 प्रतिशत राशि अधिकतम 45 कार्यदिवस में जारी करने का प्रावधान किया गया है। वित्तीय वर्ष-2026 से सरकारी स्तर पर भुगतान में देरी होने की स्थिति में 8 प्रतिशत ब्याज देने की व्यवस्था भी रखी गई है।

एमएसएमई को निर्यात से लेकर बाजार तक सहायता 

 

प्रोग्रेसिव एमएसएमई (Progressive MSME) एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी (export promotion policy) में 6 प्रमुख क्षेत्रों के लिए 60 पहल तय की गई है।  सरकार का अनुमान है कि इनसे अगले पांच साल में 55 हजार करोड़ रुपए से अधिक निवेश आएगा और करीब 5 लाख रोजगार के अवसर बनेंगे। नई नीति में पहली बार विदेशी बाजार में कदम रखने वाली एमएसएमई की इकाइयों को भी सहायता देने का प्रावधान है। गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात ऋण, बीमा, परिवहन खर्च, ई-कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी जैसी गतिविधियों के लिए मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और फूड चेन पर असर 

एग्री बिजनेस एंड फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी (Food Processing Policy) के तहत 11 प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस क्षेत्र में 5,000 करोड रुपए से अधिक निजी निवेश और करीब 30,000 रोजगार के अवसर पैदा करने का लक्ष्य है। नीति के तहत कोल्ड चेन (cold chain), खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग और खेत से बाजार तक उत्पादन पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इससे किसान एफपीओ (kisan fpo), खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े इकाइयों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर रहेगा। निवेशको और इकाइयों की आवेदन से लेकर जांच और मंजूरी तक की प्रक्रिया सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन करने की व्यवस्था रहेगी।