हरियाणा में दान में मिली स्कूलों की जमीन का रिकॉर्ड खंगालेगी सरकार
Haryana News :प्रदेश के सरकारी स्कूलों की वो जमीन जो गांव के बच्चों को स्कूल उपलब्ध करवाने के लिए दान में दी गई थी। उन जमीनों का रिकॉर्ड अब सरकार खंगालेगी। सरकार की और से ये फैसला विवादों को रोकने के लिए लिया गया है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से।
HR Breaking News (Hisar News) : प्रदेश के सरकारी स्कूलों (haryana sarkari school news) में पढ़ने वाले बच्चों के लिए भवन तो बने हुए हैं। लेकिन इन भवनों के नीचे की जमीन किसके नाम दर्ज है इसका हिसाब शिक्षा विभाग जुटा रहा है। वहीं ग्रामीणों ने जमीन दान देकर स्कूल खुलवाया तो कहीं पंचायत ने अपनी जमीन पर स्कूल बनवाया। समय के साथ इन स्कूलों में पढ़ाई का सिलसिला आगे बढ़ता रहा। लेकिन जमीन का मालिकाना हक शिक्षा विभाग या सरकार के नाम दर्ज हुआ या नहीं इसकी पड़ताल की जा रही है।
7 अक्टूबबर को दिए गए निर्देश
निदेशालय माध्यमिक शिक्षा विभाग (Directorate of Secondary Education Department) के सभी जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से स्कूल व रिपोर्ट मांगी है। इसमें स्कूल का नाम व कोड उसके कब्जे में मौजूद जमीन का रकबा, राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज मालिक और जमीन से जुड़े अदालती मामलों का ब्यौरा देना होगा। यह प्रक्रिया 7 अक्टूबर 2026 को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में दिए गए निर्देशों के बाद शुरू की गई है।
बजट संबंधी प्रक्रिया में आती है परेशानी
विभाग का (haryana latest news) उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति पता लगाकर जरूरी दस्तावेज दुरुस्त करना और जहां मलिकाना हक हस्तांतरित होना बाकी है वह प्रक्रिया आगे बढ़ाना है। कई जगह पंचायत जमीन देने का प्रस्ताव पारित कर देती है लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में नाम बदलने की कार्रवाई वर्षों तक पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में भविष्य में जमीन पर दावे या विवाद सामने आने की आशंका रहती है। जमीन का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं होने से नए भवन और निर्माण और बजट संबंधी प्रक्रिया में भी परेशानी आ सकती है।
हिसार जिले के ये मामले
हिसार के ढ़ाणी प्रेम नगर (Dhani Prem Nagar) में तीन करनाल के करीब जमीन पर सरकारी मिडिल स्कूल संचालित हो रहा है। इस जमीन को गांव के एक परिवार के पूर्वजों ने स्कूल के लिए दान दिया था। बाद में दानदाता परिवार के चार वारिसों में से तीन भाइयों ने अपने हिस्से की जमीन पंचायत के नाम रजिस्ट्री करवा दी। जबकि चौथे वारिस ने अपने हिस्से पर मालिकसना हक जताते हुए अदालत का रूख कर लिया। स्कूल में पढ़ाई जारी है। लेकिन जमीन से जुड़ा मामला कानूनी प्रक्रिया में होने के कारण प्रशासनिक स्तर पर अड़चन बनी हुई है।
गांव बुगाना (bugana news) में परिवार ने स्कूल भवन बनाकर सौंपा
इसके उल्ट गांव बुगाना में दानदाता परिवार ने पूरा स्कूल भवन बनवाकर गांव और सरकार को सौंप दिया था। यहां जमीन को लेकर कोई कानूनी अड़चन सामने नहीं आई है। वही गांव पंघाल में राज्य के प्राथमिक और मिडिल स्कूल 32 कनाल और 7 मरले में जमीन पर बना हैं। यह जमीन फिलहाल पंचायत के नाम दर्ज और उसे शिक्षा विभाग के नाम करवाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
बरवाला ब्लॉक (barwala news) में 105 सरकारी स्कूलों की जमीन दर्ज नहीं
शिक्षा विभाग (siksha vibag news) से मिली जानकारी के अनुसार कई स्कूलों के जमीन संबंधी रिकार्ड में सुधार अपडेट की जरूरत है। बरवाला ब्लॉक में से 105 सरकारी स्कूलों की जमीन स्कूल के नाम पर दर्ज नहीं है। इनमें ज्यादातर जमीन पंचायत के नाम पर है। जबकि कुछ मामलों में राज्स्व रिकॉर्ड में सरकार का नाम दर्ज है। हालांकि जमीन स्कूल के नाम दर्ज नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि सभी मामलों में विवाद है। पंचायत के नाम दर्ज जमीन पर भी सरकारी स्कूल संचालित हो सकते हैं।
जानकारी जल्दी अपडेट करने के निर्देश
हिसार जिले (hisar news) में कुल 592 सरकारी हैं। स्कूल इनमें से 400 से अधिक स्कूलों की रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। जबकि बाकी स्कूलों का ब्यौरा अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में डेढ़ सौ से ज्यादा स्कूलों का रिकॉर्ड अभी लंबित है। विभाग ने अधिकारियों को जानकारी जल्द पूरी करने के लिए कहा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रिपोर्ट में जमीन के मालिक की श्रेणी भी स्पष्ट करनी होगी। इसके लिए स्कूल या शिक्षा विभाग अन्य सरकारी विभाग और नीचे मलिक के अलग-अलग विकल्प रखे गए हैं।