हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 1947 से कब्जे का दावा किया खारिज, अब खाली करनी होगी निगम की जमीन
HR Breaking News (High Court decision) हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी जमीन पर दशकों तक कब्जा बनाए रखने से कोई उस जमीन का मालिक नहीं बन जाता है। अब इसको लेकर हाईकोर्ट (High Court decision) ने स्पष्टीकरण दिया है कि 1947 से कब्जे का दावा खारिज कर दिया गया है। अब निगम की जमीन पर अवैध कब्जे को खाली करने के आदेश जारी किए गए हैं। खबर में जानिए इस बारे में विस्तार से-
सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जे का अधिकार
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने स्पष्ट किया है कि सरकारी या फिर सार्वजनिक जमीन पर दशकों तक कब्जा बनाए रखने से किसी व्यक्ति को उसका मालिकआना हक नहीं मिल जाता है। वैध स्वामित्व या कानूनी परमिशन के बिना सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जे का अधिकार (right to public property) नहीं मिलता है।
निगम की जमीन पर अवैध कब्जा
हाई कोर्ट ने गुरुग्राम में नगर निगम की जमीन (municipal land) पर लंबे समय से रह रहे लोगों की अपील को खारिज किया और स्पष्ट किया है। अदालत ने स्पष्टीकरण दिया है कि निगम की जमीन पर अवैध कब्जा (Illegal occupation of corporation land) बनाए रखने का दावा स्वीकार नहीं होगा। जस्टिस सुवीर सहगल और जस्टिस राजेश गौड़ की खंडपीठ ने सोदान सिंह और अन्य अपील को खारिज किया है।
अलॉट प्लॉट का आधिकारिक भौतिक कब्जा
अपीलकर्ताओं ने एकलपीठ के 6 जुलाई 2026 के फैसले को चुनौती दी थी। एकल पीठ की ओर से उनके खिलाफ बेदखली की कार्रवाई सही कहा। जमीन का कुछ भाग साल 1976 में नाई समाज के सदस्यों को अलोट किया गया था। अपीलकर्ताओं ने दावा किया था कि वह साल 1947 से इस जमीन पर लगातार रह रहे हैं और उन्होंने वहां आवासीय मकान भी बनाए हैं।
उनका कहना था कि लंबे समय से शांतिपूर्ण कब्जे की वजह से उन्हें बेदखल नहीं किया जा सकता है। हालांकि नाई समाज को अलोट प्लॉट का आधिकारिक भौतिक कब्जा (physical possession of allot plot) नहीं मिल पाया था। नगर निगम (Municipal council) ने साल 2016 में अपीलकर्ताओं को बेदखली के नोटिस जारी कर दिए थे।