उत्तराखंड में अब लाई जाएगी लैंड परचेज पॉलिसी, जमीन अधिग्रहण का मिलेगा ज्यादा मुआवजा

Land Purchase Policy : सरकारी योजनाओं को पूरा करने में जमीनों की कमी सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। इस समस्या समाधान करने के लिए उत्तराखंड में लैंड परचेज पॉलिसी लाई जाएगी। इस नई लैंड परचेज पॉलिसी के तहत जमीन अधिग्रहण का ज्यादा मुआवजा मिलेगा। चलिए खबर के माध्यम से जानते हैं उत्तराखंड में शुरू होने वाली इस नई पॉलिसी के बारे में विस्तार से
 

HR Breaking News : (Land Purchase Policy) देश के विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए सरकार की तरफ से लगातार नए- नए प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है। सरकारी योजनाओं को पूरा करने में जमीन की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। ऐसे में उत्तराखंड सरकार अब सरकारी योजनाओं में आने वाली जमीन की कमी को दूर करने के लिए नई लैंड परचेज पॉलिसी लेकर आ रही है, जिसमें जमीन अधिग्रहण के लंबे प्रोसेस के बजाय सीधे मोलभाव करके ग्रामीणों को अधिक मुआवजा दिया जाएगा।


जमीन अधिग्रहण की बड़ी प्रक्रिया (Land acquisition process) से बचने के लिए उत्तराखंड सरकार लैंड परचेज पॉलिसी पर तेजी से कार्य कर रही है। जल्द ही इस नई पॉलिसी को कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जाएगा। लैंड परचेज पॉलिसी के तहत लोगों को जमीन के बदले अधिक मुआवजा दिया जाएगा।
 

 

नई लैंड परचेज पॉलिसी 


सरकारी प्रोजेक्ट्स (Government projects) को पूरा करने के लिए जमीनों की काफी ज्यादा कमी आती जा रही है। जमीन अधिग्रहण के लंबे प्रोसेस की वजह से प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में काफी समय लग जाता है अन्यथा कई बार योजनाएं अटक के भी रह जाती है। अब सरकार इस समस्या से दूरी बनाने के लिए नई लैंड परचेज पॉलिसी (New land purchase policy) पर तेजी से काम कर रही है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि अगली कैबिनेट में लैंड परचेज पॉलिसी को मंजूरी के लिए रखा जाए।


4 गुना मिल सकता है मुआवजा


अधिग्रहण पॉलिसी (Acquisition Policy) में अभी सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा मिलता है, लेकिन नई लैंड परचेज पॉलिसी में आम लोगों को जमीन का सही और अधिक भाव मिलेगा। इसमें मोलभाव कर जमीन खरीदी जाएगी और मजबूत प्रावधान किए जाएंगे। पॉलिसी को आकर्षक बनाने के लिए सरकार की तरफ से पूरा फोकस है। 


राजस्व सचिव एसएन पांडेय के मुताबिक, फिलहाल जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया (Land acquisition process) लंबी और जटिल है, जिससे योजनाएं लटक जाती हैं और लागत बढ़ जाती है। इसलिए लैंड परचेज पॉलिसी को दुसरे विकल्प के तौर पर तैयार किया जा रहा है।