Railway News : अब घर बैठे मिलेगा रेलवे का क्लेम, जानें पूरा प्रोसेस, हो गया बिल्कुल आसान
Railway News : रेल यात्रियों के लिए रेलवे क्लेम अब घर बैठे ही आसान हो गया है। रेल हादसा, चोट, मौत या सामान के नुकसान की स्थिति में मुआवजा पाने के लिए बार-बार आरसीटी बेंच (RCT Bench) जाने की जरूरत नहीं होगी। इस सिस्टम के जरिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध होगी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई भी संभव होगी... आइए नीचे खबर में जान लेते है इसका पूरा प्रोसेस-
HR Breaking News, Digital Desk- (Railway) रेल यात्रियों के लिए मुआवजा प्राप्त करना अब पहले से कहीं आसान हो जाएगा। रेल हादसा, चोट, मौत या सामान के नुकसान की स्थिति में मुआवजा (compensation) लेने के लिए बार-बार रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (RCT) की बेंच में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। ई-आरसीटी सिस्टम के माध्यम से देशभर की सभी 23 बेंच ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ी जाएंगी।
यात्री या उनके परिजन रात-दिन कभी भी घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से क्लेम (Claim from mobile or computer) पाने का दावा कर सकेंगे। जरूरी दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे। प्रत्येक अपडेट की जानकारी एसएमएस और ई-मेल से मिलेगी।
RCT की पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल-
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Railway Minister Ashwini Vaishnav) ने 52 हफ्ते-52 सुधार अभियान के तहत गुरुवार को दो बड़े सुधारों की घोषणा की। पहला, आरसीटी की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल किया जाएगा। दूसरा, रेल टेक पॉलिसी के जरिए स्टार्टअप और नवाचार करने वालों को सीधे रेलवे से जोड़ा जाएगा। इससे पहले यात्रियों को यह तय करना मुश्किल होता था कि घटना किसी एक राज्य में हुई और यात्री दूसरे राज्य का होने पर केस कहां दायर करें।
पहले सुनवाई की तारीख जानने, दस्तावेज जमा करने और आदेश की प्रति लेने में समय और पैसा दोनों खर्च होते थे। नई डिजिटल व्यवस्था में केस की पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी और जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (video conferncing) के जरिए सुनवाई में शामिल होने की सुविधा भी मिलेगी। इससे यात्रा और वकील पर होने वाला अतिरिक्त खर्च कम होगा।
ऑटोमैटिक नोटिस सिस्टम से मामलों का निपटारा होगा तेज-
रेलमंत्री का कहना है कि ई-फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड (digital record) और ऑटोमैटिक नोटिस सिस्टम के जरिए मामलों का निपटारा तेज होगा। फाइलें खोने या देरी की समस्याएं कम होंगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी। आदेश और फैसले भी ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।
‘रेल टेक पॉलिसी’-
दूसरा बड़ा सुधार ‘रेल टेक पॉलिसी’ (Rail Tech Policy) है। इसके तहत कोई भी स्टार्टअप, शोध संस्थान या उद्योग रेलवे से जुड़े किसी भी मुद्दे पर अपना समाधान प्रस्तावित कर सकता है। पहले की नीति में रेलवे (railway) ही समस्या निर्धारित करता था और उसी पर समाधान मांगे जाते थे। अब कोई भी व्यक्ति या संस्था सुरक्षा, रखरखाव, यात्री सुविधा या संचालन से जुड़े किसी भी क्षेत्र में नई तकनीक का सुझाव दे सकती है।
प्रस्ताव आने पर संबंधित विभाग उसकी उपयोगिता और व्यवहारिकता की जांच करेगा। मंजूरी मिलने पर पायलट प्रोजेक्ट (pilot project) चलाया जाएगा। सफल होने पर लागू किया जाएगा। इसके लिए अलग बजट नहीं होगा। जिस विभाग से संबंधित प्रस्ताव होगा, उसी के बजट से खर्च किया जाएगा।
नई नीति के तहत एआई आधारित हाथी घुसपैठ पहचान प्रणाली (AI based elephant intrusion detection system), कोच में आग का तुरंत पता लगाने वाली तकनीक, ड्रोन से टूटी पटरी (track broken by drone) की जांच और रेल ट्रैक पर तनाव की निगरानी जैसी पहलें प्रोत्साहित की जाएंगी। इससे हादसों में कमी आएगी और सुरक्षा में सुधार होगा।