Railway Projects : 35 हजार करोड़ से ज्यादा के 15 प्रोजेक्ट पर रेलवे का फोकस, भूमि अधिग्रहण रेलवे द्वारा करना प्रस्तावित

Indian Railway Projects : भारतीय रेलवे लगातार विकास के कार्यों में प्रगति दिखा रहा है। अब रेलवे की तरफ से 2028 के मार्च महीने तक 35800 करोड़ रुपए के 15 प्रोजेक्ट्स पर  काम किया जाना है, जिसके लिए कंपनी और रेलवे के नियमों में कुछ बड़ा बदलाव होने वाला है। भारतीय रेलवे की तरफ से जमीन अधिग्रहण का काम किया जाएगा।

 

HR Breaking News (Railway News) रेलवे की तरफ से लगातार डेवलपमेंट का कार्य किया जा रहा है। दुनिया में भारतीय रेलवे का नेटवर्क सबसे बड़े नेटवर्कों में से एक है। देश के करोड़ों लोग ट्रेन से सफर करते हैं, साथ में माल ढुलाई के लिए भी ट्रेन एक अच्छा विकल्प है। देश को एक कोने से दूसरे कोने तक जोड़ने का काम रेलवे (Railway New Projects) ही करता है। रेलवे के ढांचे को लगातार मजबूत बनाया जा रहा है। 

 

 

पीपीपी मॉडल में किया जा सकता है बदलाव 


भारतीय रेलवे (Indian Railways) की तरफ से पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप की पॉलिसी में बदलाव किया जा सकता है। इसको लेकर सुझाव आया है। अब कंसेशन का समय बढ़ाकर 50 साल किया जा सकता है। अधिकतर मामलों में यह 20 से 35 साल तक का हो सकता है। इस नीति को प्राइवेट कंपनियों के लिए और ज्यादा आकर्षक बनाया जा सकता है। 

भूमि अधिग्रहण की पूरी जिम्मेदारी सरकार की 


अब नियमों में बदलाव करके भूमि अधिग्रहण (Land acquisition) की पूरी जिम्मेदारी रेलवे यानी सरकार की रह सकती है। रेलवे करीब एक दशक से पीपीपी मॉडल पर काम कर रही है। अब इसमें बदलाव किया जा सकता है। बदलाव का प्रमुख लक्ष्य निजी कंपनियों को इस पॉलिसी के प्रति आकर्षित करना है। फिलहाल बदलाव का प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसके अनुसार कंसेशन पीरियड को 50 साल किए जाने की संभावना है। 

क्यों जरूरी है नई पॉलिसी 


इस नई पॉलिसी (PPP) के बारे में अधिकारियों की तरफ से भी जवाब दिया गया है। अधिकारियों का मानना है कि मार्च 2028 तक रेलवे 35800 करोड़ रुपए की 15 प्रोजेक्ट्स पर कार्य कर रही है, जो यह प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत विकसित किए जाने हैं। इसमें नई रेल लाइन बिछाना, पुरानी रेल लाइन का दोहरीकरण करना और स्टेशनों का डेवलपमेंट आदि शामिल है। 

2012 की पॉलिसी के तहत बनाए जा रहे प्रोजेक्ट 


फिलहाल 2012 की पॉलिसी के तहत प्रोजेक्ट (PPP Project) बनाए जा रहे हैं, जिसमें कंसेशन पीरियड 20 से 35 साल के बीच है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट फाइनल अप्रूवल के लिए भेजे गए हैं। दो अहम बदलाव से सारे जोखिमों का समाधान हो सकता है। 

अब तक क्या हुई प्रोग्रेस 


इस मॉडल के तहत दिसंबर 2025 तक 16686 करोड़ रुपए के 18 प्रोजेक्ट पूरे हुए हैं। 16362 करोड़ रुपए के साथ प्रोजेक्ट पर फिलहाल काम चल रहा है। इसमें कॉल कनेक्टिविटी और पोर्ट कनेक्टिविटी के प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार मौजूदा पॉलिसी के तहत भूमि अधिग्रहण (Land acquisition) की लागत निजी कंपनी और स्पेशल प्रपज भी वहन करती है और रेलवे केवल भूमि अधिग्रहण कराती है। 

अब पीपीपी मॉडल के तहत फाइनल अप्रूवल के लिए कुछ प्रोजेक्ट भेजे गए हैं। इसमें अहम बदलाव के लिए भी मांग की गई है। प्रस्तावित बदलाव के तहत भूमि अधिग्रहण की लागत और जमीन लेने की प्रक्रिया को पूरी तरह से रेलवे के जिम्मे में किया जाना है। अक्सर भूमि अधिग्रहण न होने के कारण प्रोजेक्ट रुक जाता है।

ज्यादातर हाईवे के निर्माण में भी ऐसा देखने को मिलता है। इसी को देखते हुए नीति में बदलाव करने का प्रस्ताव आया है। इसकी शुरुआत हो चुकी है। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से गति शक्ति मल्टी मॉडल कार्गो टर्मिनल के लिए 50 साल के कंसेशन पीरियड की घोषणा हो चुकी है।