Railways : 4 साल पहले पूरी होनी थी रेलवे की यह परियोजना, 3035 करोड़ का प्रोजेक्ट अब जल्द होगा पूरा
HR Breaking News (Railways Projects)। रेलवे की कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए ओर यात्रियों के सफर को आसान बनाने के लिए रेलवे की ओर से कई परियोजनाएं (Government Project) जाती है। अब रेलवे की जो परियोजना 4 साल पहले पूरी की जानी थी, वो अब जाकर पूरी होगी, क्योंकि अब इस प्रोजेक्ट पर काम तेज कर दिया गया है। इस प्रोजेक्ट की लागत 3035 करोड़ रुपये आंकी गई है। आइए विस्तार से जानते हैं इस बारे में डिटेल में
कब तक पूरा होगा रेलमार्ग के निर्माण का काम
सरकार की ओर से राजस्थान को एमपी से सीधी रेल कनेक्टिविटी देने वाले रामगंजमंडी-भोपाल रेलमार्ग (Ramganj Mandi-Bhopal railway line) के निर्माण का काम इस साल अक्टूबर तक पूरा किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट पर कोटा और भोपाल रेल मंडलों की तरफ से काम तेजी से किया जा रहा है। बता दें कि कोटा रेल मंडल की सीमा में राजस्थान तक का का काम पूरा होने को है, जबकि मध्यप्रदेश में भूमि अधिग्रहण का प्रोसेस पूरा होते ही निर्माण के काम ने तेजी पकड़ ली है।
मार्च महिने में ट्रायल रन के लिए तैयार होगा रेल ट्रैक
रेलवे अधिकारियों (Rajasthan Government Project) का कहना है कि मार्च महिने तक ट्रायल रन के लिए खिलचीपुर से राजगढ़, ब्यावरा और सोनकच्छ तक रेल ट्रैक बना लिया जाएगा, जिसमे लगभग 3035 करोड़ रुपये की लागत आएगी। रेलवे के इस प्रोजेक्ट में भोपाल रेल मंडल की तरफ से खिलचीपुर से ब्यावरा तक का काम पूरा होने को है और इसे मार्च तक पूरा करने का प्लान है। वहीं, कोटा रेल मंडल की तरफ से खिलचीपुर से आगे लगभग 12 किलोमीटर तक पटरियां भी बिछा दी गई है।
ब्यावरा-राजगढ़ सेक्शन में भी बिछेगी ट्रैक
इसके साथ ही प्रशासन (railway lines in Rajasthan ) की ओर से ब्यावरा-राजगढ़ सेक्शन में भी ट्रैक बिछाने के लिए काम की शुरुआत कर दी गई है, जिसके तहत अब भोपाल रेल मंडल द्वारा राजगढ़, ब्यावरा और सोनकच्छ तक मार्च महीने तक ट्रायल रन के लिए ट्रैक बिछा दिया जाएगा। अब ट्रेक बिछाए जाने के बाद सोनकच्छ से नरसिंहगढ़ और कुरावर तक का काम बाकी रहेगा, जिसे इस साल अकटूबर तक पूरा किया जाएगा।
किस वजह से 4 साल पीछे चल रही परियोजना
एमपी में भूमि अधिग्रहण में जो देरी हुई है, उसके चलते यह परियोजना (railway lines in Rajasthan ) तय समय से लगभग चार साल पीछे चल रही है। सबसे पहले तो इस प्रोजेक्ट को साल 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन भूमि अधिग्रहण में परेशानियों के चलते इस प्रोजेकट में कार्य में देरी हुई है। अभी वर्तमन में तो नरसिंहगढ़ के एक सेक्शन को छोड बाकी सभी हिस्सों में अर्थवर्क का काम पूरा किया गया है और बाकी हिस्सों में ट्रैक बिछाने और विद्युतीकरण का काम अभी चल रहा है।
एमपी में कुल छह स्टेशन है प्रस्तावित
इस रेलमार्ग की शुरुआत के बाद एमपी में कुल छह स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। इन स्टेशन में राजस्थान (Rajasthan to Madhya Pradesh railway line ) की सीमा से रामगंजमंडी और खिलचीपुर के साथ ही मध्यप्रदेश में भोजपुर, राजगढ़, ब्यावरा जंक्शन, नरसिंहगढ़ और कुरावर स्टेशन का नाम शामिल है। उसके बाद यह लाइन श्यामपुर से होकर के हिरदाराम नगर और भोपाल रेलवे लाइन से कनेक्ट हो जाएगी।
मार्च तक रेलमार्ग का इतना काम होगा पूरा
भोपाल रेल मंडल (Bhopal Railway Division) के डीआरएम का कहना है कि मार्च तक ब्यावरा से सोनकच्छ तक ट्रायल ट्रैक बिछा दिया जाएगा। ब ता दें कि इस सेक्शन में अर्थवर्क का काम पूरा होने को हैं और पटरियां बिछाने के साथ-साथ विद्युतीकरण का काम भी तेजी से चल रहा है। मार्च तक इस हिस्से का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा होगा और उसके बाद सिर्फ एक सेक्शन का काम ही बाकी रहेगा, जिसे भी अक्टूबर तक पूरा करने का मकसद है।
वहीं, कोटा रेल मंडल (Kota Railway Division) के ट्रैक इंजीनियर का कहना है कि राजगढ़ से ब्यावरा के बीच ट्रैक और खिलचीपुर से राजगढ़ के बीच कुछ हिस्से का काम भी मार्च तक पूरा करने का मकसद रखा गया है।