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1 साल में 20% बढ़ी खाद्य तेल की कीमतें, अभी ओर बढ़ेंगे दाम

edible oil prices :खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ौतरी के प्रभाव से अब आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार एक साल में खाद्य तेल की कीमतें (edible oil prices) 20% बढ़ गई है। अनुमान है कि आगामी समय में खाद्य तेल की कीमतों में ओर इजाफा हो सकता है। कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सरकार की ओर से पाम तेल इंपोर्ट शुल्क में कटौती की है। खबर में जानिए इस बारे में-
 

HR Breaking News (edible oil prices) बीते कुछ समय से खाद्य तेल की कीमतों में खूब बढ़ौतरी देखने को मिल रही है। बीते 1 साल में खाद्य तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि आगामी समय में अभी खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ौतरी की संभावना है। खबर में जानिए अभी खाद्य तेल की कीमतें क्या चल रही है। 

बायोफ्यूल बनाने में हो रहा वनस्पति तेल का यूज 


पश्चिम एशिया के साथ रूस-यूक्रेन संकट की वजह से कच्चे तेल (edible oil Ke Rate) के दाम ही नहीं, बल्कि खाद्य तेल की कीमतों (Kyu Badhe edible oil Ke Price) में भी बढ़ोतरी हो सकती है। काउंसिल आफ पाम ऑयल प्रोड्यूजिंग कंट्रीज के अनुसार अब 27 प्रतिशत वनस्पति तेल का यूज बायोफ्यूल बनाने में किया जा रहा है, जिनमें मुख्य तौर पर पाम और सोयाबीन का नाम शामिल है। बीते 1 साल में खाद्य तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है।

 

खाद्य तेल के साथ इन गुड्स की बढ़ेगी लागत


वनस्पति तेल के दाम (vegetable oil prices) बढ़ने से खाद्य तेल के साथ ही साबुन, तेल, टूथपेस्ट, बिस्कुट और अन्य FMCG गुड्स की लागत में भी बढ़ोतरी होती है, क्योंकि इनमें भी पाम आयल का यूज होता है।


 खाद्य तेल के दाम को कंट्रोल में करने के लिए गत सितंबर महीने में सरकार की ओर से पाम तेल के इंपोर्ट पर लगने वाले शुल्क (Duty on palm oil imports) में कटौती तक कर दी गई है। पश्चिम एशिया संकट का हल नहीं निकलने और वैश्विक उथल-पुथल के नए आयाम पर गौर करते हुए पाम व सोयाबीन के बड़े उत्पादक देश ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगे हैं।

 

युद्ध से पहले कच्चे तेल के कीमत 


ईरान-अमेरिका युद्ध से पहले कच्चे तेल के कीमत (price of crude oil) 65 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इसलिए खाद्य तेल से जुड़े पाम तेल और सोयाबीन का यूज अब बायोडीजल और बायोफ्यूल में बनाने में किया जा रहा है। कच्चे तेल के बढ़ते दामों पर गौर करते हुए इंडोनेशिया की ओर से b-50 नियम लागू किया है। यानी वहां पेट्रोल डीजल में 50 प्रतिशत बायोफ्यूल मिलाया जाने वाला है, जिससे इंडोनेशिया को कच्चे तेल के इंपोर्ट में खर्च होने वाले लगभग 8 अरब डॉलर की बचत हो सकेगी।

कौन सा है पाम का बड़ा उत्पादक देश 


पाम का बड़ा उत्पादक देश (Major palm producing countries) इंडोनेशिया है और भारत सबसे अधिक तेल की खरीदी इंडोनेशिया से ही करता है। इसके बाद भारत को पाम तेल सप्लाई करने वाले दूसरे देश मलेशिया की ओर से साल 2030 तक पेट्रोल डीजल में 30 प्रतिशत तक का बायोफ्यूल मिलाने का मकसद तय किया है। ऐसे में वहां से भी पाम तेल की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। ब्राजील और अर्जेंटीना सोयाबीन के बड़े उत्पादक देश है और यहां सोयाबीन से बायोफ्यूल बनाया जा रहा है।

बायोफ्यूल बनाने में सोयाबीन और मक्के का यूज 


ब्राजील तो 100 प्रतिशत तक बायोफ्यूल का यूज (Use of biofuel) कर रहा है। अमेरिका की ओर से भी बायोफ्यूल बनाने में सोयाबीन और मक्के का यूज बढ़ा दिया है। जानकारी के अनुसार जिन देशों के पास पाम, सोयाबीन या फिर मक्का जैसे कच्चे माल है, उनके लिए बायोफ्यूल पेट्रोल-डीजल का ऑप्शन बेहद सस्ता है और सही विकल्प है। भारत भी मक्के से एथनाल बनाकर पेट्रोल में यूज कर रहा है।

भारत में सोयाबीन का उत्पादन 


काउंसिल फॉर पाम ऑयल प्रोड्यूजिंग कंट्रीज अक्टूबर के आखिर में चीन में बैठक करने वाला है, जहां पर बायोफ्यूल बनाने में खाद्य तेल के बढ़ते यूज  (Use of edible oil to make biofuel) पर सोच विचार होगा। जानकारी के अनुसार इस बार भारत में सोयाबीन का उत्पादन भी बेहद कम है। उम्मीद है कि भारत नवंबर से शुरू होने वाले तेल सीजन में लगभग 56 लाख टन सोयाबीन तेल का इंपोर्ट करेगा। करंट सीजन में भारत 155 लाख टन वनस्पति तेल का इंपोर्ट कर चुका है। पाम और सोयाबीन तेल महंगा (Palm and soybean oil are expensive) होने से अन्य खाद्य तेल के दाम में बाढ़ बढ़ौतरी हो जाती है।