Gold Price : साल 2026 में सोना देगा तगड़ा रिटर्न, ये हैं 5 कारण

Gold Price : नए साल की शुरुआत हो गई है और बीते वर्ष सोने की कीमतों में ताबड़तोड़ तेजी देखने को मिली है। बीते वर्ष सोने की बढ़ती कीमतों (Gold Price Outlook) ने इन्वेस्टर्स को बंपर रिटर्न दिया है। अब हाल ही में 2026 में भी सोने की कीमतों को लेकर एक्सपर्ट ने अपनी राय दी है। बताया जा रहा है कि इस साल सोने की कीमतों में 5 कारणों के चलते निवेशकों को बंपर रिटर्न मिल सकता है। 
 

HR Breaking News (Gold Price) सोने की कीमतों में सारा साल तेजी देखी जाती है। बीते साल 2025 में भी सोने की कीमतों ने दमदार रिटर्न दिया है। अब हाल ही में एक्सपर्ट ने भी सोने से जुड़ी जानकारी साझा की है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस साल 2026 में भी सोने (Gold Price Updates) में निवेश से इन्वेस्टर्स को बंपर रिटर्न मिलने वाला है। आइए खबर के माध्यम से जानते हैं कि इस साल 2026 मेंद सोने की कीमतें क्या रह सकती है।

 

 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड के भाव 
 

घरेलू बाजार में तो सोने की कीमतों में तेजी बनी हुई है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड के भाव  (Gold prices in international market)  29 दिसंबर को $4,550.10 प्रति औंस के हाई लेवल पर पहुंच गया था। यह साल की शुरुआत के $2,638.74 के मुकाबले लगभग 42 प्रतिशत का रिटर्न है। MCX पर भी सोने की कीमतों में उछाल आया है। MCX पर 24 दिसंबर 2024 को सोना (Gold Rate On MCX) 78,950 रुपये से बढ़कर 29 दिसंबर 2025 को 1,38,217 रुपये पर कारोबार कर रहा था। यानी एक साल में सोने की कीमतों में 75 प्रतिशत की बढ़त हुई है।

दुनिया का सबसे कीमती एसेट बना सोना 
 

मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से देखें तो इस ताबड़तोड़ बढ़ौतरी के बाद इस समय में सोना (Gold Prices)  दुनिया का सबसे कीमती एसेट बनी हुई है। कुल मार्केट कैप देखें तो इसका कुल मार्केट कैप लगभग $30.48 ट्रिलियन आंका गया है। 

किन खास फैक्टर से तय होंगे सोने के रेट 
 

एक्सपर्ट का कहना है कि इस साल कई चीजों पर निर्भर करेंगी। इन चीजों में ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम (Global Financial System) की स्थिरता, भरोसे और मजबूती से जुड़ी चिंताए आदि शामिल है। उनका कहना है कि इस साल सोने की कीमतें कुछ खास फैक्टर से तय की जाएंगी। इन फैक्टर में ब्याज दरों का चक्र शामिल है, जिसमे रियल इंटरेस्ट रेट्स नीचे आने पर सोने की लागत में कमी आएगी और मांग में इजाफा होगा। 

इसके साथ ही करेंसी की वैल्यू घटने का डर इन्वेस्टर्स को सोने की ओर खींच सकता है। वहीं, अगर बढ़ते फिस्कल डेफिसिट से फिएट करेंसी पर भरोसा कमजोर होता है तो इससे गोल्ड की कीमतों (Gold Rates) में लॉन्ग टर्म वैल्यू स्टोर के रूप में मजबूती आती है। वहीं, भू-राजनीतिक तनाव के चलते भी सोने की मांग में मजबूती आती है।


ब्याज दरों का सोने की कीमतों पर असर 
 

सेंट्रल बैंकों के फैसलों का असर 2026 में सोने की कीमतों (Gold prices in 2026) पर पड़ सकता है। अगर ब्याज दरों में कमी आती है या फिर ब्याज दरों लॉन्ग टर्म तक स्थिर रहती है तो रियल यील्ड कम होने के साथ ही गोल्ड ज्यादा अट्रेक्टिव बनेगा। एक्सपर्ट का कहना है कि अगर लिक्विडिटी बढ़ती है तो इससे करेंसी कमजोर होने का निवेशकों का डर बढ़ेगा, जिसका असर सोने की मांग पर पड़ेगा। हालांकि, अगर रियल रेट्स में तेजी रहती हैं और महंगाई को रोकने में सख्त नीति रहती है, तो इससे सोने की कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है।

2026 में किस धातू पर मिलेगा भरोसेमंद रिटर्न 
 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस साल 2026 में चांदी के मुकाबले सोने से ज्यादा रिटर्न (Gold Return) मिल सकता है। सोना अनिश्चित हालात में एक डिफेंसिव एसेट के तौर पर काम करता है। हम आपको एक उदाहरण से समझाते हैं। जैसे कि चांदी में इंडस्ट्रियल डिमांड के चलते इसमे तेजी जल्दी आती है, लेकिन, मंदी या स्लो ग्रोथ के समय इसमे गिरावट भी ज्यादा आती है। यानी चांदी में मुनाफे के साथ ही रिस्क भी उतना ही बड़ा है। वहीं, दूसरी ओर सोना अनिश्चित हालात में भरोसेमंद होने के साथ ही मुनाफा भी ज्यादा देता है। 


 

कब होती है सोने की सेफ हेवन भूमिका में मजबूती 
 

कई कारणों के चलते सोने में तेजी देखी जाती है। जैसे कि जब दुनिया में तनाव और फाइनेंशियल जोखिम में बढ़ौतरी होती है तो इससे सोने की सेफ हेवन भूमिका में मजबूती आती है। इन्वेस्टर्स को जियोपॉलिटिकल टकराव, ट्रेड विवाद, राजनीतिक अस्थिरता और बैंकिंग सेक्टर की परेशानी गोल्ड की ओर ले जाते हैं। वहीं, कई सेंट्रल बैंक विदेशी करेंसी पर निर्भरता को कम करने के लिए गोल्ड रिजर्व को बढ़ाते हैं, जिससे सोने (sone Ke Bhav) की डिमांड लंबे समय तक नी रहती है। 

2026 में कितने में मिलेगा एक तोला 
 

अब नए साल की शुरुआत हो गई है और जानकार का कहना है कि 2026 में सोना (Gold Rate in 2026) एक तय दायरे में ट्रेड कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में सोने की कीमत $3,900 से $5,000 प्रति औंस के बीच ट्रेड कर सकती है। अगर वैश्विक तनाव या फाइनेंशियल संकट में इजाफा होता है तो सोने की की कीमतें इससे ऊपर भी जा सकती है। 
 

किन कारणों से मिलेगा सोने को सपोर्ट
 

हालांकि अगर रियल ब्याज दरों में बढ़ौतरी (Increase in real interest rates) होती है और इकोनॉमिक ग्रोथ मजबूत रहती है तो इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ सकता है। अन्य एक्सपर्ट ने अनुमान जताया है कि 2026 में सोना $4,000 से $5,500 प्रति औंस के बीच रह सकता है। सोने की कीमतों को हाई ग्लोबल डेट, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और सेंट्रल बैंकों की खरीददारी का सपोर्ट  मिल सकता है।

इन्वेस्टर्स को ऐसे करना चाहिए सोने में निवेश 
 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने (Sone Ke Rates) को शॉर्ट टर्म ट्रेड की जगह लॉन्ग टर्म हेज के तौर पर देखना चाहिए। यह पोर्टफोलियो में रिस्क को बैलेंस करने का काम करता है।उतार-चढ़ाव का असर कम हो, इसके लिए इन्वेस्टर्स से धीरे-धीरे सोने में इन्वेस्ट करना चाहिए, क्योंकि सोना एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह है, जो इमरजेंसी में काम आता है।