Income tax Rule Change : आयकर के नियमों में बड़ा बदलाव, 1 तारीख से लागू होंगे ये 7 नियम

Income tax Rule : भारत में हो रही हर ट्रांजेक्शन पर इनकम टैक्स विभाग के द्वारा नजर रखी जाती है। बता दें कि अब 1 तारीख से इनकम टैक्स के नए नियम लागू हो जाएंगे। इसमें 7 नए नियमों को लागू किया जाएगा। ऐसे में टैक्सपैयर पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। आज हम आपको इस खबर के माध्यम से इनकम टैक्स विभाग के इन नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं इस बारे में।

 

HR Breaking News - (Income tax Rule Change)। हर ट्रांजेक्शन को परदर्शी बनाने और धोखाधड़ी को खत्म करने के लिए इनकम टैक्स विभाग के द्वारा समय समय पर नए नए नियमों को बनाता रहता है। बता दें कि अब एक बार फिर से इनकम टैक्स के नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। नियमों में ये बदलाव 1 तारीख से लागू हो जाएंगे। बता दें कि विभाग ने 7 नए नियमों (IT New Rule) को लागू कर दिया है। ऐसे में चलिये खबर के माध्यम से जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी।

नया आयकर अधिनियम हो जाएगा लागू-


देश में 1961 से चला आ रहा पुराना आयकर अधिनियम (income tax act) अब इतिहास बनकर सामने आने वाला है। 1 अप्रैल 2026 से पूरी तरह से नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू हो जाएगा। हालांकि, ये काफी राहत की बात है कि सरकार ने अभी इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है और पुराने ही स्लैब को सरकार जारी रखने वाली है। नए अधिनियम में भाषा को सरल बनाने और कानूनी पेचीदगियों को दूर करने पर फोकस किया जा रहा है।


ITR भरने की बदलेगी तारीख-

अब टैक्सपेयर्स को ITR भरने के लिए और भी ज्यादा समय दिया जाएगा। सरकार ने ITR-3 और ITR-4 भरने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है। पहले ये तारीख 31 जुलाई तक की थी। ये सुविधा उन टैक्सपेयर्स को मिल जाएगा। इनका ऑडिट नहीं होता है। वहीं ITR-1 और ITR-2 भरने की तारीख 31 जुलाई ही रहने वाली है। टैक्स ऑडिट की तारीख में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है और ये 31 अक्टूबर तक की हो जाएगी।


रिवाइज्ड रिटर्न भरने के लिए बनाई नई व्यवस्था-

अगर आप अपने भरे हुए ITR में कोई सुधार करना चाहते हैं तो अब आपके पास ज्यादा समय मिल जाएगा। सरकार ने रिवाइज्ड रिटर्न भरने की तारीख 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दी गई है। हालांकि ये एक अहम बात जान लेनी चाहिए कि अगर आप 31 दिसंबर के बाद रिवाइज्ड रिटर्न भरते हैं तो आपको अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होता है। वहीं बिलेटेड रिटर्न भरने की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

TCS की दरों में भी होगा बदलाव-


सरकार ने टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स की दरों में कई अहम बदलाव कर दिये हैं। जोकि सीधे आपकी जेब से कनेक्टिड है। शराब की बिक्री पर अब 1 प्रतिशत की जगह 2 प्रतिशत TCS लग जाएगा। वहीं स्क्रैप की बिक्री पर भी TCS बढ़ाकर 2 प्रतिशत तक का कर दिया गया है। जोकि पहले 1 प्रतिशत तक था। कोयला, लिग्नाइट और लौह अयस्क जैसे खनिजों की बिक्री पर भी अब 2 प्रतिशत TCS का भुगतान करना होगा। हालांकि राहत की बात ये है कि तेंदू पत्ता की बिक्री पर TCS घटाकर 2 प्रतिशत तक कर दिया गया है जोकि पहले 5 प्रतिशत तक का था।

विदेश यात्रा TCS में मिली राहत-


अगर आप विदेश यात्रा करने की प्लानिंग कर रहे हैं तो ये खबर आपके लिए काफी काम की हो सकती है। सरकार ने LRS के तहत विदेश यात्रा पैकेज पर लगने वाले TCS को सरल बना दिया है। अब इस पर सिर्फ 2% की एक समान दर लग जाएगी, चाहे कितनी भी रकम भेजी जाए। पहले ये 5 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की दो अलग-अलग दरों पर लगता था। वहीं शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजी जाने वाली रकम पर भी TCS घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जोकि पहले 5 प्रतिशत तक का था।

शेयर बाजार कारोबारियों को लगा झटका-


शेयर बाजार (stock market) में फ्यूचर और ऑप्शन का कारोबार करने वालों के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है। सरकार ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में बढ़ौतरी कर दी है। ऐसे में अब फ्यूचर पर लगने वाला STT 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत तक हो गया है। साथ ही में ऑप्शन पर लगने वाला STT 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत तक हो गया है। यानी की अब डेरिवेटिव मार्केट (Derivatives Market) में कारोबार करना पहले से महंगा हो जाएगा।

शेयर बायबैक और डिविडेंड को मिला बदलाव-

कंपनियों के द्वारा शेयर बायबैक (Share Buyback) पर अब नया टैक्स लागू कर दिया जाएगा। 1 अप्रैल 2026 से शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम पर कैपिटल गेन टैक्स लगना शुरू होगा। पहले इसको डीम्ड डिविडेंड मानकर टैक्स लगाया जाता था। प्रमोटर शेयरहोल्डर्स को अलग-अलग दरों से डिफरेंशियल बायबैक टैक्स (Differential Buyback Tax) का भुगतान करना होगा। कॉरपोरेट प्रमोटर्स को 22 प्रतिशत और नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स को 30 प्रतिशत की दर से ये टैक्स दिया जा रहा है।


डिविडेंड इनकम पर भी हुआ बदलाव-

डिविडेंड इनकम (Dividend Income) पर भी एक बड़ा बदलाव कर दिया गया है। बता दें कि अब आप डिविडेंड कमाने के लिए किए गए ब्याज खर्च पर कोई कटौती नहीं ले सकेंगे। पहले डिविडेंड इनकम पाने के लिए लिए गए लोन के ब्याज पर 20 प्रतिशत तक की कटौती दी जाती थी। हालांकि अब ये सुविधा खत्म कर दी गई है। यानी अब डिविडेंड की पूरी रकम पर आपको अपने टैक्स स्लैब (Tax Slab) के हिसाब से टैक्स देना होगा।