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मधुमक्खी पालन से हर साल 8 लाख कमा रहे करनाल के किसान रमेश सैनी

Business Idea : किसानों के लिए अनेकों स्कीम चलाई है। जिसमें किसान प्रशिक्षण लेकर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं। इसी तरह का एक उदाहरण करनाल के किसान रमेश सैनी (kisan Ramesh saini) ने पेश किया है। वो पिछले 32 सालों से मधुमक्खी पालन कर हर साल 8 लाख रुपये कमा रहे है। चलिए आगे खबर में जानते हैं उन्होंने इसके बारे में क्या है आदी विस्तार से।
 

HR Breaking News (Business Idea) : पारंपरिक खेती में जुटे चौरा खालसा गांव के रमेश सैनी ने करीब 32 साल पहले आमदनी बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन का रास्ता चुना था। उस समय उनके पास केवल 11 बक्सों से उन्होंने इसकी शुरुआत की थी। (Kisano k liye Business Idea) अब उनकी मेहनत के दम पर यह संख्या अब बढ़कर 1200 हो गई है। रमेश शहद तैयार करने के साथ में  मधुमक्खी और उनके पालन में इस्तेमाल होने वाले फ्रेम की सप्लाई भी करते हैं। इनसे से उन्हें सालाना करीब 8 लाख रुपए तक की आमदनी हो रही है। 

प्रशिक्षण लेकर शुरू किया ये काम

पारंपरिक खेती करने (Business Idea for farmer)वाले रमेश ने बताया कि शुरुआत में वह केवल खेती करते थे। लेकिन उन्हें बातचीत के दौरान पता चला कि राष्ट्रीय डायरी अनुसंधान संस्थान (National Diary Research Institute) में मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग (madhumakkhi palan ki training) दी जाती है। उसके बाद वह अपने भाई के संस्थान में पहुंचे और वहां से ट्रेनिंग संबंधित जानकारी हासिल कर ट्रेनिंग शुरू की। ट्रेनिंग समाप्त करने के बाद उन्होंने दोनों भाइयों ने मिलकर 11 बक्सों से मधुमक्खी पालन का काम शुरू किया। 

शुरूआत में आई परेशानियां 

उन्होंने बताया कि इस काम की शुरुआत में उन्होंने कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मधुमक्खियों के बीच काम करते समय डंक लगने का खतरा वहीं नए काम में होन वाले नुकसान की आशंका भी थी। हालांकि दोनों भाइयों ने काम लगातार जारी रखा और धीरे-धीरे मधुमक्खियां को संभालने से लेकर शहद बनाने तक का काम जारी रखा।

बेहतर उत्पादन के लिए इन बातों का रखना होता है ध्यान

रमेश के अनुसार मधुमक्खी पालन में शहद उत्पादन इस बात पर निर्भर करता है कि मधुमक्खियों को किस मौसम में किस तरह के फूल मिल रहे हैं। इसी वजह से वह फसलों और फूलों की उपलब्धता के अनुसार बक्सों को अलग-अलग क्षेत्र में ले जाते हैं। सरसों के सीजन में शहर का उत्पादन अच्छा होता है इसलिए इस दौरान बक्से अपनी इलाके में ही रखे जाते हैं दिसंबर में राजस्थान और फरवरी में उत्तर प्रदेश ले जाया जाता है। सेबों के सीजन में कुल्लू मनाली क्षेत्र के स्थानीय व्यापारियों को भी बक्से किराए पर दिए जाते हैं। 

शहद के कारोबार को आगे बढ़ाया

उन्होंने बताया कि जिस तरह उत्पादन बड़ा (honey production) और आमदनी अच्छी होने लगी तो उन्होंने इस काम को आगे बढ़ाने का फैसला लिया और धीरे-धीरे बक्सों की संख्या बढ़ाई। अब मधुमक्खी पालन उनकी आय का प्रमुख साधन बनी उन्होंने कारोबार को केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अपनी फर्म का पंजीकरण करवा कर मधुमक्खी और फ्रेम की सप्लाई भी शुरू कर दिया वह प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्र में मधुमक्खी पलकों को इनकी आपूर्ति करते हैं ।

अन्य किसान भी जुड़े

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में तीन चार लोग ही इस काम से शुरुआत में जुड़े थे। उनको देखने के बाद अब मधुमक्खी पालन में 30 से अधिक किसान इस व्यवसाय से जुड़ चुके हैं। इससे पता चलता है कि समय के साथ मधुमक्खी पालन के प्रति किसानों की सोच बदली है और उनकी रुचि बढ़ी है।