Oil price hike : रसोई का बिगड़ेगा बजट, खाद्य तेल की कीमत 11% बढ़ी
HR Breaking News (Oil price hike) खाद्य तेल की कीमतों में बढ़ने से आम उपभोक्तओं की चिंताए काफी बढ़ गई है। त्योहारी सीजन की मांग पूरा करने के लिए खाद्य तेल व्यापारियों की ओर से खाद्य तेलों का जमकर इंपोर्ट किया है। बढ़ते खर्चों के बीच आम आदमी को रसोई का बजट (Edible Oil Imports) बिठाने में मुश्किलात आ रही है। खबर में जानिए खाद्य तेल की कीमतों में कितनी बढ़ौतरी हुई है।
2025-26 के दौरान भारत का खाद्य तेल इंपोर्ट
आपको बता दें कि नवंबर-सितंबर 2025-26 के दौरान भारत का खाद्य तेल इंपोर्ट (India's edible oil imports) 3.27 प्रतिशत बढ़ा है, जो 151.64 लाख टन पहुंच गया है, जो एक साल पहले 146.83 लाख टन के आस-पास था। इसमें पाम ऑयल की भागीदारी सबसे ज्यादा थी। सितंबर में प्रमुख खाद्य तेलों की कीमतों (edible oil prices) में बीते वर्ष की तुलना में 9.7–11.2 प्रतिशत का इजाफा हुआ है, जिसका बड़ा कारण डॉलर के तुलना में रुपया का कमजोर होना है।
कच्चे पाम ऑयल की आवक
कच्चे पाम ऑयल की ज्यादा आवक (crude palm oil arrivals) की वजह से पाम ऑयल का इंपोर्ट 5.32 प्रतिशत बढ़ा है, जो अब 73.52 लाख टन हो गया। सोयाबीन ऑयल का इंपोर्ट 3.25 प्रतिशत बढ़कर 51.76 लाख टन पहुंच गया है, जबकि सनफ्लावर ऑयल का इंपोर्ट 1.90 प्रतिशत कम होकर 26.24 लाख टन ही रह गया है। रिफाइंड खाद्य तेल का इंपोर्ट कम होकर 7.40 लाख टन हो गया। वहीं, क्रूड ऑयल का इंपोर्ट बढ़कर 144.23 लाख टन हो गया ।
कितना हुआ क्रूड खाद्य तेल का इंपोर्ट
रिफाइंड तेल की तुलना में क्रूड तेल के इंपोर्ट में बड़ा बदलाव आया है। रिफाइंड खाद्य तेल का इंपोर्ट 16.89 लाख टन से कम होकर 7.40 लाख टन रह गया है, जिससे कुल इंपोर्ट में इसकी भागीदारी 12 प्रतिशत से कम होकर 5 प्रतिशत हो गई।
क्रूड खाद्य तेल का इंपोर्ट (Import of crude edible oil) 129.93 लाख टन से बढ़कर 144.23 लाख टन पहुंच गई है। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि रिफाइंड पामोलीन इंपोर्ट की जगह अब क्रूड पाम ऑयल ने ली है।
खाद्य तेल की आपूर्ति वाला बड़ा देश बना अर्जेंटीना
सबसे पहले आप यह जान लें कि अर्जेंटीना भारत को खाद्य तेल की आपूर्ति (Edible oil supply to India) करने वाला बड़ा देश बन रहा है। अर्जेंटीना ने कुल 34.43 लाख टन खाद्य तेल का एक्सपोर्ट किया है, जिसमें 27.14 लाख टन क्रूड सोयाबीन ऑयल शामिल था और 7.29 लाख टन सनफ्लावर ऑयल का एक्सपोर्ट किया था।
मलेशिया की ओर से 29.76 लाख टन पाम ऑयल की सप्लाई की। वहीं, इंडोनेशिया की ओर से 29.05 लाख टन का एक्सपोर्ट किया है। नेपाल की ओर से भी भारत को 6.82 लाख टन रिफाइंड तेल का एक्सपोर्ट किया है, जिसमें 6.05 लाख टन रिफाइंड सोयाबीन तेल भी शामिल था। नेपाल को SAFTA प्रोविजन के अंतर्गत शून्य इंपोर्ट शुल्क का फायदा मिला है।
कौन सा तेल हुआ कितना महंगा
बीते वर्ष की तुलना में सितंबर 2026 में खाद्य तेलों की कीमतों (edible oil prices) में बढ़ौतरी हुई है। इस बढ़ौतरी का बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों का बढ़ना और रुपये में आई गिरावट है। आरबीडी पामोलीन के रेट 9.7 प्रतिशत बढ़कर 1,119 डॉलर से 1,228 डॉलर प्रति टन हुई है।
वहीं, क्रूड पाम ऑयल की कीमतें (Crude Palm Oil Prices) 10.4 प्रतिशत बढ़कर 1,164 से 1,285 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। क्रूड सोयाबीन ऑयल की कीमतें भी 11.2 प्रतिशत बढ़कर 1,314 डॉलर प्रति टन पहुंच गई है और क्रूड सनफ्लावर ऑयल की कीमतें 10.8 प्रतिशत बढ़कर 1,432 डॉलर प्रति टन पहुंच गई है।
किन कारणों से महंगा हुआ खाद्य तेल
केडिया एडवाइजरी के अनुसार इसी बीच रुपया अमेरिकी डॉलर की तुलना में 88.32 रुपये से कमजोर होकर 95.51 रुपये पर पहुंचा है, जिसमें तकरीबन 8.1 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली है। इससे इंपोर्ट तेलों की लागत (cost of import oils) में इजाफा हुआ है। इंपोर्ट की ज्यादा मात्रा, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ौतरी और रुपये की कीमत में गिरावट की गिरावट की वजह से देशभर के लिए खाद्य तेल की इंपोर्ट लागत बढ़ रही है। वहीं, कच्चे तेल की तरफ झुकाव से सोर्सिंग के तरीकों में बदलाव आ रहा है।