हरियाणा में अग्निवीरों को लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट से मिलेगी छूट
HR Breaking News (Haryana News) हाल ही में हरियाणा में अग्निवीर नीति में बदलाव को मंजूरी दे दी गई है, जिसके तहत अब अग्निवीर संबंधित पोस्ट की शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification for Agniveer Post) और अनिवार्य शर्तों को पूरा कर बिना लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट के पद पर भर्ती का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए गाइडलाइंस जारी कर दी गई है। इससे पहले भी अग्निवीरों के लिए कई प्रोविजन लागू हो चुके हैं।
PMT और PST से भी मिलेगी छूट
ग्रुप-C के पोस्ट पर सीधी भर्ती (Direct Recruitment to Group-C Posts) के लिए अब उन्हें लिखित भर्ती परीक्षाएं नहीं देनी होगी। 4 विभागों के चुने हुए पोस्ट पर PMT और PST से भी छूट दी जाएगी। बीते दिनों मंत्री परिषद की बैठक में राज्य की अग्निवीर नीति में बदलाव (Changes in Agniveer policy) को मंजूरी दे दी गई है। फिजिकल टेस्ट में यह छूट वन एवं वन्य जीव विभाग में वाइल्डलाइफगार्ड, इंडियन रिजर्व बटालियन और राज्य आपदा मोचन बल में कांस्टेबल और राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में फायर ऑपरेटर कम-ड्राइवर के पदों पर मिलने वाली है।
मेरिट को लेकर बाद में होंगे नियम जारी
भर्ती के लिए अग्नि वीरों को संबंधित पोस्ट की शैक्षणिक योग्यता और अनिवार्य शर्तों को पूरा करना होगा। भर्ती में मेरिट को लेकर नियम बाद में जारी होंगे। यह फायदा सिर्फ हरियाणा (Haryana Agniveers Posts) के मूल निवासी अग्निवीरों को ही दिया जाने वाला है। सरकार पहले ही अग्नि वीरों के लिए आरक्षण, अधिकतम आयु सीमा में छूट और CET से छूट में प्रोविजन कर चुकी है और नियुक्ति के बाद सबंधित विभाग के सेवा नियम लागू रहेंगे।
11 में से 9 प्रस्ताव को मिली मंजूरी
अग्निवीरों की नियुक्ति (Agniveers Posts Apply Process) से किसी कैटेगरी में पदों की संख्या कम होती है तो इसकी भरपाई उसी कैटेगरी की भविष्य की भर्तियों में की जाने वाली है। सीएम नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में 11 में से 9 प्रस्ताव को सरकार की ओर से मंजूरी दे दी गई है, जिसमे कई योजनाएं शामिल है।
खान एवं भू विज्ञान विभाग में माइनिंग गार्ड का पद (Mining Guard Post) ग्रुप-डी से ग्रुप-सी में तब्दील करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है, जिसे फंक्शनल पे लेवल 2 में रखा जाने वाला है, जिसके लिए पद को ग्रुप-डी के सेवन नियमों से हटाया जाने वाला है।
अग्निवीरों के लिए आसान होगी रियायतें
इस बदलाव कर मकसद पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण (Reservation for ex-fire warriors) को लागू करना और अन्य रियायतों को आसान बनाना है। नया वर्गीकरण वन विभाग के फॉरेस्ट गार्ड, कारागार विभाग के वार्डर और गृह विभाग के पुलिस कांस्टेबल जैसे ग्रुप-C पदों के अनुरूप होने वाला है।
इसके साथ ही फाइनेंशियल ईयर 2026 से 27 (Financial Year 2026- 27) से सातवें राज्य वित्त विभाग की रिपोर्ट जब तक नहीं आती है, तब तक पंचायत और शहरी निकायों को पहले जैसा ही पैसा मिलता रहेगा।
पंचायत समिति और जिला परिषदों को ऐसे मिलेगा पैसा
राज्य के अपने कर राजस्व का 7 प्रतिशत भाग इनके लिए रखा जाने वाला है, जिसमें से 80 प्रतिशत राशि आबादी और 20 प्रतिशत जमीन के क्षेत्रफल के बेस पर वितरित की जाने वाली है। ग्राम पंचायतों, पंचायत समिति और जिला परिषदों को 75:15:10 के अनुपात में पैसा (Proportionate funds to district councils) मिलेगा। निकाय में इस राशि का 30 प्रतिशत रोड को पक्की करने पर खर्च कर सकेंगे।
5 साल के लिए पट्टे पर दी जाएगी जमीन
इसके साथ ही सरकार की ओर से जो अन्य प्रस्ताव पास किए गए हैं, उसके तहत ग्राम पंचायत की साझा जमीन (Gram Panchayat common land) पर हर-हित स्टोर खोलने के लिए डीसी मंजूरी दे सकेंगे। इसके लिए 20 वर्ग गज जमीन पट्टे पर दी जाने वाली है।
इसके लिए पहले राज्य सरकार से परमिशन ली जाती थी। जमीन 5 साल तक के लिए पट्टे पर दी जा सकेगी। अगर जरूरत पड़ती है तो इसकी अवधि 3 साल ओर बढ़ाई जा सकेगी। जमीन का किराया और दूसरी शर्तें राज्य सरकार की ओर से तय की जाने वाली है।
सरकारी आवासों पर दंडात्मक किराया माफ
फ्रेंचाइजी (franchise Kya Hai) के माध्यम से हर-हित स्टोर चलाने की जमीन आगे पट्टी पर डेरा नहीं माना जाने वाला है। कैबिनेट की ओर से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हरियाणा आवास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष के सरकारी आवासों पर दंडात्मक किराए को माफ कर दिया है। हुड्डा की चंडीगढ़ के सेक्टर-7 में मौजूद कोठी पर 27.17 लाख रुपए और राजदीप सिंह के पंचकूला में मौजूद सरकारी आवास पर 38.47 लाख रुपये का किराया एरियर था। दोनों को मिलाकर कुल 65.64 लाख रुपए का किराया माफ किया है।
CRID को स्वतंत्र विभाग बनाने की मंजूरी
सिर्फ इतना ही नहीं कैबिनेट की ओर से सिटीजन रिसोर्स इनफॉरमेशन डिपार्मेंट (Citizen Resource Information Department) को स्वतंत्र विभाग बनाने की भी मंजूरी दे दी गई है। हारट्रोन भी अब इसके लिए प्रशासन नियंत्रण में रहने वाला है। CRID परिवार पहचान पत्र (CRID Family Identity Card), डिजिटल सेवाओं और ई-गवर्नेंस से जुड़े कार्य देखता है। हरसैक और दृश्य से जुड़े कार्य भी इसके दायरे के अंतर्गत आते हैं। हारट्रोन सरकारी विभाग के IT सिस्टम, डिजिटल प्रोजेक्ट की व्यवस्था में मददगार है।