हिसार मंडी में 83000 क्विंटल बाजरे की आवक, भाव नहीं मिलने से किसान परेशान
HR Breaking News (Hisar Mandi) मंडियों में बाजरे की आवक भी काफी ज्यादा हो गई है, लेकिन अभी तक बाजरे की सरकारी खरीद शुरू नहीं हुई है। ऐसे में बाजरे की अलग-अलग मंडियों में कीमत (Hisar Mandi) विभिन्न है। अभी किसान अपनी पथ्ऊसल को लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं और निजी खरीददारों को बाजरे की बिक्री कर रहे हैं। खबर में जानिए हिसार अनाज मंडी में अब तक किन फसलों की आवक शुरू हो गई है।
क्या चल रहा बाजरे का भाव
हिसार अनाज मंडी (Hisar Grain Market) में अब तक 83000 क्विंटल बाजरे की आवक हो गई है, जिसके लिए कुल 399 गेट पास काटे गए हैं। अभी तक बाजरे की सरकारी खरीदी शुरू नहीं हुई है। किसानों को भावांतर पर फसल बेचने का अवसर मिल रहा है। भावांतर के लिए मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल (meri fasal mera byora portal) पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। मंडी में बाजरे का भाव 2300 से 2550 रुपए प्रति क्विंटल तक मिल रहा है।
हिसार अनाज मंडी में मूंगफली की आवक
सरकारी खरीद शुरू नहीं होने के बाद भी मंडी में बाजरे की आवक (bajre ki aavak) बनी हुई है। भावांतर भाव के चलते भाव में अंतर होने की वजह से किसानों को मिलने वाले दम अलग-अलग है। हिसार अनाज मंडी में मूंगफली की आवक चल रही है। अब तक मंडी में 15800 क्विंटल मूंगफली पहुंच गई है। मूंगफली की खरीद निजी स्तर पर हो रही है। हिसार मंडी में धान की आवक नहीं होती है।
धान से भरी पड़ी है मंडियां
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल की प्रांतीय अध्यक्ष और हरियाणा कान्फैड के पूर्व चेयरमैन ने उकलाना मंडी में धान खरीद का जायजा लेने के उपरांत कहा है कि सरकार द्वारा खरीद व उठान बड़ी धीमी गति से करने से किसानों और आढ़तियों में भारी नाराजगी बनी हुई है। सरकार द्वारा धान की खरीद (dhaan ki kharid) और उठान ना होने से मंडियां धान से भरी पड़ी हुई है। हरियाणा में तीन बार बारिश होने की वजह से करोड़ों रुपए का धान और बाजार खराब हुआ है।
सरकार ने आढ़तियों का कमीशन किया कम
सरकार को अपने वायदे के मुताबिक तुरंत ही धान खरीद और उठान करना चाहिए। बजरंग गर्ग (Bajrang Garg) का कहना है कि सरकार की गलत नीतियों से आढ़ती और किसान परेशान है। सरकार को समय पर किसान की की अनाज उठान और भुगतान करना चाहिए। बजरंग गर्ग का कहना है कि सरकार ने धान और गेहूं का कमीशन (Commission on Paddy and Wheat) कम करके आढ़तियों के साथ ज्यादती की है।
30 सालों से हर अनाज खरीद पर आढ़तियों को ढाई प्रतिशत कमीशन मिलता था।
वहीं महंगाई पहले से दो से तीन गुना अधिक हो गई है, लेकिन सरकार ने आढ़तियों का कमीशन (commission of middlemen) कम कर दिया है। इस मौके पर धर्मपाल धायल, सुभाष फरोदपुरिया, गुलशन बढ़ला, बलराज गर्ग, सतीश दनोदा, सुरेश गर्ग के साथ आदि प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे हैं।