Uttar Pradesh में 37,500 करोड़ से बनेगा 550 KM का एक्सप्रेसवे, इस जिले में 187 हेक्टेयर भूमि का होगा अधिग्रहण
HR Breaking News, Digital Desk- (Uttar Pradesh) जिले से होकर गुजरने वाली छह लेन सड़क के निर्माण को केंद्र सरकार ने अंतिम मंजूरी दे दी है। इसकी स्वीकृति मिलने के साथ ही भू-अर्जन की प्रक्रिया (land acquisition process) भी शुरू कर दी गई है। यह महत्वाकांक्षी सड़क गोरखपुर-सिलिगुड़ी एक्सप्रेसवे के नाम से जिले के दो प्रखंड, बैरिया और नौतन, से होकर गुजरेगी।
इसके निर्माण के लिए थ्री-ए के तहत एलाइनमेंट की अधिसूचना (Notification of Alignment) जारी कर दी गई है। बैरिया और नौतन प्रखंड से गुजरने वाली एक्सप्रेसवे में प्रत्येक प्रखंड के 7-7 मौजों को शामिल किया गया है। अब इसके लिए खेसरा चिह्नित करने का कार्य शुरू किया जाएगा।
जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार के अनुसार, भू-अर्जन के लिए दोनों प्रखंडों में कुल 187.23 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। जिले से गुजरने वाली इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद सांस्कृतिक (cultural), आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
550 किलोमीटर लंबी होगी यह सड़क-
गोरखपुर-सिलिगुड़ी एक्सप्रेसवे भारत सरकार की प्रमुख परियोजना है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 550 किलोमीटर तय की गई है। इसके निर्माण से इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा। खास बात यह है कि इस एक्सप्रेसवे में कोई बड़ा टर्मिनल (terminal) नहीं होगा। पूरी परियोजना पर करीब 37,500 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
बिहार के 8 जिलों से होकर गुजरेगी यह सड़क-
गोरखपुर-सिल्लीगुड़ी एक्सप्रेस वे (Gorakhpur-Siliguri Expressway) सूबे के आठ जिलों से होकर गुजरेगी। इसमें पश्चिम चंपारण जिले (West Champaran district) के साथ-साथ पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज शामिल हैं। इसके माध्यम से राज्य के 39 प्रखंड और 313 गांव जुड़ेंगे।
स्थानीय विकास के खुलेंगे रास्ते-
यह सुपर स्ट्रक्चर शहरी आबादी से अलग मार्ग से गुजरेगा, जिससे भूमि अधिग्रहण (land acquisition) में किसी भी तरह की समस्या नहीं आने की संभावना है। जिले के उन क्षेत्रों से गुजरते हुए यह एक्सप्रेसवे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर और आर्थिक विकास (economic development) के महत्वपूर्ण रास्ते खोलेगा।
एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद इन क्षेत्रों में छोटे और बड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। परिवहन और आवागमन सुगम होने से राज्यों के बीच व्यापार में भी तेजी आएगी। साथ ही, केंद्र सरकार (central government) द्वारा विकसित किया जा रहा औद्योगिक कॉरिडोर (industrial corridor) इस क्षेत्र में विकास और रोजगार को नई गति प्रदान करेगा।
