home page

8th Pay Commission : कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव की तैयारी, कहां से कहां तक रहेगा फिटमेंट फैक्टर

8th Pay Commission : केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। आगामी वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। कर्मचारी संगठनों ने इसे बढ़ाने की मांग की है, जिससे बेसिक सैलरी (basic salary) में बड़ा इजाफा हो सकता है। माना जा रहा है कि नया फिटमेंट फैक्टर मौजूदा स्तर से ज्यादा तय किया जा सकता है-

 | 
8th Pay Commission : कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बदलाव की तैयारी, कहां से कहां तक रहेगा फिटमेंट फैक्टर

HR Breaking News, Digital Desk- (8th Pay Commission) आठवें वेतन आयोग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के मन में यही सवाल है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर (8th Pay Commission fitment factor) कितना तय किया जाएगा।

फिलहाल अलग-अलग कर्मचारी संगठनों (employee organizations) और विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक यह आंकड़ा करीब 2 से 3.6 के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

फिटमेंट फैक्टर को लेकर चल रही इन चर्चाओं पर Shiva Gopal Mishra ने भी प्रतिक्रिया दी है। National Council-Joint Consultative Machinery (NC-JCM) (स्टाफ साइड) के नेता और All India Railwaymen's Federation के जनरल सेक्रेटरी मिश्रा ने साफ कहा है कि अभी तक इस मामले में आधिकारिक तौर पर कोई फैसला नहीं लिया गया है।

'फिटमेंट फैक्टर संवेदनशील मुद्दा'

उन्होंने कहा कि,

फिटमेंट फैक्टर बेहद संवेदनशील मुद्दा है और इस पर अलग-अलग संगठनों की अलग राय है। इसलिए फिलहाल कोई भी संख्या सार्वजनिक करना सही नहीं होगा।"

उनका कहना है कि सरकार के सामने एक कॉमन मेमोरेंडम पेश किया जाएगा और सभी पक्षों की सहमति बनने के बाद ही अंतिम प्रस्ताव आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक इस मुद्दे पर पूरी एकजुटता नहीं बन जाती, तब तक किसी भी तरह का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों के बीच किसी तरह का भ्रम न फैले।

वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी-

हालांकि इतना जरूर स्पष्ट किया गया है कि इस बार केवल फिटमेंट फैक्टर (fitment factor update) पर ही नहीं, बल्कि पूरे वेतन ढांचे में बदलाव की तैयारी चल रही है। खासतौर पर उस ‘बास्केट’ में संशोधन की चर्चा है, जिसके आधार पर महंगाई, न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर तय (fitment factor fixed) किए जाते हैं। स्टाफ साइड का मानना है कि मौजूदा समय में लोगों के खर्च का पैटर्न पहले की तुलना में काफी बदल चुका है, इसलिए वेतन निर्धारण के मानकों को भी अपडेट करना जरूरी है।

उदाहरण के तौर पर-

अब सिर्फ दाल-चावल से घर नहीं चलता, खान-पान की आदतें बदल गई हैं।

रहन-सहन का स्तर बढ़ा है- AC, फ्रिज, बेहतर हाउसिंग अब जरूरत बन चुके हैं।

बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनशैली पर खर्च पहले से ज्यादा है।

स्टाफ साइड का मानना है कि यदि बदलते सामाजिक और आर्थिक हालात को वेतन निर्धारण में शामिल नहीं किया गया, तो कर्मचारियों को वास्तविक राहत नहीं मिल पाएगी। इसी वजह से इस बार मेमोरेंडम को ठोस तथ्यों और विस्तृत गणनाओं (detailed calculations) के आधार पर तैयार किया जा रहा है, ताकि सरकार के सामने मजबूत और तर्कसंगत प्रस्ताव रखा जा सके।

AIRF जनरल सेक्रेटरी का संदेश साफ है कि भले ही फिटमेंट फैक्टर को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है, लेकिन इस बार वेतन आयोग में सैलरी स्ट्रक्चर (salary structure) में बड़े स्तर पर बदलाव संभव हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार कर्मचारियों की इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।