8th Pay Commission : नए वेतन आयोग में क्या-क्या होंगे बदलाव, जानिए कर्मचारियों के लिए कब होगा लागू
8th Pay Commission - केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 8वां केंद्रीय वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नए वेतन आयोग में सैलरी, भत्तों, फिटमेंट फैक्टर और पेंशन में बदलाव की उम्मीद की जा रही है। साथ ही यह सवाल भी अहम है कि इसकी सिफारिशें कब लागू होंगी और कर्मचारियों को इसका लाभ कब से मिलेगा... तो चलिए आइए जान लेते है नीचे इस खबर में-
HR Breaking News, Digital Desk- (8th Pay Commission) आठवें केंद्रीय वेतन आयोग (8वां सीपीसी) के गठन की प्रक्रिया शुरू होते ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स में नई उम्मीदें जगी हैं। माना जा रहा है कि टर्म्स ऑफ रेफरेंस (ToR) नवंबर 2025 में जारी होने के बाद आयोग करीब 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशी रिपोर्ट सौंप सकता है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ये सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होंगी या फिर इसमें और देरी होगी।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार से साफ मांग की है कि वेतनमान, भत्तों, पेंशन और अन्य लाभों में संशोधन 1 जनवरी 2026 से ही लागू किया जाए, न कि किसी बाद की संभावित तारीख से। संगठन का कहना है कि कर्मचारियों के लिए पे रिवीजन पहले ही देय हो चुका है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें (Recommendations of the Eighth Pay Commission) लागू करने के लिए सरकार अगर कोई संभावित तारीख चुनती है तो कर्मचारियों और पेंशनर्स को ठीक-ठाक एरियर्स का नुकसान हो सकता है। 7वें वेतन आयोग का समय 31 दिसंबर 2025 को खत्म हो गया।
जानें क्या कहते हैं ट्रेंड-
पिछले अनुभवों को देखें तो सरकार ने आमतौर पर पिछले वेतन आयोग की अवधि खत्म होने के अगले ही दिन से एरियर दिया है। उदाहरण के तौर पर, छठा वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशें मार्च 2008 में सौंपी थीं, लेकिन कर्मचारियों और पेंशनर्स को एरियर 1 जनवरी 2006 से दिया गया था। इसी परंपरा के आधार पर 8वें वेतन आयोग को लेकर भी 1 जनवरी 2026 से लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अब तक के वेतन आयोगों की टाइमलाइन-
सातवें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में किया गया था। आयोग ने नवंबर 2015 में अपनी रिपोर्ट सौंपी और इसे जून 2016 से लागू किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग ढाई साल का समय लगा। कर्मचारियों और पेंशनर्स को जनवरी 2016 से जून 2016 तक का एरियर दिया गया था।
वहीं, 6वें वेतन आयोग का गठन अक्टूबर 2006 में हुआ। इसकी रिपोर्ट मार्च 2008 में सबमिट की गई और अगस्त 2008 से इसे लागू किया गया। इसमें एरियर का भुगतान दो चरणों में हुआ-40 प्रतिशत राशि 2008 में और शेष 60 प्रतिशत 2009 में दी गई।
इसके अलावा 5वें वेतन आयोग (5th pay commission) का गठन अप्रैल 1994 में हुआ था। आयोग ने जनवरी 1997 में अपनी रिपोर्ट दी और अक्टूबर 1997 से इसे लागू किया गया। इस आयोग की प्रक्रिया को पूरा होने में करीब साढ़े तीन साल लगे थे।
पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग-
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) ने साफ शब्दों में मांग की है कि कंट्रीब्यूटरी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को समाप्त किया जाए तथा नॉन-कंट्रीब्यूटरी ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को फिर से लागू किया जाए। संगठन का कहना है कि पेंशनर्स (pensioners) के हितों की अनदेखी नहीं की जा सकती। AITUC ने 8वां केंद्रीय वेतन आयोग से आग्रह किया है कि पेंशन रिवीजन के माध्यम से अपनी सिफारिशों में पेंशनर्स को भी पूरी तरह शामिल किया जाए।
साथ ही, पेंशन रेस्टरैशन के कम्प्यूटेशन (Computation of Pension Restatement) को मौजूदा 15 साल से घटाकर 11 से 12 साल किया जाना चाहिए। AITUC ने यह भी रिकमंड किया है कि पेंशन में इजाफा हर 5 साल के बाद होना चाहिए।
आठवां वेतन आयोग और फिटमेंट फैक्टर-
8वां केंद्रीय वेतन आयोग ने मुआवजा (कम्पन्सेशन) संशोधन को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारियों, पेंशनर्स, कर्मचारी यूनियनों और अन्य स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा है। इस प्रक्रिया में कई कर्मचारी यूनियनों ने अपनी मांगें सामने रखी हैं, जिनमें फिटमेंट फैक्टर प्रमुख मुद्दा है। इसी कड़ी में फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (Federation of National Postal Organisations) ने 3.0 से 3.25 के बीच फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की है।
