8th Pay Commission पर हुई बड़ी बैठक, जानें किन बातों पर बन गई सहमति
8th Pay Commission - आठवें वेतन आयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें स्टाफ साइड और अधिकारियों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन, भत्ते और नया वेतन पैटर्न सहित अन्य प्रमुख बिंदुओं पर विचार-विमर्श हुआ...ऐसे में चलिए आइए नीचे खबर में जान लेते है कि आखिर किन बातों पर सहमति बनीं-
HR Breaking News, Digital Desk- (8th Pay Commission) आठवें वेतन आयोग को लेकर बुधवार, 25 फरवरी को नेशनल काउंसिल-जेसीएम (स्टाफ साइड) की ड्राफ्टिंग कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक (8th Pay Commission JCM meeting) हुई। इसमें स्टाफ साइड के नेता शामिल हुए और सरकार को सौंपे जाने वाले मेमोरेंडम को अंतिम रूप देने पर विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में उठाए गए अहम मुद्दे-
रेलवे कर्मचारियों (railway employees) की सबसे बड़ी यूनियन AIRF के जनरल सेक्रेटरी और स्टाफ साइड के नेता शिव गोपाल मिश्रा (Shiv Gopal Mishra 8th Pay Commission) ने मीडिया को बताया कि बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि…
मीटिंग में विशेष रूप से फिटमेंट फैक्टर (8th Pay Commission fitment factor) कितना होना चाहिए, न्यूनतम वेतन क्या तय किया जाए, यूनिट की संख्या कितनी हो, कौन-कौन से भत्ते शामिल किए जाएं और नया वेतन पैटर्न कैसा हो-इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा आठवें वेतन आयोग से जुड़े 18 प्रमुख सवालों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
हालांकि उन्होंने साफ किया कि करीब 2 घंटे तक चली मीटिंग में में चर्चा अभी पूरी नहीं हुई है। 10 मार्च के बाद होने वाली अगली बैठक में इन मुद्दों पर फिर से बात होगी और उसके बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
डॉ. पटेल ने उठाया खास मुद्दा-
वहीं, ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉईज फेडरेशन (All India NPS Employees Federation) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने एक अहम मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जेसीएम (जॉइंट कंसलटिव मशीनरी) केंद्र सरकार के कर्मचारियों और सरकार के बीच बातचीत का मजबूत मंच है, लेकिन 1961 से अब तक इसमें केंद्रीय स्वायत्त विभागों और केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि देश में आठ केंद्र शासित प्रदेश हैं और लगभग हर मंत्रालय में ऑटोनॉमस संस्थाएं हैं, जिनमें लाखों कर्मचारी कार्यरत हैं। इन पर केंद्र सरकार के नियम लागू होते हैं, लेकिन कई बार नियमों को लागू करने में देरी या अनियमितता होती है, जिससे कर्मचारियों को भेदभाव का सामना करना पड़ता है।
डॉ. पटेल ने कहा कि जेसीएम में इन कर्मचारियों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, ताकि उनकी समस्याओं का समय पर और प्रभावी समाधान हो सके।
